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स्टार न्यूज अब एबीपी न्यूज बन गया, इस प्रचार में चालीस करोड़ से ज्यादा खर्च!

स्टार ग्रुप और आनंद बाजार पत्रिका समूह के बीच अलगाव होने के बाद एबीपी समूह अब स्टार न्यूज को एबीपी न्यूज कर रहा है. इस बात का प्रचार करने के लिए करीब चालीस करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. यह जानकारी एक भरोसेमंद सूत्र ने दी. सोचिए, चालासी करोड़ रुपये सिर्फ इस बात के लिए खर्च किए जा रहे हैं कि ''स्टार न्यूज अब एबीपी न्यूज बन गया'' और ''नाम बदलने से कुछ नहीं बदलता''. स्टार न्यूज के कुछ एंकरों और पत्रकारों की ग्रुप फोटो की होर्डिंग्स लगाई जा रही हैं. इन चेहरों के नीचे लिखा गया है कि नाम बदलने से कुछ नहीं बदलता.

स्टार ग्रुप और आनंद बाजार पत्रिका समूह के बीच अलगाव होने के बाद एबीपी समूह अब स्टार न्यूज को एबीपी न्यूज कर रहा है. इस बात का प्रचार करने के लिए करीब चालीस करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. यह जानकारी एक भरोसेमंद सूत्र ने दी. सोचिए, चालासी करोड़ रुपये सिर्फ इस बात के लिए खर्च किए जा रहे हैं कि ''स्टार न्यूज अब एबीपी न्यूज बन गया'' और ''नाम बदलने से कुछ नहीं बदलता''. स्टार न्यूज के कुछ एंकरों और पत्रकारों की ग्रुप फोटो की होर्डिंग्स लगाई जा रही हैं. इन चेहरों के नीचे लिखा गया है कि नाम बदलने से कुछ नहीं बदलता.

एबीपी ग्रुप की कोशिश यह दिखाने की है कि स्टार न्यूज के सारे जाने पहचाने लोग एबीपी न्यूज के हिस्से हैं और इस तरह कुछ नहीं बदला है, सिवाय नाम के. टीवी, अखबार, वेबसाइट्स, होर्डिंग्स आदि के जरिए स्टार न्यूज के एबीपी न्यूज बन जाने का जोरशोर से प्रचार किया जा रहा है. मार्केट इकानामी के इस दौर में हर कंपनी का पूरा जोर ब्रांड वैल्यू पर होता है और जब आपका नाम ही खिसक जाए तो जाहिर है दुनिया को यह बताने में काफी मेहनत करनी पड़ती है कि नाम बदला है, काम नहीं. पर स्टार न्यूज से एबीपी न्यूज में स्थानांतरण इतना स्मूथ नहीं है जितना बताया जा रहा है. विज्ञापनों व ब्रांडिंग की झूठी, सम्मोहनी दुनिया के जरिए ढेर सारी कंपनियों दर्शकों, ग्राहकों को भरमाकर पैसे ऐंठती बनाती हैं.

पर यही काम कोई मीडिया कंपनी करे तो शक होता है कि उस कंपनी का इरादा क्या है. क्या उसे अपने मीडिया होने पर कोई संदेह है? अगर उसे अपने कंटेंट, प्रोडक्ट, सरोकार पर भरोसा है तो उसे पचास करोड़ रुपये के आसपास ब्रांडिंग पर खर्च करने की जरूरत क्या है. इतने पैसे अगर देश भर में फैले इसी चैनल के स्ट्रिंगरों पत्रकारों कर्मियों में बांट दिए जाते तो शायद ज्यादा प्रभाव होता. पर कंपनियां वैसे नहीं सोचतीं, जैसे हम आप सोचते हैं. कंपनियां उन जगहों पर ज्यादा निवेश करती हैं जिन्हें हम आप बेमतलब और फालतू मानती हैं. असल में सारा खेल विज्ञापनों और बिजनेस का है. स्टार न्यूज को जो विज्ञापन आते थे, वे एबीपी न्यूज को भी मिलते रहेंगे, इसकी गारंटी नहीं है.

इस प्रचार अभियान के जरिए एबीपी प्रबंधन अपने क्लाइंट्स को ये मैसेज दे रहा है कि ब्रांड नेम बदलने और कंपनी बदलने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. पर कहने वाले कहते हैं कि स्टार ग्रुप साल भर बाद, जैसा कि निवेश के शर्तों में उल्लखित है कि करार टूटने के साल भर बाद ही फिर से नया निवेश विदेशी कंपनी कर सकती है, अपना चैनल ले आता है स्टार न्यूज नाम से तो क्या तब एबीपी न्यूज टिक पाएगा युद्ध में. क्योंकि कहा जा रहा है कि स्टार ग्रुप जब स्टार न्यूज में साल भर बाद वापसी करेगा तो एबीपी न्यूज के सारे चेहरों को किसी भी कीमत पर अपने साथ तोड़ जोड़ लेगा. तब एबीपी न्यूज की हैसियत गली छाप चैनल की रह जाएगी. फिलहाल पूरी मीडिया इंडस्ट्री स्टार न्यूज के एबीपी न्यूज बन जाने की परिघटना को सांस थामे देख रहा है.

सूत्रों के मुताबिक एबीपी मैनेजमेंट ने जमकर पैसा झोंक दिया है. डिस्ट्रीव्यूशन से लेकर ब्रांडिंग तक में कोई कसर बाकी नहीं रखी गई है. एमसीसीएस के बैनर से प्रसारित होने वाले तीनों चैनल स्टार न्यूज, स्टार माझा और स्टार आनंदा के नाम से एक जून से स्टार हटकर एबीपी जुड़ जाएगा. देखना है कि इतना सब करने के बाद परिणाम वैसा ही आता है जैसा एबीपी प्रबंधन उम्मीद कर रहा है या नहीं. रीब्रांडिंग के लिए कितना पैसा निवेश किया गया है, इस सवाल पर कंपनी के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसीडेंट सेल्स एंड डिस्ट्रीब्यूशन नीरज सनन कुछ भी कहने से बचते हैं. वे इसे कानफीडेंसियल बताते हैं. हालांकि वह इशारा करते हैं कि पिछले पांच वर्षों में किसी भी न्यूज ब्रांड की ब्रांडिंग के लिए यह सबसे बड़ा कैंपेन है. इससे ही समझा जा सकता है कि तीनों चैलनों की रीब्रांडिंग के लिए खर्च का मामला चालीस-पचास करोड़ के आसपास का है.

इस मसले पर अगर आप कुछ कहना चाहते हैं तो [email protected] पर भेज सकते हैं.

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