दैनिक जागरण प्रबंधन वेज बोर्ड लागू होने से पहले ही अपने पुराने कर्मचारियों को निपटाने में जुट गया है. खबर है कि प्रबंधन पूरे जागरण समूह से दस फीसदी कर्मचारियों की छंटनी का लक्ष्य निर्धारित किया है. इसके पीछे कारण बताया जा रहा है कि वेज बोर्ड लागू हो जाने के बाद कर्मचारियों को ज्यादा पैसे तो देने ही होंगे इसके अलावा अन्य भत्ते भी देने होंगे, जो कंपनी के खर्च को कई गुना बढ़ा देगा. इसी से छुटकारा पाने के लिए कंपनी अपने पुराने कर्मचारियों से कुछ महीने की सेलरी देकर इस्तीफा ले रहा है या फिर ऐसी जगह तबादला कर दे रहा है कि वो खुद ही इस्तीफा देने के लिए मजबूर हो जाएं. इसकी शुरुआत बनारस यूनिट से हो चुकी है.
खबर है कि कम्प्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत राधेश्याम मिश्रा एवं कंचन भट्टाचार्या को प्रबंधन ने बाहर कर दिया है. राधेश्याम लम्बे समय से जागरण, बनारस में कार्यरत थे. उनके रिटायरमेंट में मात्र डेढ़ साल बचा हुआ था. प्रबंधन उपर का फरमान बताते हुए उन्हें छह महीने की सेलरी देने का वादा करके रिटायर कर दिया. छाया भी लम्बे समय से कार्यरत थीं. उन्हें भी प्रबंधन ने तीन महीने का एडवांस देकर विदा कर दिया है.
दूसरी तरफ प्रसार में लगभग तीन दशक से कार्यरत उमा वर्मा एवं अठ्ठाइस साल से कार्यरत गोविंद शर्मा का तबादला दूसरे यूनिटों के लिए कर दिया गया है. दोनों कर्मचारी रिटायरमेंट की उम्र में तबादला होने से परेशान हैं. उमा को जहां कानपुर भेजा जा रहा है वहीं गोविंद का तबादला जम्मू के लिए कर दिया गया है. कहा जा रहा है कि कुछ और विभागों से भी छंटनी की लिस्ट तैयार की जा चुकी है. हालांकि इन लोगों का फाइनल विदाई या तबादला की पुष्टि नहीं हो पाई है.
पर जिन लोगों के नाम सामने आए हैं उनमें विज्ञापन से असलम खान, चपरासी भैरव, एकाउंट से प्रेम चंद एवं कुछ लोग स्टोर के शामिल हैं. संभावना है कि कम से कम डेढ़ दर्जन कर्मचारियों को बाहर किया जाएगा या तबादला कर दिया जाएगा. इस संदर्भ में जब सत्यता जानने के लिए दैनिक जागरण, वाराणसी के जीएम अंकुर चड्ढ़ा से बात की गई तो उन्होंने इस तरह की किसी फेरबदल से इनकार किया.





