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महिला पत्रकार से छेड़खानी (दो) : सोलह साल से जीना मुहाल कर रखा है राजेश झा ने

आप में से तमाम लोगों ने शाहरुख खान अभिनीत डर फिल्‍म देखी होगी. इस फिल्‍म में शाहरुख खान जूही चावला को इस कदर परेशान करते हैं कि उन्‍हें हर शख्‍स, हर फोन कॉल यहां तक कि अपनी परछाई से भी डर लगने लगता है. ऐसी ही दहशत राजेश झा ने महिला पत्रकार के जीवन में पैदा कर रखी है. इस साइको ने महिला पत्रकार का जीना, खाना-पीना सब हराम कर रखा था. वो भी एक दो साल से नहीं बल्कि पिछले सोलह सालों से महिला पत्रकार इस साइको के डर के साथ जी रही थी. तमाम लोगों से मदद की गुहार लगाई, राजेश झा को समझाया, डांटा फिर भी वो अपनी हरकतों से बाज आने को तैयार नहीं था.

आप में से तमाम लोगों ने शाहरुख खान अभिनीत डर फिल्‍म देखी होगी. इस फिल्‍म में शाहरुख खान जूही चावला को इस कदर परेशान करते हैं कि उन्‍हें हर शख्‍स, हर फोन कॉल यहां तक कि अपनी परछाई से भी डर लगने लगता है. ऐसी ही दहशत राजेश झा ने महिला पत्रकार के जीवन में पैदा कर रखी है. इस साइको ने महिला पत्रकार का जीना, खाना-पीना सब हराम कर रखा था. वो भी एक दो साल से नहीं बल्कि पिछले सोलह सालों से महिला पत्रकार इस साइको के डर के साथ जी रही थी. तमाम लोगों से मदद की गुहार लगाई, राजेश झा को समझाया, डांटा फिर भी वो अपनी हरकतों से बाज आने को तैयार नहीं था.

सोलह साल पहले महिला पत्रकार तथा राजेश झा मुंबई के एक अखबार में साथ काम करते थे. तब से राजेश झा इस महिला पत्रकार के पीछे पड़ा हुआ है. पचास साल से अधिक उम्र का राजेश इसके बाद किसी बड़े संस्‍थान में काम नहीं किया, पर वो इस महिला पत्रकार के पीछे लगातार पड़ा रहा. मुंबई में किराए पर रहने वाली इस महिला पत्रकार ने इसके डर से कई इलाके बदले पर साइको राजेश झा किसी भी तरह से उनका घर पता करके पहुंच जाता था. उनको लेटर लिखता था, उनका पीछा करता था. उनके आने-जाने वालों रास्‍ते पर खड़ा होकर उनका इंतजार करता था.

इतना ही नहीं महिला पत्रकार को जानने वालों से भी बताता था कि मेरा उससे चक्‍कर चल रहा है. इसके अलावा भी तमाम इस तरह की बातें करता था, जिससे महिला पत्रकार बुरी तरह परेशान हो गई. कई लोगों से महिला पत्रकार ने शिकायत की, पुलिस से भी मदद मांगी पर कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही थी. महिला पत्रकार इसके डर से हमेशा अपना घर बदलने को मजबूर रहती थीं. मुंबई में अकेले रहने के चलते इनके अंदर एक असुरक्षा की भावना भी बनी रहती थी. महिला पत्रकार ने इस मामले में सन 1999 में पुलिस से इस मामले की शिकायत की, परन्‍तु पुलिस ने साधारण धाराओं में चालान किया, जिसके चलते यह दो-तीन दिन में ही जमानत पर छूट गया तथा फिर से परेशान करने लगा.

इसके बाद मोबाइल का दौर आया तो इसने मोबाइल से फोन और एसएमएस करके परेशान करने लगा. इसके डर से महिला पत्रकार ने कई बार अपने नम्‍बर भी बदल डाले, परन्‍तु राजेश झा किसी ना किसी तरीके से उनका नम्‍बर और घर पता कर ही लेता था. इसके अलावा वो रात-रात में फोन करके उनको परेशान करता था. उनके नम्‍बर पर अश्‍लील एसएमएस करता रहता था. रात में फोन करके परेशान करने के बाद वो अपना फोन डाइवर्ट कर लेता था. उसने जीना हराम कर दिया था. महिला पत्रकार ने कई बार पुलिस से शिकायत की, परन्‍तु पुलिस ने कभी इसे गंभीरता से नहीं लिया. एनसीआर में मामला दर्ज कर इसे ठण्‍डे बस्‍ते में डाल देती थी.

इसके चलते राजेश झा का मनोबल लगातार बढ़ता गया. वो महिला पत्रकार को धमकी भी देने लगा कि तूझे जो करना हो कर ले, पुलिस मेरा कुछ नहीं कर सकती. थोड़े पैसे देकर छूट जाउंगा. मोबाइल से परेशान करने के साथ-साथ वो मेल आईडी से मेल करके भी परेशान करने लगा. महिला पत्रकार जब भी अपना मेल आईडी बदलती साइको राजेश झा उनका मेल आईडी पता कर लेता तथा उससे तमाम तरह के मेल करता. जब महिला पत्रकार उसका मेल आईडी ब्‍लॉक कर देतीं तो वो दूसरा मेल आईडी बनाकर अश्‍लील मेल करता. उसने महिला पत्रकार के नाम से मेल आईडी बनाकर उसे तथा उनका मोबाइल नम्‍बर मेट्रोमोनी साइट पर भी डाल रखा था, जिससे उनके पास शादी के लिए फोन आने लगते. इन सब वजहों से वह डिप्रेशन में आने लगी थीं.

राजेश झा हमेशा धमकी देता था कि मुझसे शादी कर लो नहीं तो तुझे जीने नहीं दूंगा. इतना ही नहीं तमाम ज्‍योतिष एवं पंडितों को भी महिला पत्रकार का नंबर दे देता था, वो फोन करके उनसे कुंडली मांगते, जन्‍मतिथि पूछते तथा बताते कि शादी के लिए कुंडली मिलानी है. जब महिला पत्रकार पूछतीं कि ये नम्‍बर कहां से मिला तो जवाब मिलता था कि राजेश झा ने आपका नम्‍बर दिया है तथा कहा है कि शादी करनी है कुंडली मिला दीजिए. इतना ही नहीं उनके जानने वालों के सामने तमाम तरह की बकवासें करता. महिला पत्रकार ने उसे कई बार डांट लगाई, फटकारा फिर भी वो मानने को तैयार नहीं था. शादी शुदा होने के बाद भी उसने महिला पत्रकार के जीवन में दहशत बना दी थी.

महिला पत्रकार द्वारा कई बार फटकारे जाने के बाद उसने फेसबुक और ट्विटर पर भी उनके खिलाफ तमाम तरह की गलत बातें प्रचारित करने लगा. उनको फेसबुक पर भी बदनाम करने की कोशिश करने लगा, जिसके बाद महिला पत्रकार को फिर से पुलिस के पास जाना पड़ा. कई थानों में शिकायत देने के बाद भी इस मामले को पुलिस द्वारा गंभीरता से नहीं लिए जाने के बाद महिला पत्रकार ब्रांद्रा के डीसीपी से मिलीं तथा पूरे मामले की विस्‍तार से जानकारी दीं. डीसीपी के आदेश पर पुलिस ने राजेश झा को गिरफ्तार किया तथा उसके खिलाफ छेड़खानी, मेंटल टार्चर, साइबर ला समेत कई धाराओं में मामला दर्ज कर जेल भेजा गया.

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