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कहीं अनुपमा के कांधे पर बंदूक रखकर तो नहीं चला रहे कुछ लोग?

इस थ्रिल-स्‍टोरी के केंद्र में है एक अकेली महिला अनुपमा सिंह, जबकि उसके चारों कोनों पर लपलपाते खड़े हैं नेता, ठेकेदार, गुंडे और बेलगाम आला अफसर। बसपा सरकार में अनुपमा की जमकर छीछालेदर हो चुकी है। इन्‍हीं चौगड़ी के चलते ही अनुपमा को नौकरी से निकाला गया, पति का दो बार हृदयाघात हुआ, बेटे पर जानलेवा हमला किया गया। लेकिन हौसलामंद अनुपमा ने अपनी लड़ाई जारी रखी।

इस थ्रिल-स्‍टोरी के केंद्र में है एक अकेली महिला अनुपमा सिंह, जबकि उसके चारों कोनों पर लपलपाते खड़े हैं नेता, ठेकेदार, गुंडे और बेलगाम आला अफसर। बसपा सरकार में अनुपमा की जमकर छीछालेदर हो चुकी है। इन्‍हीं चौगड़ी के चलते ही अनुपमा को नौकरी से निकाला गया, पति का दो बार हृदयाघात हुआ, बेटे पर जानलेवा हमला किया गया। लेकिन हौसलामंद अनुपमा ने अपनी लड़ाई जारी रखी।

बहरहाल, अब सपा सरकार में उसकी सुनवाई हुई और तब प्रदेश में नौकरशाही के सर्वोच्‍च रहे कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह और मायावती के सचिव रहे नवनीत सहगल समेत विधायक व शिक्षक माफिया के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में आपराधिक मामलों में मुकदमा दर्ज कर दिया गया है। दूसरी ओर शशांक शेखर सिंह और नवनीत सहगल ने एक ईमेल जारी कर अनुपमा के आरोप को सिरे से नकारते हुए उसे साजिश बताया है और कहा है कि अनुपमा की यह करतूत हाईकोर्ट की मानहानि है। ईमेल में दावा किया गया है कि यह अफसर इस मामले में न्‍यायालय की शरण में जाएंगे। वैसे इस मामले में अनुपमा सिंह कई अनसुलझे सवालों के चलते खुद ही संदेहों के घेरों में फंस दिखती हैं।

कांड की शुरुआत बसपा सरकार के दौरान हुई। मायावती के ड्रीम-प्रोजेक्‍ट ताज कॉरीडोर के घोटालों के खिलाफ अनुपमा सिंह ने जनहित याचिका लखनऊ हाईकोर्ट में दाखिल की थी। याचिका में मायावती और उनके करीबी नसीमुद्दीन सिद्दीकी की करतूतों की जांचने की मांग की गयी थी। यह याचिका तब दायर हुई जब राज्‍यपाल ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग खारिज कर दी थी। अनुपमा गोमतीनगर के विश्‍वास खंड में रहती हैं। अनुपमा एक निजी कालेज में काम करने के साथ ही दुर्गा देवी सर्वजन सेवा संस्‍था की अध्‍यक्ष भी हैं।

अनुपमा सिंह के अनुसार इस मामले में जैसे ही पूर्व मुख्यमंत्री मायावती व पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन को नोटिस जारी की गई, बसपा सरकार के इशारे पर सरकार के बिल्‍लौरी-आंख कहे जाने वाले अधिकारियों ने उनका उत्पीड़न शुरू कर दिया। एक निजी कालेज में नौकरी कर रही अनुपमा को नौकरी से निकाल दिया गया। उनका आरोप है कि पूर्व कैबिनेट सचिव शशांक शेखर व वरिष्ठ आईएएस नवनीत सहगल ने उन्हें इसके लिए दबाव बनाया था। पति अनुज की अमीनाबाद स्थित दवा की दुकान को तबाह करने की भी साजिश की गयी। अनुज को दो बार दिल का दौरा पड़ा। कालेज से हटने के बाद अनुपमा एमिटी यूनीवर्सिटी में लाइब्रेरियन गयीं लेकिन उसके बाद भी उनका प्रताड़ना जारी रहा। एमिटी के संस्थापक अशोक चौहान ने उनकी नौकरी छीन ली। पैरवी से हटाने के लिए वकील पर भी दबाव बनाया गया।

