पिछले दिनों दैनिक जागरण जालन्धर यूनिट में उप समाचार सम्पादकों की एक लिखित परीक्षा ली गयी. देश का नम्बर एक अख़बार होने का दंभ भरने वाले इस अख़बार की अंदरूनी हालत यह है कि केवल दो उप समाचार सम्पादक ही पास हो सके. समाचार सम्पादक शाहिद रज़ा समेत सारे फेल हो गए. वैसे एक और बात भी खूब चर्चा में होती है कि अपने आका कमलेश रघुवंशी से ही हर बात पूछ कर राज काज चलाने वाले रज़ा की स्थिति आजकल वैसे ही खराब चल रही है.
सीनियर पत्रकार और समाचार सम्पादक प्रियेश सिन्हा भी आजकल जालन्धर में बैठने लगे हैं. इस से रज़ा बहुत असहज हो गए हैं और कई जगह अपने खास समझने वाले लोगों के पास इस बात का रोना रो चुके हैं. इसी खुंदक में रज़ा ने गीता डोगरा को बाहर का रास्ता दिखा दिया. गीता डोगरा के पति का निधन हुए ही अभी तीन माह हुए थे कि उन्हें इस लिए चलता कर दिया कि वह प्रियेश सिन्हा के गुट की समझी जा रही थीं. वैसे रज़ा की स्थिति का सबको पता है कि वो कहाँ से आदेश लेकर अपना काम करते हैं….लेकिन उसका आका भी आजकल किसी चैनल में जाने की फ़िराक में कहा जाता है क्योंकि उसकी कोई बात पूछने वाला नहीं रह गया है.
पत्रकारों में सहम है कि शाहिद जैसे पर-जीवी के कहे पर प्रबंधन अगर गीता डोगरा जैसी वरिष्ठ पत्रकार को निकाल सकता है तो उनकी क्या औकात? ख़ैर इस से साफ़ हो गया है कि रिश्तेदारों की फ़ौज में न्याय की उम्मीद रखना बेमानी है. लेकिन दो-दो समाचार सम्पादकों को एक यूनिट में रख कर प्रबन्धन क्या संकेत दे रहा है. इसी की चर्चा आजकल जागरण के जालंधर यूनिट में खूब हो रही है.





