सीबीआई ने बुधवार को एक विशेष अदालत को बताया कि राजेश और नुपुर तलवार ने अपनी बेटी आरूषि और नौकर हेमराज को आपत्तिजनक स्थिति में पाया और गुस्से में उनकी हत्या कर डाली. दंत चिकित्सक दंपति ने जांच एजेंसी की इस दलील का जोरदार खंडन किया. तलवार दंपति ने सीबीआई के दावे का विरोध किया और कहा कि अभिजात्य समाज में सेक्स कोई बड़ी बात नहीं और यह हत्या की वजह नहीं हो सकती.
मई 2008 के दोहरे हत्याकांड मामले में आरोप तय करने के लिए अपने दलीलों को दोबारा शुरू करते हुए सीबीआई के वकील आर के सैनी ने विशेष न्यायाधीश श्याम लाल को कहा कि हादसे के दिन तलवार दंपति देर शाम घर आए और आरूषि और हेमराज को बैठक वाले कमरे में नहीं पाकर अपनी बेटी के कमरे में गए.
सैनी ने कहा कि कमरा अंदर से बंद था लेकिन तलवार दंपति ने एक अन्य चाभी से उसे बाहर से खोला और अपनी बेटी और हेमराज को आपत्तिजनक स्थिति में देखकर आपे से बाहर हो गए. उन्होंने बताया कि गुस्साए तलवार ने गोल्फ के डंडे से हेमराज और अपनी बेटी पर बार बार वार किया. गौरतलब है कि 14 वर्षीया आरुषि को 16 मई, 2008 को उसके नोएडा स्थित आवास पर मृत पाया गया था. इसके अगले दिन घर की छत पर अपने घरेलू नौकर हेमराज का भी शव मिला.
सीबीआई ने आरोप लगाया था कि आरुषि और हेमराज पर हमला गोल्फ स्टिक से किया गया था लेकिन कोर्ट में आज तलवार दंपति के वकील ने इस बात को सिरे से खारिज किया और अदालत के सामने गोल्फ स्टिक पेश की. गोल्फ स्टिक दिखाकर ये बताने की कोशिश की गई कि मृतकों के शरीर पर पड़े निशान गोल्फ स्टिक के निशान से एकदम अलग है. हालांकि गोल्फ स्टिक सबूत है इसलिए इस पर कोर्ट में चर्चा ही नहीं हुई. दो घंटे चली बहस के बाद कोर्ट ने कल तक के लिए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
इससे पहले दोनों पक्षों में हुई जिरह के दौरान नूपुर के वकीलों ने कोर्ट को कहा कि राजेश और नुपुर ने अगर अरुषि और हेमराज की हत्या की होती तो वो मोबाइल की तरह ही उसी रात हेमराज की लाश को भी ठिकाने लगा देते. इस पर सीबीआई का कहना था कि उसने कोर्ट में कभी इस बात को नहीं रखा कि मोबाइल फोन उसी रात बाहर फेंक दिया गया था. सीबीआई ने कोर्ट में ये भी कहा कि नूपुर और राजेश तलवार के पास उस रात अगर कार होती तो वे हेमराज की लाश ठिकाने लगा सकते थे.
इस पर सीबीआई ने कहा कि राजेश तलवार के पास गैराज नहीं है और वो अपनी कार नूपुर की मां के घर खड़ी करते थे. उस रात भी उनकी कार वहीं खड़ी थी, जबकि नूपुर के वकील ने अपनी दलील में कहा कि हत्या की रात हेमराज अपने कुछ दोस्तों के साथ सर्वेंट रूम में शराब पी रहा था. उस रात उसने आरुषि का कमरा खुला देखा और गलत नीयत से कमरे में दाखिल हो गया. आरुषि ने जब हेमराज का विरोध किया तो हेमराज ने खुखरी से आरुषि की हत्या कर दी.
आरुषि की हत्या के बाद हेमराज के दोस्तों को लगा कि वो इस हत्याकांड में फंस जाएंगे. यही वजह है कि हेमराज को उसके दोस्त छत पर ले गए और वहां उसकी हत्या कर दी. तलवार के वकीलों का ये भी दावा था कि चूंकि हेमराज के खून के निशान घर के अंदर से नहीं मिले थे इससे भी उनकी बात साबित होती है. अब कोर्ट कल तय करेगी कि आरुषि और हेमराज हत्याकांड में राजेश और नूपुर तलवार के खिलाफ आरोप तय होते हैं या नहीं.
इसके पहले कल के दिन सीबीआई के अभियोजक आर के सैनी ने विशेष न्यायाधीश एस लाल के समक्ष दलीलें पेश कीं. सैनी ने कहा कि आरुषि की हत्या के लिए राजेश एवं नूपुर जिम्मेदार हैं और अपने अपराध छिपाने के लिए उन्होंने घटनास्थल पर बदलाव किए. वहीं, सीबीआई की दलीलों का विरोध करते हुए बचाव पक्ष के वकील ने विजय पाल सिंह राठी ने कहा, "मामले में क्लोजर रिपोर्ट सौंपा जाना अपने आप में इस बात का सबूत है कि तलवार दंपति के खिलाफ कोई प्रमाण नहीं है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सीबीआई द्वारा किए गए सभी वैज्ञानिक परीक्षण उसकी इस दलील के खिलाफ हैं." उन्होंने कहा, "सीबीआई अपराध साबित करने में नाकाम रही है. न तो प्रत्यक्ष और न ही परिस्थितिजन्य साक्ष्य सीबीआई के आरोप तय किए जाने के तर्क का समर्थन करते हैं. इसलिए नूपुर व राजेश तलवार को इस मामले में बरी कर दिया जाना चाहिए."





