: समय पर न पहुंचने पर अदालत ने जारी किए वारंट, दो ने कराई जमानत : मामला बठिंडा भास्कर में गलत खबर छापने का : बठिंडा की एक अदालत ने गलत खबर प्रकाशित करने के मामले में दैनिक भास्कर के मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) सुधीर अग्रवाल सहित पंजाब के संपादक कमलेश सिंह, अभिजीत मिश्रा, हिमांशु घिल्डियाल व बठिंडा यूनिट के सिटी इंचार्ज नरिंदर शर्मा को समन तामील करने के बाद अदालत में पेश न होने पर जमानती वारंट जारी कर दिए हैं। अतिरिक्त सीजेएम हरिंदर कौर सिद्धू की अदालत से उक्त वारंट आईपीसी की धारा 499/500/211 के तहत जारी हुए हुए हैं। इसमें अगली पेशी की तिथि 24 अगस्त 2012 मुकर्रर की गई है। इसमें शिकायतकर्ता दिनेश कुमार पुत्र वेद प्रकाश ने आरोप लगाया है कि दैनिक भास्कर बठिंडा में 24-8-2010 में प्रकाशित एक खबर जिसमें दिनेश कुमार को एक महिला सुरिंदर कौर पत्नी जतिंदर कुमार निवासी चंदसर बस्ती के मकान पर जबरन कजा करने और उसको पीटने का आरोपी बताते उस पर सिविल लाइन थाने में अपराधिक मामला दर्ज होने की जानकारी दी गई थी, पूरी तरह से भ्रामक है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि भास्कर के एमडी सहित संबंधित आलाधिकारियों पर इस खबर को प्रकाशित करने व उनकी मानहानी करने के आरोप में केस दर्ज होना चाहिए। उधर इस मामले में भास्कर के अंदरुनी सूत्र खुलासा करते हैं कि भास्कर के स्टेट हैड कमलेश सिंह, कार्यकारी संपादक अभिजीत मिश्र आदि सोमवार की रात्रि ही बठिंडा पहुंच गए थे। लेकिन अदालत में समय को लेकर भास्कर के एक कर्मी द्वारा भ्रामक स्थिति बनाने के बाद वह तय समय से करीब दो घंटे देरी से पहुंचे। भास्कर के आला अधिकारियों की गृहचाल आज खराब थी जो माननीय जज साहिबा ने आवाज जल्द लगवा दी और आरोपियों के हाजिर न होने पर पीड़ित दिनेश कुमार के बयान के आधार पर जमानती वारंट के आर्डर जारी कर दिए।
जब भास्कर के सभी आला अधिकारी लोकल साथियों, फोटोग्राफरों को साथ लेकर पूरे लाव लश्कर सहित पहुंचे तो उनको जमानती वारंट का ज्ञान हुआ और उनकी सांसें हवा में अटक गईं। भास्कर के आला संपादकों ने सबसे पहले बठिंडा के लोकल साथियों की खिंचाई की। सूत्र खुलासा करते हैं कि नरिंदर शर्मा व हिंमाशु घल्डिय़ाल ने जमानत करवा ली है, बाकियों की जमानत बाद में होगी। दिनेश कुमार के वकील हरपिंदर सिंह सिद्धू कहते हैं कि भास्कर में उनके क्लाइंट के खिलाफ झूठी खबर प्रकाशित की गई है। इस प्रकरण में शामिल लोगों को सजा हर हाल में दिलाएंगे। चाहे इसके लिए सुप्रीम कोर्ट क्यों न जाना पड़े।
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