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हाई कोर्ट ने कहा गूगल, याहू आदि नियुक्‍त करें शिकायत अधिकारी

इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच ने आज आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच में दायर रिट याचिका संख्या 3489/2012 में आदेश देते हुए कहा है कि आज का युग इंटरनेट का युग है, अतः इंटरनेट सम्बंधित नियमों को पूरी सख्ती से पालन किया जाए. अमिताभ और नूतन ने अपना पक्ष कोर्ट में स्वयं रखा जबकि भारत सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता अशोक निगम ने रिट याचिका का इस आधार पर विरोध किया कि याचीगण ने याहू, गूगल आदि को प्रतिवादी नहीं बनाया है.

इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच ने आज आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच में दायर रिट याचिका संख्या 3489/2012 में आदेश देते हुए कहा है कि आज का युग इंटरनेट का युग है, अतः इंटरनेट सम्बंधित नियमों को पूरी सख्ती से पालन किया जाए. अमिताभ और नूतन ने अपना पक्ष कोर्ट में स्वयं रखा जबकि भारत सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता अशोक निगम ने रिट याचिका का इस आधार पर विरोध किया कि याचीगण ने याहू, गूगल आदि को प्रतिवादी नहीं बनाया है.

जस्टिस देवी प्रसाद सिंह और जस्टिस सईद उज-जमा सिद्दीकी के बेंच ने शाशकीय अधिवक्ता की बात को उचित नहीं मानते हुए अपने आदेश में कहा कि यदि भारत सरकार ने कोई नियम बनाया है तो उसे इसका पूरा पालन भी कराया जाना चाहिए. उन्होंने यह कहा कि इस मामले में याचीगण ने कई बार सचिव, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार को इन नियमों का पालन कराये जाने हेतु प्रत्यावेदन दिया पर उस स्तर से कोई कार्यवाही नहीं की गयी. अतः उन्होंने कहा कि चूँकि यह मामला जनहित का है अतः सचिव, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यह सुनिश्चित करें कि तीन माह में याहू, गूगल, फेसबुक, माई स्पेस जैसे सभी इंटरमिडीययरी इन्फोर्मेशन टेक्नोलोजी (इंटरमिडीएरी गाइडलाइन्स) नियम 2011 के नियम 11 के अनुसार शिकायत अधिकारी के नाम और उनके संपर्क पते प्रकाशित करें. उन्होंने सचिव, सूचना प्रौद्योगिकी को यह भी आदेश दिये कि याचीगण द्वारा प्रेषित प्रत्यावेदन पर कृत कार्यवाही से उन्हें भी अवगत कराएं.

इस रिट याचिका में अमिताभ और नूतन ने यह मांग की थी कि इन्फोर्मेशन टेक्नोलोजी एक्ट 2000 की धारा 79 के अनुसार याहू, गूगल, फेसबुक, माई स्पेस जैसे भी इंटरमिडीययारी किसी तृतीय पार्टी द्वारा दी जा रही सूचना के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे, यदि वे अपने कर्तव्य पालन में अपेक्षित सावधानी बरतेंगे. इन्फोर्मेशन टेक्नोलोजी (इंटरमिडीएरी गाइडलाइन्स) नियम 2011 के अनुसार इंटरमिडीएरी से यह अपेक्षा की जाती है कि वे यह स्पष्ट रूप से अंकित करेंगे कि किस प्रकार की सूचनाएँ वेबसाइट पर नहीं रखी जा सकती हैं. यह भी अपेक्षित है कि किसी प्रभावित व्यक्ति द्वारा सूचना दिये जाने पर छत्तीस घंटे में उसका निराकरण किया जाएगा. नियम 11 के अनुसार इंटरमिडीएरी अपने वेबसाइट पर शिकायत अधिकारी के नाम और उनके संपर्क पते प्रकाशित करेगा. वर्तमान में याहू, गूगल, फेसबुक, माई स्पेस जैसे सभी इंटरमिडीययारी इन सभी नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं. अमिताभ और नूतन ने सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय  द्वारा इन्ही नियमों के पालन हेतु रिट याचिका की थी.

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