Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

आवाजाही, कानाफूसी...

हिंदी-राजस्‍थानी गीतकार गजानन वर्मा का निधन

झुंझुनु। राजस्थानी भाषा के सुप्रसिद्ध गीतकार, संगीतकार गजानन वर्मा का गुरुवार सुबह दिल का दौरा पडऩे से निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार शक्रवार को उनके पैतृक गांव रतनगढ़ में किया गया। 23 मई 1926 को रतनगढ़ में जन्में गजानन वर्मा 86 वर्ष के थे। गजानन पिछले 2-3 वर्षों से कैसंर से पीडि़त होने के बावजूद अपने जन्म स्थान रतनगढ़ में रहते हुए साहित्य की सेवा करते रहे। गजानन वर्मा राजस्थानी लोक शैली के प्रख्‍यात कवि-गीतकार थे जिनके लिखे गीत उनके जीवन काल में ही लोकगीत हो गए। बहुमुखी प्रतिभा के धनी गजानन वर्मा मंचीय कविता पाठ द्वारा राजस्थान व प्रवासी राजस्थानियों के चहेते गीतकार हो गए। आज भी राजस्थान के लोकगीतों के रूप में उनके लिखे गीत बाजरे की रोटी पोई, फुलियै री मां, भंवर म्‍हारौ सोने रो गलपटियौ, चिमक च्यानणी रातां में, फागण आयो रे हठीला, आभै चमके बीजली, आओ जी परदेशी म्‍हारा, पिया थे परदेस बसौ तो जन-मानस में रचे बसे है।

झुंझुनु। राजस्थानी भाषा के सुप्रसिद्ध गीतकार, संगीतकार गजानन वर्मा का गुरुवार सुबह दिल का दौरा पडऩे से निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार शक्रवार को उनके पैतृक गांव रतनगढ़ में किया गया। 23 मई 1926 को रतनगढ़ में जन्में गजानन वर्मा 86 वर्ष के थे। गजानन पिछले 2-3 वर्षों से कैसंर से पीडि़त होने के बावजूद अपने जन्म स्थान रतनगढ़ में रहते हुए साहित्य की सेवा करते रहे। गजानन वर्मा राजस्थानी लोक शैली के प्रख्‍यात कवि-गीतकार थे जिनके लिखे गीत उनके जीवन काल में ही लोकगीत हो गए। बहुमुखी प्रतिभा के धनी गजानन वर्मा मंचीय कविता पाठ द्वारा राजस्थान व प्रवासी राजस्थानियों के चहेते गीतकार हो गए। आज भी राजस्थान के लोकगीतों के रूप में उनके लिखे गीत बाजरे की रोटी पोई, फुलियै री मां, भंवर म्‍हारौ सोने रो गलपटियौ, चिमक च्यानणी रातां में, फागण आयो रे हठीला, आभै चमके बीजली, आओ जी परदेशी म्‍हारा, पिया थे परदेस बसौ तो जन-मानस में रचे बसे है।

 
भारत के प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद के रतनगढ़ आगमन पर उनके सम्‍मान में काव्य पाठ गजानन वर्मा द्वारा किया गया। इनके द्वारा संयोजित पुतली घर (कठपूतली) नाटय संस्थान का उद्घाटन नई दिल्ली के मंच पर पं. जवाहर लाल नेहरू के कर कमलों से किया गया। गणतन्त्र दिवस पर दिल्ली के लाल किले पर होने वाले अखिल भारतीय कवि सम्‍मेलनों में इन्होंने देश-विदेश के श्रोताओं में ख्‍याति प्राप्त की। देश की प्रतिष्ठित संगीत कम्‍पनी एच.एम.वी. के सुगायक के रूप में उनकी आवाज में कई ग्रामोफोन रेकाडर्स निकल चुके हैं। अभी वीणा ने उनके एकल गीतों का अलबम बाजरै की रोटी जारी किया है। सुप्रसिद्ध संगीतकार भूपेन हजारिका के साथ बंगला व असमिया फिल्मों में हिन्दी व राजस्थानी गीतकार, अभिनेता के रूप में उन्होंने पहचान बनाई।
 
राजस्थानी व हिन्दी के सुप्रसिद्ध कवि, गीतकार व संगीतकार गजानन वर्मा के निधन पर अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति ने गहरा शोक व्यक्त किया है। समिति के प्रदेशाध्यक्ष के.सी. मालू, प्रदेश महामंत्री डॉ. राजेन्द्र बारहठ, प्रदेश मंत्री डॉ. सत्यनारायण सोनी, संस्थापक तथा अंतरराष्ट्रीय संगठक लक्ष्मणदान कविया, अंतरराष्ट्रीय संयोजक प्रेम भंडारी तथा राजस्थानी मोट्यार परिषद के प्रदेश संयोजक अनिल जांदू ने उनके निधन को राजस्थानी भाषा, साहित्य व संगीत की अपूरणीय क्षति बताया है।
 
गौरतलब है कि 23 मई 1961 को रतनगढ़ में जन्मे गजानन वर्मा अखिल भारतीय स्तर के वरिष्ठ कवि व गीतकार थे। उन्होंने न केवल राजस्थानी अपितु हिन्दी फिल्मों के लिए भी गीत लिखे और गाए। गणतंत्र दिवस पर नई दिल्ली में होने वाले अखिल भारतीय कवि सम्‍मेलनों में इनके गीतों की धूम रही। उन्होंने राजस्थानी में कई लघु फिल्मों का निर्माण भी किया। इनके लिखे व गाए गीत इतने लोकप्रिय हैं कि वे आज लोकगीतों के रूप में गाए जाते हैं। राजस्थान के सूचना एंव जनसम्‍पर्क मंत्री डा.जितेन्द्र सिंह ने हिन्दी और राजस्थानी के सुप्रसिद्ध गीतकार गजानन वर्मा के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की है। सिंह ने कहा कि स्व. वर्मा उच्च कोटि के गीतकार थे। उनके साहित्य, नाटक, संगीत के क्षेत्र में दिये गये योगदान को सदैव याद किया जायेगा। उनके निधन से राज्य के साहित्य जगत में अपूरणीय क्षति हुई है।
 
झुंझनू से रमेश सर्राफ की रिपोर्ट.
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...