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वेबसाइट बनाने के नाम पर दो ‘उस्तादों’ ने मुझे लूटा

: डोमेने नेम तक मेरे नहीं बल्कि खुद के नाम से बुक कर लिया : एक ने आठ हजार तो दूसरे ने बारह हजार रुपये ले लिए पर हुआ अभी कुछ नहीं : करीब 3 माह पूर्व मैंने प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के असहाय अनुभव के बाद सड़किया छाप बनने लगा तो एक नई उम्मीद के साथ वेब जर्नलिज्म की दुनिया में अपना एक छोटा सा हिंदी न्यूज वेब पोर्टल की योजना बनाई। मैं खुद कंप्यूटर+उत्पाद प्रबंधन का प्रशिक्षण लेने के उपरांत कई न्यूज़ पोर्टल को सेवायें दी है।

: डोमेने नेम तक मेरे नहीं बल्कि खुद के नाम से बुक कर लिया : एक ने आठ हजार तो दूसरे ने बारह हजार रुपये ले लिए पर हुआ अभी कुछ नहीं : करीब 3 माह पूर्व मैंने प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के असहाय अनुभव के बाद सड़किया छाप बनने लगा तो एक नई उम्मीद के साथ वेब जर्नलिज्म की दुनिया में अपना एक छोटा सा हिंदी न्यूज वेब पोर्टल की योजना बनाई। मैं खुद कंप्यूटर+उत्पाद प्रबंधन का प्रशिक्षण लेने के उपरांत कई न्यूज़ पोर्टल को सेवायें दी है।

सबसे पहले मैंने अपना एक पुराना ब्लॉग www.raaznaamaa.blogspot.com  को www.rajnama.com के रुप तब्दील कराया। इस कार्य के लिये हजारीबाग के एक वेब डिजायनिंग कंपनी ने शुरुआती दौर में ही 8000 रु. लिये और डोमेन रजिस्ट्रेशन मेरे नाम से करने के अलावे साइट की कोडिंग करने की बात कही। लेकिन जब उसने वादे के अनुसार काम नहीं किया तो मैंने लाचार होकर रांची के एक वेब डिजायनिंग कंपनी से संपर्क किया। उसने 12000 रु. लेकर नये सिरे से www.rajnama.com का कोडिंग करने जिम्मेवारी ली।

लेकिन ये क्या ! छोटे मियां तो छोटे मियां-वड़े मियां भी सुभान अल्लाह निकला। जब यह एक लंबा समय लेकर मुझे साइट का यूजर एडमिन सौंपा तो कभी ठीक से 2-4 दिन भी काम नहीं किया और बार-बार मेंटेनेंस के नाम पर 100 से उपर अहम समाचार/ आलेख डिलीट कर डाला। फिर इसने कहा कि पुराने डोमेन से दिक्कत आ रही है, अगर नया डोमेन लेकर काम किया जाय तो समस्यायें समाप्त हो जायेगी। फिर उसे मैंने 600 रु. www.raznama.com  रजिस्ट्रेशन करवाया। लेकिन इसके बाद समस्या और भी बढ़ गई। पिछले एक माह से कभी साइट का डिजायन तो कभी यूजर एडमिन न के बराबर काम कर रहा है। इधर पिछले 4 दिनों से साइट का यूजर एडमिन काम नहीं कर रहा है और बात करने पर ठेठ बिहारी अंग्रेजी बतियाता है।

सबसे बड़ा आश्चर्य तो मुझे यह जानकर हुआ है कि दोनों सेवादाता ने अपने नाम से मेरे साइट का निबंधन करा रखा है। अब आप ही बताइये कि मैं क्या करूं। पत्रकारिता में बेरोजगारी के दौर में सारे पैसे मैंने कर्ज लेकर साइट की शुरुआत एक नई उम्मीद के साथ की थी। पर पैसे भी गए और हाथ कुछ लगा भी नहीं। क्या नेट की दुनिया में ऐसे धोखेबाज और धंधेबाज ही भरे पड़े हैं?

मुकेश भारतीय

रांची

संपर्क: [email protected]

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
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