यश जी प्रणाम, मैंने पढ़ा, भड़ास को चार वर्ष हो रहे है. बधाई. भड़ास4मीडिया, मीडिया का वाच डॉग तो है ही, मेरे जैसे सामान्य प्रज्ञा के व्यक्तियों को जागरूक करने में भड़ास के बहुत बड़ा योगदान है. लोकनीति ने State of the Nation Survey August 2011 कराया था. उसके आंकड़ों को देखिये महज़ दो फीसदी लोगों का मानना है के एन.जी.ओ और मीडिया भ्रष्ट हैं. (क्लिक करें- www.lokniti.org) ये आंकड़े यही बताते हैं के लोगों की नज़र और समझ अभी इतनी तेज़ नहीं हुई के भ्रष्टाचार के महीन रूपों को देख सके.
खैर छोड़िये, मैं तो बस ये कहना चाह रहा था के भड़ास ने मीडिया की आंतरिक कल्लोलों से आम व्यक्ति को परिचित कराया. ये भड़ास का (न्यू मीडिया) एक महती योगदान है. जिस देश को, समाज को क़ानून के राज़ से सरोकार नहीं होता वहां शक्ति बिखर जाती है. फिर उसे कोई भी अपनी क्षमता के अनुसार कब्जा सकता है. अंडरवर्ड हो मीडिया हो कोई भी हो. भड़ास और उसके जैसे प्रयास ज़रूरी इसलिए भी हैं के संतुलन बना रहे. बाकी तो जी दुष्यंत बाबा कह गए हैं के 'इस सड़क पे इस कदर कीचड़ बिछी है, हर किसी का पाँव घुटनों तक सना है'.
भड़ास इसलिए भी प्रिय है के शायद में उन थोड़े लोगों में से हूँ (ऐसा में मानता हूँ) जो भड़ास4मीडिया के सम्पादक की भड़ास को कभी-कभी झेलता हूँ. आत्मिक भड़ास. लाल पानी गटकने के बाद जो बाहर आती है. पुनः बधाई. संभावनाएं अपार हैं. भड़ास जैसा मंच आपके तसव्वुर के आश्रम से अच्छा है. ये बढ़ता रहे सफलता के नए आयामों के छुए, ऐसी मेरी मंगल कामना है. पुनः बधाई. आयोजन होगा तो भेंट अवयश्य होगी. सुना है सूफी नाच गाना होगा. बढ़िया है अपन भी गुरजिएफ वाला डांस कर लेंगे.
पुनः बधाई.
आपका
कुशल, बरेली
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