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पीढि़यों के लिए धन अर्जित करने के बाद भी कांग्रेसियों की भूख खतम नहीं होती!

मई के तीसरे सप्ताह में जब कांग्रेस नीत सरकार अपनी दूसरी पारी के तीसरे साल पूरे करने जा रही है तब मनमोहन सिंह जी के पास ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे वो अपनी उपलब्धि के रूप में प्रचारित कर सकें. फिर भी अगर कुछ उपलब्धि बताना ही पड़े तो आप दो चीज़ों की चर्चा कर सकते हैं. पहली उपलब्धि ये कि खुद सरकार इतनी तरह के अन्याय-अत्याचार के बावजूद कायम है और दूसरा इन सबके बावजूद यह देश भी कायम ही है, फिर भी रहा है बांकी नामोंनिशा हमारा. अन्यथा सोनिया जी की इस सरकार ने देश को रसातल में पहुंचाने का कोई भी प्रयास छोड़ा नहीं है. वास्तव में यह समझ पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है कि अपने ही मतदाताओं से आखिर कैसी दुश्मनी है इस पार्टी को?

मई के तीसरे सप्ताह में जब कांग्रेस नीत सरकार अपनी दूसरी पारी के तीसरे साल पूरे करने जा रही है तब मनमोहन सिंह जी के पास ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे वो अपनी उपलब्धि के रूप में प्रचारित कर सकें. फिर भी अगर कुछ उपलब्धि बताना ही पड़े तो आप दो चीज़ों की चर्चा कर सकते हैं. पहली उपलब्धि ये कि खुद सरकार इतनी तरह के अन्याय-अत्याचार के बावजूद कायम है और दूसरा इन सबके बावजूद यह देश भी कायम ही है, फिर भी रहा है बांकी नामोंनिशा हमारा. अन्यथा सोनिया जी की इस सरकार ने देश को रसातल में पहुंचाने का कोई भी प्रयास छोड़ा नहीं है. वास्तव में यह समझ पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है कि अपने ही मतदाताओं से आखिर कैसी दुश्मनी है इस पार्टी को?

जिस आम आदमी के साथ होने का दावा कर यह सत्ता में दुबारा चुन कर आयी है उसी आम आदमी को समाप्त करके क्या हासिल कर लेगी वो? पीढ़ियों के लिए संपत्ति अर्जित कर लेने के बाद भी आखिर यह कैसी भूख है कांग्रेस की जो खत्म ही नहीं होती कभी? अपने किये सुकर्म ही साथ जायेंगे इतनी छोटी सी बात भी समझने को तैयार क्यूँ नहीं है आखिर यह? इसे अंततः कौन समझाए कि कफ़न में जेब तो नहीं होती भाई.

अगर आप 65 करोड के बोफोर्स घोटाले, 1 लाख 76 हज़ार करोड के 2 G घोटाले, 50 हज़ार करोड से ज्यादा के राष्ट्रकुल खेल घोटाले, सैकड़ों करोड के आदर्श घोटाले, लगभग 10 लाख करोड के तब प्रधानमंत्री कार्यालय के अंतर्गत ही आने वाले कोयला घोटाले, सैकड़ों अरब के महंगाई घोटाले (जिसमें जमाखोरों को प्रश्रय देकर उपयोगी वस्तुओं की कृत्रिम किल्लत पैदा की जाती है बाद में उसे दस से बीस गुनी कीमत पर बेचा जाता है. तभी जहां अनाज उपजाने वाले किसान आत्महत्या कर रहे हैं तो उसे खरीद पाने में असफल देश के 35 करोड लोग दो वक्त की रोटी नहीं जुटा पा रहे हैं.) आदि आंकड़े से बोर हो गए हों तो वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आपके लिए कुछ नए आंकड़े उपलब्ध कराये हैं.

अपने तीसरे कार्यकाल की पूर्व संध्या पर सरकार ने कालेधन पर श्वेत पत्र जारी किया है. यह श्वेत पत्र यूं तो अपने आप में इसलिए अधूरा है कि इसमें विदेशों में धन जमा करने वाले चेहरे पे नकाब ज्यूं का त्यूं रहने दिया गया है, फिर भी मजबूरी वश भी केन्द्र को जो जानकारी देनी पड़ी है वो भी भयावह है. इस पत्र में दिए गए आंकड़ों के अनुसार देश से बाहर भारत का 104 अरब डॉलर काला धन जमा है. आज के विनिमय दर के अनुसार इतने डॉलर का मतलब हुआ करीब 60,00000000000 (साठ खरब) रुपया. सरल शब्दों में इसे ऐसे समझ सकते हैं कि केवल इस रकम से समूचे छत्तीसगढ़ प्रदेश की जनसंख्या से चार गुणा ज्यादे लोगों को लखपति बनाया जा सकता है.

आप कल्पना करें कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार ही अगर देश का काला धन वापस आ जाए, ऐसे ही आंकड़ों के अनुसार अगर लूटी गयी सारी रकम बरामद हो जाय, जैसे कोर्ट ने टू जी के सभी 122 लाइसेंसों को रद्द किया है, वैसे ही अगर सारा पैसा देश में वापस आ जाय तो शायद समूचा भारत आज लखपति हो जाय. न कोई किसान आत्महत्या करते, न ही किसी छात्र की पढ़ाई छूटती. देश अपने दम पर अपने नागरिकों के लिए मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, भोजन आदि का इंतज़ाम कर पाता. करोड़ों मुंह का निवाला छीन अपना घर भरने वाली कांग्रेस नीत सरकार के यह आठ साल किसी दु:स्वप्न की तरह ही रहे हैं. काश यह सपना ही होता लेकिन ‘संप्रग’ आज की क्रूर वास्तविकता है. उम्मीद है इनके पाप का घड़ा अब भर गया होगा और केन्द्र की यह सरकार अपने ही बोझ से यथाशीघ्र धराशायी होगी.

लेखक पंकज झा भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं. इन दिनों रायपुर से प्रकाशित छत्तीसगढ़ भाजपा की पत्रिका दीप कमल के संपादक के रूप में कार्यरत हैं.

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