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खादी पर भारी पड़ा दारोगा, विधायक पहुंचे नेताजी की शरण में

वर्दी और खादी की टक्कर हो गई। इसमें दारोगा भारी पड़ गया है। दारोगा से बचने के लिए सत्ता के एक विधायक को अपने आका मुलायम सिंह यादव की शरण में दिल्ली जाना पड़ा। यूपी के विधायक ने ‘अपनी इज्जत’ बचाने को ऐसा तब किया, जब उन्हें अहसास हो गया कि सूबे में उनकी नहीं चलेगी। मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रख पाने में वह कमजोर पड़ जाएंगे और दारोगा उन पर और भारी पड़ सकता है। दारोगा और सत्ता पक्ष के विधायक का विवाद तब बढ़ गया जब विधायक का काम करने से दारोगा ने साफ तौर पर इनकार कर दिया। इस ’हुकुम उदूली‘ पर विधायक का गुस्सा बेकाबू हो गया। उन्होंने सैदाबाद चौकी से उसे दूर दराज फेंकवा देने की बात कही, दारोगा बोला-ऐसे कई सांसद-विधायक और मंत्री देखे हैं, औकात में रहिए। विधायक का गुस्सा और भड़का। बोले-चौकी आकर जूते से पीटूंगा। दारोगा ने फोन काट दिया और यह सारा विवरण जीडी में बतौर तस्करा दर्ज किया। विभाग के अफसरों को भी घटना से अवगत करा दिया।

वर्दी और खादी की टक्कर हो गई। इसमें दारोगा भारी पड़ गया है। दारोगा से बचने के लिए सत्ता के एक विधायक को अपने आका मुलायम सिंह यादव की शरण में दिल्ली जाना पड़ा। यूपी के विधायक ने ‘अपनी इज्जत’ बचाने को ऐसा तब किया, जब उन्हें अहसास हो गया कि सूबे में उनकी नहीं चलेगी। मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रख पाने में वह कमजोर पड़ जाएंगे और दारोगा उन पर और भारी पड़ सकता है। दारोगा और सत्ता पक्ष के विधायक का विवाद तब बढ़ गया जब विधायक का काम करने से दारोगा ने साफ तौर पर इनकार कर दिया। इस ’हुकुम उदूली‘ पर विधायक का गुस्सा बेकाबू हो गया। उन्होंने सैदाबाद चौकी से उसे दूर दराज फेंकवा देने की बात कही, दारोगा बोला-ऐसे कई सांसद-विधायक और मंत्री देखे हैं, औकात में रहिए। विधायक का गुस्सा और भड़का। बोले-चौकी आकर जूते से पीटूंगा। दारोगा ने फोन काट दिया और यह सारा विवरण जीडी में बतौर तस्करा दर्ज किया। विभाग के अफसरों को भी घटना से अवगत करा दिया।

इलाहाबाद की हंडिया क्षेत्र के विधायक महेश नारायण सिंह दबंग टाइप नेता माने जाते हैं। असलहों के साये में गुर्गों के बीच घिर कर चलना उनका पुराना शौक है। जिले के बड़े अफसरों से भी मारपीट कर चुके हैं। दबंग और नेता दोनों हैं तो चम्पूओं की भी भीड़ रखते हैं। ठेका के अलावा बालू खनन के धंधे में भी उनका भौकाल सिर चढ़कर बोलता है। याद दिला दें, हंडिया के आसपास करीब पंद्रह किमी रेंज का इलाका चर्चित माफिया लाल साहब, विजय मिश्रा के नाम से विख्यात रहा है। समाज में वर्चस्व बरकरार रहने के लिए इन लोगों ने राजनीति का लबादा ओढ़ लिया है। यहां मानसिकता बन गई है-‘जो जितने असलहों के बीच चले वो उतना ही बड़का नेता।’ इसी इलाके से राजेंद्र त्रिपाठी करीब तीन दशक पहले प्रदेष के गृहमंत्री हुआ करते थे। दूसरे नेता हैं राकेशधर त्रिपाठी जो सपा, भाजपा और बसपा में अवसर ताड़ कर दल बदल करते रहे और बार-बार मंत्री पद सुशोभित करते रहे। राकेशधर त्रिपाठी इस बार मायावती के कोप का शिकार बन गए। एक झटके में मंत्री पद छीन गया, टिकट भी काट दिया गया। राजनीति में एकबारगी पैदल हुए राकेशधर त्रिपाठी प्रगतिशील पार्टी से लड़े और हार गए। उनकी जगह सपा के महेश नारायण सिंह यहां से विधायक बने।

शराब व्यवसायी की पहचान रखने वाले ठेकेदार महेश नारायण दूसरी मर्तबा यहां सपा से विधायक बन गए। प्रशासन में हनक बनाए रखने के शौकीन विधायक महेश नारायण ने इलाके में स्थित सैदाबाद पुलिस चौकी इंचार्ज हरवंश सिंह यादव को फोन पर कोई काम बताया। दारोगा ने काम करने से इनकार कर दिया। दोनों के बीच टेलीफोन पर ही जमकर कहासुनी हुई। दारोगा और विधायक दोनों ही मर्यादा की लक्ष्मणरेखा पार कर गए। चर्चा है कि दारोगा हरवंश सिंह यादव सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के रिश्‍ते में हैं, इसलिए वो दबा नहीं। अखबारों ने खबर तान दी। ‘हिन्दुस्तान’ ने पेज वन पर लीड बाक्स हेडिंग दी-‘विधायक ने दारोगा से कहा, चौकी आकर जूते से पीटूंगा’ और अखबारों ने भी घटना को प्रमुखता दी पर थोड़ा कम। अखबारों में खबर छपने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। जांच पड़ताल शुरू हो गई। इलाहाबाद आए डीजीपी के निर्देश पर विधायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया। उधर, घटना के दूसरे दिन दारोगा हरवंश सिंह यादव ने न्यूज चैनल के सामने बयान देकर ढिठाई का परिचय दिया। बोला-‘इलाके में विधायक ऐसा करता तो उसे गोली मार देता‘। खबरिया चैनलों ने प्रमुखता से दारोगा के बयान वाली खबर को सीधे चलाकर यह साफ कर दिया कि सूबे में किस तरह का शासन चल रहा है। पुलिस-पॉलिटिक्स की गैर मर्यादा समाज के लिए कितनी खतरनाक साबित होने वाली है।

इलाहाबाद से शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट.

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