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नया खुलासा- स्वतंत्र मिश्रा अब कैसे कहेंगे कि उनका नाम नहीं है

स्वतंत्र मिश्रा के पिता के नाम से यूपी में कई जिलों में चल रहे गन हाउसों को लेकर भड़ास4मीडिया पर कुछ दस्तावेज जो प्रकाशित हुए तो उस पर स्वतंत्र मिश्रा का कहना था कि उनके पिता के नाम से चल रहे किसी बिजनेस या उद्यम से उन्हें जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. पर अब जो दस्तावेज भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित किया जा रहा है, उसमें स्वतंत्र मिश्रा और सहारा का भी नाम है. ये रिपोर्ट एक जांच रिपोर्ट है. जिस अनाम मेल आईडी से ये दस्तावेज भड़ास4मीडिया के पास पहुंचे हैं, उस मेल आईडी के माध्यम से यह संदेश भी लिखकर भेजा गया कि जो जांच रिपोर्ट है, वह आईबी की है यानि इंटेलीजेंस ब्यूरो की है.

स्वतंत्र मिश्रा के पिता के नाम से यूपी में कई जिलों में चल रहे गन हाउसों को लेकर भड़ास4मीडिया पर कुछ दस्तावेज जो प्रकाशित हुए तो उस पर स्वतंत्र मिश्रा का कहना था कि उनके पिता के नाम से चल रहे किसी बिजनेस या उद्यम से उन्हें जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. पर अब जो दस्तावेज भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित किया जा रहा है, उसमें स्वतंत्र मिश्रा और सहारा का भी नाम है. ये रिपोर्ट एक जांच रिपोर्ट है. जिस अनाम मेल आईडी से ये दस्तावेज भड़ास4मीडिया के पास पहुंचे हैं, उस मेल आईडी के माध्यम से यह संदेश भी लिखकर भेजा गया कि जो जांच रिपोर्ट है, वह आईबी की है यानि इंटेलीजेंस ब्यूरो की है.

और इस रिपोर्ट के आखिर में कहा गया है कि सहारा में बड़े ओहदे पर विराजमान स्वतंत्र मिश्रा, उनकी गतिविधियों और गनहाउसों के फंक्शन आदि को देखते हुए हथियारों के देश विरोधी लोगों तक पहुंचने या पहुंचाए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. भड़ास4मीडिया ने अपने लेवल से इस जांच रिपोर्ट की कई स्तरों पर पुष्टि कराई पर कहीं से यह कनफर्म पता नहीं लग सका कि यह जांच रिपोर्ट आईबी की ही है या किसी अन्य जांच एजेंसी की. लेकिन ज्यादातर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने यह कहा कि रिपोर्ट की भाषा से यह पूरी तरह प्रतीत हो रहा है कि किसी सरकारी एजेंसी ने पूरे मामले की गहराई तक जांच करके रिपोर्ट सौंपी है.

नीचे जो दस्तावेज हैं, उसमें पहला दस्तावेज जांच रिपोर्ट है. इस जांच रिपोर्ट को पढ़ने के बाद पूरे मामले को समझने के लिए उसके बाद में दिए गए हिंदी के आरोप पत्र को पढ़ें. लगता है कि ये आरोप पत्र स्वतंत्र मिश्रा के किसी ‘शुभचिंतक’ ने किसी सरकारी जांच एजेंसी को सौंपा था ताकि जांच एजेंसी को मामले को समझने में आसानी हो सके.
इस जांच रिपोर्ट के यहां प्रकाशित किए जाने से पहले वर्जन के लिए स्वतंत्र मिश्रा के पास मेल किया गया था. भड़ास4मीडिया के पास स्वतंत्र की मेल आईडी न होने के कारण उनसे एसएमएस के जरिए उनकी मेल आईडी की मांग की गई और उनके द्वारा ज्वाब में मेल आईडी भेजे जाने के बाद उन्हें यह जांच रिपोर्ट यह लिखकर भेज दिया गया कि वे अपना पक्ष यथाशीघ्र भेज दें ताकि उसे भी दस्तावेज के साथ प्रकाशित किया जा सके पर 48 घंटे से ज्यादा बीत जाने के बावजूद स्वतंत्र मिश्रा का कोई जवाब नहीं आया है. वे जब भी अपना पक्ष लिखकर या किसी से लिखवाकर भेजेंगे, उसे पूरे सम्मान और पूरी प्रमुखता के साथ भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित किया जाएगा. -यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया

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