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बैंक से रिटायर होने के बाद कथाकार सूरज प्रकाश साहित्यशिल्पी डाट काम से जुड़े

प्रिय मित्र, बीते दिनों 30 मार्च को मैं अपनी बैंक की नौकरी से रिटायर हो गया।  इन दिनों आराम के मूड में हूं और खूब पढ़ रहा हूं, संगीत  सुन रहा हूं, फिल्‍में देख रहा हूं और अपने वक्‍त को अपने तरीके से जीने के नये तरीके तलाश रहा हूं। पिछले दिनों मित्रों ने एक साप्‍ताहिक वेब पत्रिका www.sahityashilpi.com के संपादन का काम मुझे सौंप दिया है। चौथा अंक आ गया है। तीसरा अंक मंटो पर था जिसे खूब पसंद किया गया। हर पत्रिका को हर दिन लगभग 1500 लोग देख रहे हैं। इस पत्रिका में मैंने कई नये कालम  शुरू किये हैं। एक है – मेरे पाठक। इसमें रचनाकार अपने पाठकों के बारे में बात करते हैं कि किस तरह से लम्‍बे लेखन के दौरा पाठकों से रिश्‍ते बनते चलते हैं।

प्रिय मित्र, बीते दिनों 30 मार्च को मैं अपनी बैंक की नौकरी से रिटायर हो गया।  इन दिनों आराम के मूड में हूं और खूब पढ़ रहा हूं, संगीत  सुन रहा हूं, फिल्‍में देख रहा हूं और अपने वक्‍त को अपने तरीके से जीने के नये तरीके तलाश रहा हूं। पिछले दिनों मित्रों ने एक साप्‍ताहिक वेब पत्रिका www.sahityashilpi.com के संपादन का काम मुझे सौंप दिया है। चौथा अंक आ गया है। तीसरा अंक मंटो पर था जिसे खूब पसंद किया गया। हर पत्रिका को हर दिन लगभग 1500 लोग देख रहे हैं। इस पत्रिका में मैंने कई नये कालम  शुरू किये हैं। एक है – मेरे पाठक। इसमें रचनाकार अपने पाठकों के बारे में बात करते हैं कि किस तरह से लम्‍बे लेखन के दौरा पाठकों से रिश्‍ते बनते चलते हैं।

कई बार पाठक रूठते हैं, नाराज होते हैं, कहते हैं कि आपने मेरी कहानी कैसे पता कर ली या फलां कहानी का अंत ऐसे नहीं ऐसे होना चाहिये था। ये कालम पाठकों से हमारे रिश्‍ते की बात करता है। अब तक इसमें प्रताप सहगज, रूप सिंह चंदेल, कमल कुमार‍ जितेन्‍द्र ठाकुर आदि अपनी बात कह चुके हैं। इसके अलावा मैंने पढ़ी किताब में किसी अच्‍छी किताब का जिक्र, आओ धूप में नये  रचनाकार, रोचक  या प्रेरक प्रसंग में लेखक के जीवन में घटे ऐसे प्रंसगों का विवरण होता है जो वे शेयर करना चाहें1 देस परदेस में विदेशी साहित्‍य, भाषा सेतु में भारतीय भाषाएं और विरासत में ख्‍यातिनाम कहानियां दे रहे हैं। आप अंक देखेंगे तो अंदाजा लग जायेगा।

इनके अलावा हम हर अंक के साथ अपने पाठकों को एक ईबुक का उपहार दे रहे हैं1 अब तक हम चार्ल्‍स डार्विन की आत्‍मकथा का हिंदी अनुवाद, एनिमल फार्म का हिंदी अनुवाद, मंटो पर एक किताब, मधुशाला दे चुके हैं। आगामी अंक के साथ रूप सिंह चंदेल की कहानियां और उससे अगले अंक में एस आर हरनोट की कहानियों  का संग्रह ईबुक के रूप में देंगे।

आपसे सादर अनुरोध कर रहा हूं कि अगर आप हमारे लिए – मेरे  पाठक  कालम के लिए कुछ  लिख सकें तो हमारी पत्रिका का मान बढ़ायेंगे। यात्रा संस्‍मरण, कहानी, कोई और प्रसंग या मैने पढ़ी किताब के लिए भी आपके शब्‍द हमारे लिए मायने रखते हैं। आपकी रचना हमारी पत्रिका के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण होगी।

इंतजार करूंगा आपकी हां और रचना का भी

सादर
सूरज
मुंबई
09930991424
www.surajprakash.com
[email protected]
 

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