बनारस की पत्रकारिता के युग पुरूष आनन्द चन्दोला उर्फ “चाचा चन्दोला” के गुजर जाने की मर्मातंक पीड़ा पहुंचाने वाली यह खबर आज शाम को मिली। पता लगा की चचा बड़े बेटे के पास दिल्ली गये हुए थे। उन्हें हड्डी रोग की शिकायत हुई। अस्पताल में भर्ती हुए। हफ्ते भर से उनका इलाज चल रहा था। अन्ततः नहीं बचे। हम पत्रकारों के बीच चिर युवा समझा जाने वाला शख्स इतना जल्दी साथ छोड़ जायेगा, यकीन नहीं होता। पत्रकारिता में हम लोगों ने जब से होश संभाला, चचा वट वृक्ष की तरह साथ खड़े थे।
पत्रकारिता में उन्होंने अपनी पूरी जिन्दगी गुजारी। लगभग पांच दशक उन्होंने सक्रिय पत्रकारिता की । बीएचयू के छात्रो, छात्रनेताओं के बीच खासे लोकप्रिय रहे चन्दोला जी के चलते लंका, अस्सी, सोनारपुरा, दशाश्वमेध की अड़िया सदैव गुलजार रही। एनआईपी के वाराणसी ब्यूरो से जुड़कर आनन्द चन्दोला ने पत्रकारिता के खेल जगत को समृद्ध किया। वे स्वयं में अच्छे खिलाड़ी के रूप में सुप्रसिद्ध थे। काशी पत्रकार संघ की खेल प्रतियोगिताओं के जनक थे। कनिष्क देव बोरा वाला क्रिकेट
प्रतियोगिता या फिर दीनानाथ गुप्त बैडमिंटन प्रतियोगिता उन्हीं की शुरू की हुई परम्परा है।
हम लोगों का लगभग 20 साल से चचा से बेहद करीब का नाता था। उम्र करीब 80 की रही होगी, लेकिन उनके करीबी दोस्त युवा साथी ही होते थे। उनका निधन स्तब्धकारी है। ऐसा खुशदिल इंसान मिलना मुश्किल है। किस रूप में उनकी खूबियां गिनायी जाय, शब्द नहीं है।
क्या विडम्बना है शहर से एक पल भी दूर नहीं रहने वाले चन्दोला चचा आखिरी वक्त दिल्ली चले गये। वाकई यह शहर सूना हो गया। चचा जैसी जीवन्तता कहां मिलेगी। अबे! सुनबे! निकालबे! किससे सुनने को मिलेगा। सोनारपुरा की अड़ीका सन्नाटा कौन तोड़ेगा। हर एक शख्स को अपना समझने वाला देवतुल्य इंसान कहां मिलेगा। कबीर की नगरी में ‘‘छुट्टा सांड़’’ की तरह विचरने वाला शख्स सचमुच बन्दनीय था। पत्रकारों का ही नहीं राजनेताओं, खिलाड़ियों का रहनुमा अब नहीं रहा, सोचकर दिल कांप रहा है। गृहस्थ जीवन में रहकर भी वे योगीपुरूष की तरह थे। मोह-माया से दूर। सचमुच के सन्त। इस महान आत्मा को शत् शत् प्रणाम।
लेखक धर्मेन्द्र सिंह वाराणसी के वरिष्ठ पत्रकार और राजनेता हैं. उनसे उनके मोबाइल नंबर 09415207099 के जरिए संपर्क किया जा सकता है.
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