यशवंत जी नमस्कार, जानकारी देना चाहूंगा कि विगत दिवस एए तन्हा के हिन्दुस्तान से इस्तीफे के पीछे संपादक गुरनानी जी का हाथ नहीं है। बल्कि उसके पीछे ऐसे छुपे चेहरों का हाथ है जिन्होंने तन्हाजी को हिन्दुस्तान से इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया तथा षड़यन्त्र रचते हुये संपादक महोदय पर आरोप लगवा दिये। इसमें खुलकर सामने आ रहा है कि यह षड़यन्त्र हिन्दुस्तान अखबार के उत्तराखण्ड के मैनेजमेंट से जुड़े एक बड़े अधिकारी, जिनका पूरे उत्तराखण्ड संस्करण में विज्ञापन बिजनेस का जिम्मा है तथा उधमसिंह नगर के विज्ञापन प्रतिनिधि पीयूष पन्त का इस घालमेल में पूरा-पूरा हाथ है।
सूत्रों से पता चला है कि किच्छा में प्रबंधन द्वारा विज्ञापन प्रतिनिधि के रूप में रखा गया व्यक्ति कैलाश पण्डित पूर्व में विभिन्न समाचार पत्रों में दागी के रूप में पहचाना जाता है तथा जिसकी अन्य पेपरों में नो एन्ट्री है तथा ब्लैक लिस्टेड है। वर्तमान में इस व्यक्ति को हिन्दुस्तान के बैनर में विज्ञापन प्रतिनिधि के रूप में घुसाने वाले मैनेजमेंट के वरिष्ठ अधिकारी एवं पीयूष पन्त के इस व्यक्ति से बेहद करीबी ताल्लुकात हैं। ऐसे में निष्पक्ष छवि वाले तन्हा साहब इस कैलाश पण्डित का शुरू से हिन्दुस्तान में एंट्री करने का लगातार विरोध करते रहे हैं। यशवंत जी, बताना चाहूंगा कि हिंदुस्तान के वरिष्ठ अधिकारी एवं पीयूष पन्त एवं कैलाश पण्डित व एक अन्य अंगूठा छाप व्यक्ति अमित गुप्ता (जो दैनिक शाह टाइम्स में किच्छा सब रजिस्ट्रार अजब सिंह चौहान से हफ्ता वसूली के चलते सब रजिस्ट्रार की शिकायत एवं वकील के नोटिस पर धक्का देकर दैनिक शाह टाइम्स से निकाले दिये गये थे, तथा वर्तमान में अपनी पोल बचाने के लिये दैनिक आज अखबार की रिपोर्टिंग के पीछे छुपकर अपना मकड़जाल फैलाये हुये हैं) की चौकड़ी ने तन्हा साहब के विरूद्व षड़यन्त्र रच लिया था, जिसको संपादक के माध्यम से अमली जामा पहना दिया।
जानकारी देना चाहूंगा कि उक्त अमित गुप्ता की पैरवी किच्छा में रिपोर्टिंग के लिये लगातार की जा रही है। परन्तु आमने-सामने चाय का ढाबा चलाने वाले अमित गुप्ता और कैलाश पण्डित आये दिन कोतवाली पुलिस की गालियों का शिकार बनते रहते हैं। जानकारी दूंगा कि सीओ डॉ0 जगदीश चन्द्र, जो कि वर्तमान में 31वीं वाहिनी पीएसी रूद्रपुर मे सहायक कमाण्डेन्ट के पद पर तैनात हैं, उन्होंने विगत वर्ष 4 जून को कैलाश पण्डित को अवैध शराब बेचने एवं ढाबे पर शराब पिलाते हुये बन्दी बना लिया था, परन्तु किच्छा क्षेत्र के पत्रकारों ने पत्रकारिता पर दाग न लगे इसके चलते अनुग्रह करके हॉकर कैलाश पण्डित को बमुश्किल रिहा करवाकर मामला रफा दफा करवाया था। साथ ही उन्होंने कैलाश पण्डित को कड़ी चेतावनी दी थी। परन्तु अब उनके ट्रान्सफर हो जाने के बाद उक्त गुट फिर से सक्रिय हो गया है। तन्हा साहब के लिये कहना चाहूंगा कि तन्हा साहब आपने भी एक गलती की है कि आपने जल्दबाजी करते हुये अपने इस्तीफे के लिये संपादक गिरीश चन्द्र गुरनानी को जिम्मेदार ठहराया है, जो न्यायोचित नहीं हैं।
मैं संपादक की पैरवी नहीं कर रहा हूं परन्तु आपको ज्ञात करा दूं कि यह सारा खेल आपके और संपादक के विरुद्व हिंदुस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी, पीयूष पन्त एवं कैलाश पण्डित, अमित गुप्ता के द्वारा रचा गया था, जिसमें ये लोग कामयाब हो गये। बताना चाहूंगा कि इस गुट ने किच्छा क्षेत्र में अपनी दलाली का अड्डा बनाने के लिये किच्छा क्षेत्र में रिपोर्टिंग पाने के लिये देहरादून से लेकर दिल्ली तक पूरा जोर लगा रखा है। वहीं तन्हा साहब ने अपने स्वच्छ छवि के चलते इस्तीफा देने में कुछ मिनटों से ज्यादा समय नहीं लगाया। यशंवतजी, संपादक को आये मात्र 2 माह बीता है जिसमें वह इस क्षेत्र के बारे में बहुत कम या न के बराबर जानते हैं, जबकि विज्ञापन वाले इस उठा पठक के फूट डालकर राज करने के खेल में बड़े माहिर हैं। अब देखना ये है कि इस सारे प्रकरण के बाद उक्त गुट का सफाया हो पाता है या नहीं। हिन्दुस्तान अखबार के दिल्ली में बैठे प्रधान संपादक शशि शेखर की चुप्पी अब टूटनी चाहिये और इस प्रकरण का पटाक्षेप करना चाहिये। और दोषियों को सजा मिलनी चाहिये।
मोहम्मद इमरान
किच्छा, उधमसिंह नगर





