छंटनी के बयार में जीएनएन न्यूज में भी मामला गरम है. यहां के कर्मचारियों पर भी लगातार तलवार लटक रही है. पंद्रह हजार से ज्यादा सैलरी पाने वाले प्रबंधन के निशाने पर हैं. ताजा सूचना है कि आउटपुट हेड फ्रैंकलीन निगम का इस्तीफा हो गया है. फ्रेंकलीन ने क्यों इस्तीफा दिया है तथा कहां से अपनी नई पारी शुरू कर रहे हैं इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय में यहां से कई लोगों की विदाई की जा चुकी है.
इसके पहले चैनल हेड रहे मारुफ रजा, एडिटिंग से नीतेश, ग्राफिक्स से नरेंद्र समेत कई लोगों को बाहर किया जा चुका है. चैनल अब वरिष्ठों की बजाय ट्रेनियों से चलवाए जाने की कोशिश की जा रही है. इसका परिणाम है कि खबरों को लेकर नए हेड अनंत मित्तल परेशान हैं. कहीं कंटेंट सही नहीं जा रहा है तो कहीं शब्द में गलतियां जा रही हैं. सूत्रों का कहना है कि इस तरह के माहौल से अनंत मित्तल भी परेशान हैं. हिंदी को लेकर सजग रहने वाले मित्तल से कर्मचारी भी परेशान हैं. कनिष्ठ कर्मी हिंदी लिखने में अक्सर गलती कर रहे हैं, जो अनंत मित्तल का पारा गरम कर रहा है.
पर सवाल यह उठता है कि जब सीनियर बाहर होंगे और ट्रेनी व जूनियर अंदर होंगे तो इस तरह की स्थितियों का सामना तो करना ही पड़ेगा. हालांकि दूसरी तरफ कर्मी इसलिए भी परेशान हैं कि अनंत मित्तल शुद्ध हिंदी लिखने पर जोर दे रहे हैं जो टीवी की भाषा के लिहाज से उन्हें उचित नहीं लग रहा है. सूत्रों का कहना है कि ब्रह्मपुत्र हादसे के बाद भी नदी और नद को लेकर तनाव हुआ था. ज्यादातर कर्मचारियों को जानकारी नहीं थी कि ब्रह्मपुत्र नद है लेकिन यह शब्द ज्यादातर लोगों की समझ से बाहर है. कर्मचारी नदी लिख रहे थे, जो अन्य लोगों की भाषा समझ के हिसाब से सही था, परन्तु अनंत मित्तल इससे खासे नाराज हुए.
हालांकि कर्मचारियों के लिए राहत की बात यह रही कि इस बार उनकी सैलरी समय से आ गई. इसे अनंत मित्तल की देन बताया गया. अनंत मित्तल ने प्रबंधन को भी साफ कह रखा है कि वे ना तो किसी को लेकर आएंगे और ना ही किसी को बाहर करेंगे, लिहाजा अब तक जितने भी लोग बाहर हुए हैं माना जा रहा है कि उसमें एचआर का सबसे ज्यादा हाथ है. चिटफंड कंपनी चलाने वाले मालिक भी अब चैनल में हस्तक्षेप करने लगे हैं. और बीस के आसपास की सैलरी पाने वालों को ऐन केन प्रकारेण निकालने की जुगत लगाई जा रही है. एडिटोरियल के अलावा पीसीआर एवं अन्य विभागों से भी लगातार कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है.
तमाम लोगों को नोटिस दिया जा रहा है. यहां काम करने वाले तनावपूर्ण शांति में जी रहे हैं. उन्हें इसका भी अंदाजा नहीं है कि कब उनकी नौकरी चली जाएगी. अच्छे काबिल लोगों को लगातार बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है. अब कहा जाने लगा है कि जीएनएन ज्वाइन करने की ख्वाहिश रखने वाले इस चैनल से जुड़ने से पहले हजार बार सोंचे तब निर्णय लें. उल्लेखनीय है कि चिटफंडियों का यह चैनल लगातार विवादों में रहा है.






