पटना : टाइम्स ऑफ़ इंडिया के नए नए कार्यकारी अध्यक्ष बनाये गए राहुल कंसल को आज टाइम्स के छंटनीग्रस्त मजदूरों के गुस्से का कोपभाजन बनना पड़ा. वे आज टाइम्स ऑफ़ इंडिया के पटना स्थित दफ्तर में आये हुए थे. उनके आने की भनक मिलते ही हटाये गए मजदूरों का जो पिछले 16 जुलाई 2011 से टाइम्स ऑफ़ इंडिया की नाक के नीचे धरना चलाते आ रहे हैं, स्वतः स्फूर्त ढंग से गुस्से में आकर टाइम्स ऑफ़ इंडिया पटना के गेट पर पहुंच गए और टाइम्स ऑफ़ इंडिया मुर्दाबाद और कंसल मुर्दाबाद के नारे लगाये.
मज़े की बात यह रही कि इस नारेबाजी के समय टाइम्स ऑफ़ इंडिया न्यूजपेपर एम्प्लाइज यूनियन का कोई नेता वहां मौजूद नहीं था. मालूम हो कि टाइम्स ऑफ़ इंडिया न्यूज पेपर प्रबन्धन ने विगत 16 जुलाई 2011 को मणीसाना वेज बोर्ड को लागू किये जाने की मांग करने वाले अपने कर्मचारियों से निजात पाने की नीयत से अपना प्रिंटिंग प्रेस ही बंद कर दिया. जबकि इस मामले में दर्ज एक एसएलपी में सुप्रीम कोर्ट ने पिछले 5 जनवरी 2011 को स्टेट्स को यथास्थिति बनाये रखने का आदेश पारित किया था, जिसकी अवहेलना करते हुए टाइम्स प्रबन्धन ने प्रिंटिंग प्रेस बंद कर दिया.
प्रबन्धन के लिए दुर्भाग्य की बात यह रही कि जिस समय हटाये गए कर्मचारी मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे, ठीक उसी समय कोतवाली थाना का एक जमादार प्रबंधन के आठ पुराने प्रबंधकों के खिलाफ 17 साल पुराने एक मामले में सिविल कोर्ट द्वारा जारी नॉन बेलेबल वारंट लेकर पहुंच गए. यह मुकदमा नवभारत टाइम्स की बंदी और टाइम्स ऑफ़ इंडिया न्यूजपेपर एम्प्लाइज यूनियन के बीच हस्ताक्षरित एक एग्रीमेंट के तोड़े जाने और इस एग्रीमेंट के खिलाफ जाकर नवभारत टाइम्स अख़बार को बंद कर कर्मचारियों की छंटनी से सम्बंधित एक मुकदमे में जारी किया गया है.





