शिमला में इन दिनों जालंधर से प्रकाशित ‘पंजाब केसरी’ की थू-थू हो रही है। खासकर राजनीतिक क्षेत्रों में पंजाब केसरी चर्चा का विषय है और नेता लोग इस अखबार की रीति नीति से अचम्भित हैं। शिमला में आजकल हिमाचल प्रदेश की एकमात्र नगर निगम के चुनाव हैं। पहली बार मेयर और डिप्टी मेयर के लिए सीधे चुनाव हो रहे हैं। कुल पच्चीस वार्डों में लगभग 82 लाख लोग शिमला नगर निगम चुनावों में भाग लेंगे। जाहिर है कि सभी दैनिक अखबारों ने नगर निगम के चुनावों की कवरेज के लिए खास व्यवस्था की है, लेकिन पंजाब केसरी इकलौता ऐसा अखबार है जिसने चुनाव कवरेज का बहिष्कार कर रखा है।
27 मई को वोट पड़ने है, इसलिए चुनाव प्रचार चरम पर है। पर आश्चर्य है कि पंजाब केसरी में एक भी शब्द चुनाव के बारे नहीं छप रहा है। पंजाब केसरी के शिमला ब्यूरो में कार्यरत संवाददाताओं को इस कारण लोगों के सामने शर्मिंदगी झेलना पड़ रही है। एक संवाददाता ने बताया कि पंजाब केसरी के मुख्यालय जालंधर से हिदायत है कि उन्हीं उम्मीदवारों की खबर छपेगी जो अखबार को विज्ञापन देंगे। यानी चुनावों में ‘पेड न्यूज’ छापने का फैसला पंजाब केसरी के मालिकों ने किया है, जिसकी निंदा हो रही है।
फिलहाल शिमला नगर निगम के चुनावों में खड़े सभी पार्टियों के उम्मीदवारों ने पंजाब केसरी की ‘पेड न्यूज’ नीति को अनदेखा कर दिया है। अखबार को कोई भी विज्ञापन नहीं मिल रहा है और न ही ‘पेड न्यूज’ के रूप में आगे भी विज्ञापन मिलने की कोई उम्मीद दिखाई दे रही है। हिमाचल प्रदेश में ‘पेड न्यूज’ की परम्परा नहीं है, इसलिए सभी उम्मीदवार इस अखबार से किनारा कर गए हैं। शिमला के कुछ न्यूज पेपर एजेन्टों का कहना है कि नगर निगम चुनाव कवरेज न करने के कारण पंजाब केसरी की सर्कुलेशन लगातार गिरती जा रही है। शहर में सात हजार कॉपी आ रही थी, जो घटकर अब साढ़े चार हजार रह गई है।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





