नई दिल्ली : पब्लिक ब्रॉडकास्टर प्रसार भारती के पास पैसे खत्म होने का खतरा मंडरा रहा है। आशंका है कि दो महीने में प्रसार भारती के पास सैलरी पेमेंट और ऑपरेशंस के लिए पैसे नहीं होंगे। कॉरपोरेशन के एकाउंटिंग पर चले रहे विवाद से प्रशासन दुविधा में है। ऐसे में सरकार इसे मिलने वाले ग्रांट को रोक सकती है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने प्रसार भारती से कहा है कि फाइनेंशियल ईयर 2009-10 से संस्था ने ऑडिटेड एकाउंट्स नहीं सौंपे हैं, लिहाजा वह साल 2012-13 के लिए नए फंड नहीं जारी करेगा। अमूमन प्रसार भारती के सालाना बजट का दो तिहाई हिस्सा सरकारी ग्रांट से मिलता है। प्रसार भारती के सीईओ जवाहर सिरकर ने बताया, 'इस मसले को सुलझाने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है।'
जवाहर 1975 बैच के आईएएस ऑफिसर हैं। उन्होंने इस साल फरवरी में प्रसार भारती के सीईओ का कार्यभार संभाला था। उनके प्रसार भारती में आने से पहले फाइनेंशियल ईयर 2009-10 की बैलेंसशीट को लेकर दो सीनियर एग्जिक्यूविट के बीच मतभेद हो गया था। इस वजह से प्रसार भारत के एकाउंटिंग का मसला अदालत तक पहुंच गया। इसमें भ्रष्टाचार और वित्तीय धोखाधड़ी तक के आरोप लगाए गए। प्रसार भारती के सीनियर एग्जिक्यूटिव और बोर्ड मेंबर ने भी इस संस्था के एकाउंट्स में गड़बड़ी की ओर इशारा किया।
प्रसार भारती बोर्ड ने साल 2009-10 की बैलेंसशीट की मंजूरी को वापस ले लिया था। बोर्ड के फैसले के बाद संस्था के वैधानिक ऑडिटर कैग ने भी इस मंजूरी को वापस ले लिया था। हालांकि, ऑडिट के दौरान कैग को किसी तरह की दिक्कत नजर नहीं आई थी। इस लड़ाई के दौरान बोर्ड ने कोई कार्रवाई नहीं की और इसके कुछ फैसले को अदालत में चुनौती दी गई। साथ ही, फाइनेंशियल ईयर 2010-11 के लिए भी एकाउंट्स तैयार नहीं किया जा सका।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय को हर साल के अंत में प्रसार भारती के एकाउंट्स को पेश करना होता है। इस संस्था को संसद में कानून बनाकर स्थापित किया गया है। साल 2009-10 के लिए ऑडिट किए गए खातों को 31 दिसंबर 2010 तक पेश किया जाना था और 2010-11 के लिए अगले साल उसी तारीख को एकाउंट्स को पेश किया जाना था। दोनों तारीखें गुजर चुकी हैं।
पिछले साल जहां सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने कुछ मोहलत दी थी, वहीं इस बार वह ऐसा नहीं करना चाहती है। मंत्रालय को डर है कि अगर इस बार भी ऐसा किया गया तो संसद में इस पर सवाल पूछे जा सकते हैं। प्रसार भारती को ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के नाम से भी जाना जाता है। इसके जरिए ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन का संचालन किया जाता है। दोनों संस्थानों में 50,000 से भी ज्यादा लोग काम करते हैं। (साभार : ईटी)





