: रूड़की के गांव में दिखा पत्रकारिता का दो अलग-अलग रूप : आजादी के 65 साल बाद भी बिजली की रोशनी से महरूम गाँव में अमर उजाला ने अभियान चला कर बिजली पहुंचाई. लेकिन इस बिजली की रोशनी हिंदुस्तानियों की आँखों पर चुभने लगी. और हिंदुस्तान ने एक गाँव की बिजली कटवा दी. मामला उत्तराखंड की देहरादून यूनिट का है. देहरादून यूनिट के अंतर्गत रूड़की ब्यूरो है. रूड़की तहसील के तहत शाहमंसूर गाँव में आजादी के 65 साल बाद भी बिजली नहीं पहुंची थी.
अमर उजाला के रूड़की ब्यूरो ने इस गाँव में बिजली नहीं पहुंचने के खबर को पहले पेज पर प्रकाशित किया. पहली खबर २५ नवम्बर को प्रकाशित हुई. इसके बात सरकारी महकमे में हलचल शुरू हुई. अमर उजाला ने इस मुद्दे को लगातार प्रकाशित किया. छह माह के मेहनत के बाद गाँव में… बिजली पहुंची.. गाँव में बिजली पहुंचने की खुशी को अमर उजाला ने स्थानीय पेज पर २९ अप्रैल के अंक में प्रकाशित किया. इस पर पूरा विशेष पेज प्रकाशित किया गया. जिसके बाद दूसरे अखबारों में रूड़की से लेकर देहरादून यूनिट तक हडकंप मच गया.
प्रतिद्वंद्वी अख़बार इस मुहिम को पचा नहीं पा रहे थे. बताया जा रहा है कि हिंदुस्तान और जागरण में देहरादून से ही निर्देश मिले थे कि इस खबर का तोड़ निकाला जाए. हिंदुस्तान ने कुमानसिकता दिखाते हुए. ०३ मई के अंक में इसका तोड़ निकल लिया. और शाहमंसुर गाँव में चोरी की बिजली जलने की खबर प्रकाशित कर दी. इतना ही नहीं.. बिजली विभाग की कार्रवाई को खबर का असर बनाकर ०५ मई को फिर प्रकाशित किया है.. शाहमंसूर गाँव के लोगों की माने तो उन्होंने बिजली विभाग को कनेक्शन के लिए आवेदन किया है.. बिजली विभाग ने ट्रायल के लिये घरों में कनेक्शंस दिए थे. ६५ साल बाद जिस गाँव में अमर का उजाला हुआ. वह हिदुस्तान की हवा के चलते फिर अँधेरे में चला गया है. सबूत आप देख सकते हैं.

अमर उजाला में प्रकाशित खबर

हिंदुस्तान में प्रकाशित खबर
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





