यशवंत भाई …जय हो …भड़ास के 4 साल पूरे होने के मौके पर लिखे आपके इस लेख 'सुख-दुख आपसे साझा कर लूं' ने तो धमाका कर दिया.. इतनी गहरी फिलोसफी में चले गये कि पाठकों को दर्शनशास्त्र, सिस्टम की हकीकत, मीडिया का नंगापन सब कुछ गहरे से समझा दिया. एक बार तो हर पाठक, यहाँ तक कि बड़े बड़े संपादक भी इसे पढकर सोचने पर मजबूर हो जांयगे. बहुत सही कहा आपने '…काहे का मीडिया जो बस अपने रेवेन्यू के लिए समझौते करता फिरता है, इसके आलावा कुछ नहीं करता है..''
य़े भी बात खूब कही ..''कहां सिस्टम बदला है.. सब पहले के क्रूर राजा महाराजाओं वाला हिसाब है, हां इसको लबादा मिल गया है…'' बात बड़ी फिलोसफिकल में होने के बावजूद बड़े सरल ढंग से पाठक के सामने परोसी गयी है ..इतने बेहतर लेख पर सबसे पहला लिखित कमेन्ट आपको मेल करने वाला बनकर गर्व महसूस करते हुए मै भड़ास के चार साल पूरे होने पर आपको और भड़ास के पाठकों को ढेर सारी बधाई देता हूं… साथ ही इस आन्दोलन को खड़ा करने के लिए आपने गजब का संघर्ष किया; मैं आपको सलाम करता हूं ..मुझे भड़ास का नियमित सहयोगी होने पर बड़ा गर्व है .. लेख पर कमेन्ट पोस्ट करने के साथ आपको अलग से मेल कर रहा हूं..
हमेशा की तरह सहयोग बना रहेगा…
सोनू कुमार
हरियाणा
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