उधर भाजपा के रास्‍ते सपा और फिर बसपा की डगर तक विधायकी हासिल करने वाले गोंडा से बसपा के नेता व पूर्व विधायक अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैय्या व उनके साथियों ने उन्हें जान से मारने और बेटे को अगवा कराने की धमकी दी। दो बार उनके बेटे पर जानवाला हमला किया गया। यही नहीं, एक दिन लल्ला भैय्या अपने साथियों के साथ घर पहुंच कर याचिका वापस लेने धमकी दे गये। लखनऊ में अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी का दावा है कि अनुपमा की तहरीर पर हजरतगंज कोतवाली में आईपीसी की धारा 143 (तीन से अधिक लोगों द्वारा प्रताड़ित करना), 506 (धमकी देना), 507 (टेलीफोन पर धमकी देना) व 452 (घर में आकर धमकाना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। हजरतगंज कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद अब मामले की विवेचना गोमतीनगर पुलिस को सौंपी गयी है।

बसपा सरकार में लोगों की प्रताड़ना का किस्‍सा सैकड़ों नहीं, हजारों-लाखों में पसरा हुआ है। बसपा सरकार की ब्‍यूरोक्रेसी की करतूत की धज्जियां तो समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव तक उड़ा चुके हैं। ऐसे ही एक बड़े मामले में पूर्व मुख्‍यमंत्री मायावती के कार्यालय के पास के एक एमएलसी के मकान को जबरिया कब्‍जे ने की साजिश की थी। घटना के अनुसार इस एमएलसी से मायावती के एक प्रमुख सचिव शैलेष कृष्‍ण ने उस मकान को खाली करने का मौखिक आदेश किया था। दरअसल, एमएलसी के इस मकान को खाली कराने के लिए उसे मायावती के प्रेरणास्‍थल में शामिल करने की साजिश थी। लेकिन फोन पर हुई इस बातचीत को उस नेता ने फोन टेप करने मुलायम सिह यादव के सामने पेश कर दिया। पलटवार कर मुलायम सिंह यादव ने आनन-फानन एक प्रेस-कांफ्रेस आयोजित इस साजिश का भांडाफोड कर दिया था।

लेकिन अनुपमा के इस कांड में कई पेंच भी शामिल हैं जो अनुपमा सिंह को संदेहों के कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। सवाल है कि समाजसेवा और कालेज में लाइब्रेरियन का काम कर रही अनुपमा का आखिर ताज कारीडोर से क्‍या संपर्क रहा। सवाल यह भी है कि पिछले तीन बरसों के बीच इस अनुपमा ने अपने साथ हुए कथित अन्‍याय पर क्‍या प्रतिवाद किया। आखिर वह मजबूरी क्‍या थी जब अपने पुराने वकील चंद्रभूषण पांडेय को उन्‍होंने पैरवी से मना कर दिया। सूत्र तो यहां तक दावा कर रहे हैं कि यह कांड कुछ लोग अनुपमा के कांधे पर बंदूक रख कर चला रहे थे।

लखनऊ से कुमार सौवीर की रिपोर्ट. कुमार सौवीर यूपी के जाने माने पत्रकार हैं. दैनिक जागरण, दैनिक भास्‍कर, हिंदुस्तान, महुआ, एसटीवी समेत कई अखबारों और चैनलों में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं. सौवीर अपने बेबाक बयानों और दमदार लेखन के लिए जाने जाते हैं. उनसे संपर्क [email protected] और 09415302520 के जरिए किया जा सकता है.

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