इस रंग बदलती दुनिया में हर इंसान की नीयत पर शक होता है। दूसरों को आईना दिखाने वाला चौथा खंभा इन दिनों सामाजिक कसौटी पर बिल्कुल नकारा साबित हो रहा है। इन नकारों से इतर अपनी अलग दुनिया बनाकर भड़ास4मीडिया ने जो काम किया है, वह प्रशंसनीय है। यशवंत जी आपकी इस साइट के चार साल होने को हैं, किन्तु आपने जिन लोगों को जोड़ा है या जो लोग आपसे वाकई शब्दों से जुड़े हैं, उनको आपने अपने व्यवहार से खरीद लिया है। इस समयचक्र में जहां आदमी चरम पर पहुँचने के बाद किसी को पहचानता तक नहीं है, वहीं आप ने मेरे बच्चे के देहावसान के समय तुरंत कालबैक करके जो बातें कहीं थी, वाकई में उस सहानुभूति ने उस समय में मर्म पर मरहम का काम किया।
हां ये बात अलग है कि वह चोट बहुत गहरी है। किन्तु आप ने जो उसे छुआ कुछ तो जरूर आराम मिला। कोई किसी का दर्द हर नहीं सकता, किन्तु ''रहिमन विपदा हू भली जो थोड़े दिन होय, हित अनहित या जगत में जान परत सब कोय'' के शब्दों को बिल्कुल आत्मसात करते हुए आपने जो मेरा मर्म सहलाया उससे आपकी महानता का पता चलता है। निश्चय ही आप चार साल तो क्या चार युगों तक यूं ही चार स्तम्भ पर भारी रहने की योग्यता रखते हैं। क्योंकि किसी को आप यूं ही नहीं, दिल से खरीदने का माद्दा रखते हैं। ना-ना आप इसे तेल मत समझियेगा, यह मेरी आत्मानुभूति है, क्योंकि इस समय मैं गहरी संवेदना में निमग्न हूँ। आंसुओं की एकाध धार अब भी बह जाती है। किन्तु आप जैसे हृदेच्छु के होते तो उन धारों को कम तो किया ही जा सकता है।
जीवन के जिन क्षणों का बखान आपने अपनी सुखदुख बांटने में किया है। बिल्कुल देश-काल-परिस्थिति को जीवन्त कर दिया है। भूतकाल की उन परिस्थितियों को मैं वर्तमान में जी रहा हूँ समय से तो संघर्ष कर ही रहा था, इस संघर्ष के दौरान हमने अपने शरीर का एक अंग भी खो दिया। किन्तु जिसके साथ आप जैसे लोग हों वह दुखी कैसे रह सकता है। मेरा आयुष अब समाप्त हो चला है किन्तु अमन की अभिलाषा रखते हुए मैं आपके चार साल बीतने पर अपने विदीर्ण हृदय से शुभकामनाओं के कुछ शब्दों से अभिनन्दित करता हूँ धन्यवाद, प्रणाम।
सम्पूर्णा नन्द दुबे
मऊ
9415795000
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