मुंगेर। दैनिक हिन्दुस्तान के दो सौ करोड़ रुपये के विज्ञापन घोटाले मामले में पांच माह की मशक्कत के बाद पुलिस ने अब ‘पर्यवेक्षण-रिपोर्ट‘ जारी कर दी है। पर्यवेक्षण-रिपोर्ट से देश के मीडिया हाउस की नींव हिल जायेगी। पर्यवेक्षण-रिपोर्ट ने मीडिया हाउसों के आर्थिक भ्रष्टाचार का पोल खोल दिया है। देश के अधिकांश हिन्दी और अंग्रेजी दैनिक अखबार दैनिक हिन्दुस्तान की तर्ज पर ही आर्थिक अपराध की गंगा में दशकों से गोता लगाते आ रहे हैं और बात-बात में केन्द्र और राज्य सरकारों को आंखें भी दिखाते आ रहे हैं। सारा आर्थिक अपराध संस्करणों के नाम पर अवैध अखबार निकालने और सरकारी विज्ञापन हासिल कर करोड़ों का वारा-न्यारा करने के अपराध से जुड़ा यह मामला है।
अब तक के पुलिस अनुसंधान और पर्यवेक्षण के बाद बोलते दस्तावेजों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है। कोतवाली कांड संख्या-445/2011। के सभी नामजद अभियुक्तों के विरुद्ध पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धाराएं 420, 471, 476 और प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन एवं बुक्स एक्ट 1867 की धाराएं 8 (बी), 14 और 15 के तहत लगाए गए सभी अभियोग को प्रथम दृष्टया सत्य घोषित कर दिया है। मुंगेर पुलिस अब सभी प्राथमिक और अप्राथमिक अभियुक्तों के विरुद्ध मुकदमा चलाएगी।
विश्व के अखबार जगत के आर्थिक भ्रष्टाचार का यह संभवत : पहला और बड़ा मामला है। इस मामले में पुलिस की पर्यवेक्षण रिपोर्ट को ऐतिहासिक माना जा रहा है। पुलिस ने पर्यवेक्षण रिपोर्ट में दस्तावेजों के आधार पर पर्दाफाश कर दिया है कि किस प्रकार अखबार छापनेवाली देश की कंपनियों के प्रबंधन और संपादकीय विभाग के बड़े-बड़े अधिकारी छल, जालसाजी और धोखाधड़ी का सहारा लेकर गैर रजिस्टर्ड अखबार के प्रिंट लाइन में दूसरे स्थान के रजिस्टर्ड अखबार की रजिस्ट्रेशन संख्या को छापकर राज्य और केन्द्र सरकारों के सरकारी कार्यालयों से करोड़ों-करोड़ रुपये का विज्ञापन बटोर रहे हैं और सरकार को चूना लगा रहे हैं।
पर्यवेक्षण रिपोर्ट से उजागर हो गया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त न्यायाधीश, मंत्री, मुख्यमंत्री, नेता, आईएएस और आईपीएस के भ्रष्टाचार की खबरों को सुर्खियों में छापनेवाले दैनिक हिन्दुस्तान का प्रबंधन और संपादकीय विभाग भी किस हद तक आर्थिक भ्रष्टाचार में डूबा है? देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्थाएं क्रमशः सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों को संज्ञान लेना चाहिए कि जब हर क्षेत्र के भ्रष्टाचार की खबर मीडिया में आ सकती है, तो अखबार के भ्रष्टाचार की खबर को भी आम जनता के बीच लाने के उपाय पर सोचने और कदम उठाने की तत्काल जरूरत है। दैनिक हिन्दुस्तान के विज्ञापन घोटाले की खबर को पुलिस में प्राथमिकी से पर्यवेक्षण रिपोर्ट आने तक देश के किसी भी हिन्दी, अंग्रेजी, बंग्ला और उर्दू दैनिकों ने नहीं छापा है। किसी भी न्यूज चैनलों ने भी इस भ्रष्टाचार की खबर को नहीं दिखाया है। यह भारतीय लोकतंत्र की बरबादी की निशानी है।
पर्यवेक्षण रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक पी. कन्नन के निर्देश पर मुंगेर मुख्यालय के पुलिस उपाधीक्षक अरूण कुमार पंचालर ने कार्यालय के पत्रांक – ज्ञापांक-430/मु0,दिनांक 21-04-2012 के द्वारा जारी किया है। पर्यवेक्षण रिपोर्ट कुल 22 पृष्ठों में है। पर्यवेक्षण रिपोर्ट में पृष्ठ-20 पर पुलिस उपाधीक्षक अरूण कुमार पंचालर ने टिप्पणी की है -‘‘यह जालसाजी और आर्थिक अपराध का एक अतिमहत्वपूर्ण कांड है।‘‘ पुलिस पर्यवेक्षण रिपोर्ट में जिन प्राथमिक अभियुक्तों के विरूद्ध अभियोग प्रथम दृष्टया सत्य प्रमाणित हुए हैं, उन प्राथमिक अभियुक्तों में शामिल हैं:- मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड की अध्यक्ष और ऐडिटोरियल डायरेक्टर शोभना भरतीया, मुद्रक और प्रकाशक अमित चोपड़ा, प्रधान संपादक शशि शेखर, कार्यकारी संपादक अकु श्रीवास्तव और स्थानीय संपादक बिनोद बंधु।
यह मामला आरटीआई कार्यकर्ता मन्टू शर्मा ने दर्ज कराया था। इस कांड में पर्यवेक्षण रिपोर्ट में अभियोजन के पक्ष में मुंगेर के आरटीआई कार्यकर्ता, अधिवक्ता और पत्रकार काशी प्रसाद, श्रीकृष्ण प्रसाद और बिपिन मंडल को इस मुकदमे में साक्षी बनाया गया है। पाठकों की रूचि को देखते हुए अगले किस्तों में हम पुलिस पर्यवेक्षण रिपोर्ट को हू-ब-हू प्रकाशित कर रहे हैं।
मुंगेर से एसके प्रसाद की रिपोर्ट। इनसे संपर्क मोबाइल नं- 09470400813 के जरिए किया जा सकता है।
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