अत्यन्त गौरवशाली इतिहास वाले पत्रकार संगठन भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ आईएफडब्ल्यूजे का आज यह दिन आ गया है कि उसे अपना सम्मेलन धुर दक्षिणपंथी संगठन विश्व हिन्दू महासंघ के साथ मिलकर उसके नेता योगी आदित्यनाथ के संरक्षण में गोरखपुर में गोरखनाथ मंदिर परिसर में करना पड़ रहा है। कभी इस संगठन ने पत्रकारों के हित में कई शानदार लड़ाइयां लड़ी थीं लेकिन आज इसको नेतृत्व देने वाले किस कदर समझौतापरस्त, वैचारिक दिवालिएपन के शिकार हैं, उसकी झलक गोरखपुर में आकर देखी जा सकती है। गोरखपुर शहर में कई महत्वपूर्ण स्थानों पर भगवा रंग में बड़े-बड़े होर्डिंग लगे हैं, जिसमें इस कार्यक्रम की जानकारी दी गई है।
शनिवार को इस सम्मेलन के बारे में गोरखपुर के अखबारों में खबर छपी है। इसमें कहा गया है कि करीब 500 पत्रकार इसमें हिस्सा लेंगे। पहले दिन राष्ट्रीय परिसंवाद होगा, दूसरे दिन पत्रकार योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कुशीनगर भ्रमण पर जाएंगे तथा सम्मेलन की समाप्ति पर करीब डेढ़ सौ पत्रकार नेपाल भी जाएंगे और वहां राष्ट्रपति और पूर्व नरेश ज्ञानेन्द्र विक्रम शाह से मुलाकात करेंगे। अखबारों में आईएफडब्ल्यूजे के अध्यक्ष के विक्रम राव की प्रेस कांफ्रेंस भी छपी है। इसमें उन्होंने कहा है कि नेपाली मीडिया का एक वर्ग अपनी राह से भटक गया है। उन्होंने कहा कि वह और उनके साथी नेपाल जाकर वहां की मीडिया को सलाह देंगे कि वह मीडिया को आजादी देने वाले देश भारत के साथ रहे न कि गुलाम मीडिया वाले देश चीन का साथ दें।
पत्रकारों ने जब के विक्रम राव से यह पूछा कि उन्होंने यह आयोजन गोरखनाथ मंदिर और योगी आदित्यनाथ के संरक्षण में क्यों किया तो उनका जवाब था कि इसके पीछे सांसद योगी आदित्यनाथ की नेपाल के मामलों में सुलझी हुई सोच प्रमुख कारण है। उन्होंने इससे भी इनकार किया वह किसी विशेष विचारधारा से जुड़ाव के नाते यहां पर सम्मेलन कर रहे हैं। सवाल है कि के विक्रम राव वाकई इतने भोले हैं कि वह गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजन करने और विश्व हिन्दू महासंघ के साथ मिलकर कार्यक्रम आयोजित करने का मतलब नहीं समझ रहे हैं? कौन नहीं जानता कि विश्व हिन्दू महासंघ, हिन्दू युवा वाहिनी कट्टरपंथी हिन्दू संगठन हैं, जिनकी अगुवाई गोरखनाथ मंदिर के उत्तराधिकारी एवं बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ करते हैं।
हिन्दू युवा वाहिनी का पूर्वी उत्तर प्रदेश में मुसलमानों पर हमले का एक लम्बा इतिहास है और इस संगठन के कारण पूर्वी उत्तर प्रदेश कई बार अशांत हुआ है। यह संगठन खुलेआम मुसलमानों के खिलाफ अपमानजक बातें करता है। रही नेपाल के बारे में बात तो योगी आदित्यनाथ और उनके संरक्षण में चलने वाले संगठन नेपाल के पूर्व नरेश ज्ञानेन्द्र विक्रम शाह के कट्टर समर्थक रहे हैं। इन लोगों ने पूर्व नरेश का जमकर समर्थन किया। पूर्व नेपाल नरेश को समर्थन देने के लिए विश्व हिन्दू महासंघ के दो अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन गोरखपुर में कराए गए। इस संघ के अन्तरराष्ट्रीय अध्यक्ष जनरल भरत केशर सिंह है जो पूर्व नेपाली नरेश के अत्यन्त करीबी हैं और नेपाल के राजा वीरेन्द्र विक्रम शाह की परिवारीजनों सहित हत्या में उनका नाम भी षड्यंत्रकारी के रूप में लिया जाता रहा है।
जाहिर है कि यदि यह सब श्री राव नहीं जानते तो उनके पत्रकार होने पर ही सवाल उठ जाएगा। यह तो तय है कि वह सब कुछ जानते हैं और सोचसमझ कर योगी आदित्यनाथ के साथ मिलकर सम्मेलन कर रहे हैं। फिर तो उन्हें इधर-उधर की बात नहीं करनी चाहिए और खुले तौर पर अपना स्टैण्ड क्लीयर कर देना चाहिए ताकि कोई भ्रम न रहे। रही बात नेपाली मीडिया को सलाह देने कि तो श्री राव को इसका कोई हक ही नहीं बनता। नेपाली मीडिया पर तो कभी यह आरोप नहीं लगा कि भारत विरोध की भूमिका निभा रहा है। श्री राव शायद पहले ऐसे शख्स हैं जो यह बात कह रहे हैं।
जाहिर है उनकी यह सोच योगी आदित्यनाथ की सोहबत से बनी है जिनको वह नेपाल के मामले में सुलझी हुई सोच वाल बता रहे हैं। जिस राजशाही को नेपाली जनता ने अपने बहादुराना संघर्ष से इतिहास की वस्तु बना दिया, उस राज शाही का समर्थन यदि सुलझी सोच है तो वह के विक्रम राव को ही मुबारक हो।
मनोज सिंह का यह लेख जनज्वार से साभार लेकर प्रकाशित किया जा रहा है.






