दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार एएल प्रजापति के बारे में एक बुरी खबर है कि उन्हें कल शाम पैरालिटिक (लकवा) अटैक पड़ गया जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई. वे गाजियाबाद के वसुंधरा में रहते हैं. वहीं घर पर शाम छह बजे के करीब अटैक पड़ा. परिजन उन्हें वसुंधरा के सेक्टर 15 स्थित अस्पताल में ले गए जहां वे आईसीयू में भर्ती हैं. डाक्टर उनकी हालत क्रिटिकल बता रहे हैं. पता चला है कि पांच साल पहले भी उन्हें अटैक पड़ा था तब वह रिकवर कर ले गए थे. उनके जानने वालों ने फिर से उनके पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना की है.
अच्छे लाल प्रजापति उर्फ एएल प्रजापति हिंदी दैनिक जनसत्ता से 1983 में उप-संपादक के रूप में जुड़े थे. 1988 में वे इससे अलग हो गए और नई पारी इंडिया टुडे ग्रुप से शुरू की. कोलकाता के प्रतिष्ठित संत जेवियर कॉलेज से विज्ञान में स्नातक एएल प्रजापति इंडिया टुडे समूह से 2009 तक जुड़े रहे. इस दौरान उन्होंने साप्ताहिक इंडिया टुडे में एसोसिएट कॉपी एडिटर और प्रतिनियुक्ति पर आज तक में कॉपी डेस्क एडिटर (2000-2004) के रूप में अपनी सेवा दी. इसके अलावा उन्होंने साप्ताहिक धर्मयुग, रविवार, सन्मार्ग और हिंदुस्तान के माध्यम से भी अपनी प्रतिभा का जौहर बिखेरा.
उन्होंने कई किताबों का अनुवाद भी किया है. इनमें उद्योगपति एवं मीडियाकर्मी राघव बहल की किताब सुपर पॉवर और लेखिका कामिनी मथाई की पुस्तक एआर रहमानः संगीत का जादूगर भी शामिल है. पिछले साल उन्होंने हरिशंकर व्यास के अखबार नया इंडिया में ज्वाइन किया था लेकिन कुछ समय बाद वे वहां से हट गए. भड़ास4मीडिया एएल प्रजापति के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता है और उनके परिचितों से अपील करता है कि वे यथासंभव एएल प्रजापति व उनके परिवार की इस संकट की घड़ी में मदद करें. अगर किसी सामूहिक अपील की जरूरत महसूस हुई तो भड़ास उसके लिए योगदान करने को तैयार है.





