: कोर्ट के जरिए लड़ाई लड़ रहे लोगों को फंसाने की साजिश रच रहे हैं हिंदुस्तानवाले! : मुंगेर। बिना रजिस्ट्रेशन के दैनिक हिन्दुस्तान के अवैध प्रकाशन और अवैध प्रकाशन के जरिए विज्ञापन मद में सरकारी खजाने से लगभग दो सौ करोड़ रुपये के लूट से संबंधित मामले में कोर्ट के आदेश की कापी पुलिस अधीक्षक के पास पहुंच गई है। मुंगेर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मनोज कुमार सिन्हा ने भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156सी. के तहत कोतवाली थाना के थाना-प्रभारी को पुलिस अनुसंधान शुरू करने से संबंधित न्यायिक आदेश दिया था। यह आदेश 12 नवंबर को न्यायालय कार्यालय से पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंच गया।
अब पुलिस अधीक्षक पी. कन्नन के आदेश के बाद न्यायालय का आदेश मुंगेर कोतवाली के थाना-प्रभारी के पास पहुंच जाएगा। तब थाना प्रभारी प्राथमिकी दर्ज कर इस सनसनीखेज 200 करोड़ रुपए के फर्जीवाड़ा में पुलिस अनुसंधान शुरू करेंगे। सूत्र बताते हैं कि प्राथमिकी दर्ज होने और पुलिस अनुसंधान शुरू होने और नामजद अभियुक्तों से पूछताछ शुरू होने में वक्त लग सकता है क्योंकि फर्जीवाड़ा में शामिल व्यक्ति प्रभावशाली हैं और खुद को बचाने के लिए हरसंभव कोशिश कर सकते हैं।
हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड के वरीय प्रमुख शोभना भरतिया, प्रकाशक अमित चोपड़ा, प्रधान संपादक शशि शेखर, पटना संस्करण के स्थानीय संपादक अकु श्रीवास्तव और भागलपुर संस्करण के उप-स्थानीय संपादक बिनोद बंधु इस मामले में नामजद अभियुक्त बनाए गए हैं।
दैनिक हिन्दुस्तान के अवैध प्रकाशन और अवैध प्रकाशन के माध्यम से केन्द्र और राज्य सरकारों से सरकारी विज्ञापन अवैध ढंग से मिलीभगत कर प्राप्त कर लेने और विज्ञापन प्रकाशन मद में करोड़ों और अरबों के इस घोटाले की जांच के दायरे में डीएवीपी (दृश्य एवं प्रचार निदेशालय, भारत सरकार), प्रेस पंजीयक कार्यालय (भारत सरकार), नई दिल्ली, सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय, पटना के अलावा बिहार, मुंगेर और भागलपुर के जिलाधिकारी के कार्यालय के साथ-साथ सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के मुंगेर और भागलपुर के कार्यालय भी आ सकते हैं, ऐसा पुलिस सूत्र बताते हैं।
इस बीच, बिहार की राजधानी पटना से मिल रही सूचना में बताया गया है कि मुंगेर न्यायालय के आदेश को ठंडे बस्ते में डालने के लिए दैनिक हिन्दुस्तान की संपादकीय और प्रशासकीय टीम सक्रिय हो गई है। राज्य मंत्रिमंडल के कुछ प्रमुख्य मंत्रियों और सरकार के प्रशासनिक और वरीय पुलिस पदाधिकारियों को मनाने और पुलिस अनुसंधान को तत्काल रोकने के लिए दैनिक हिन्दुस्तान रात-दिन एक कर दिया है।
दैनिक हिन्दुस्तान की सक्रियता की धमक मुंगेर मुख्यालय में भी देखने को मिल रही है। न्यायालय के आदेश के बाद नित्य भागलपुर और पटना से दैनिक हिन्दुस्तान के संपादकीय विभाग के वरीय व्यक्ति मुंगेर पहुंच रहे हैं और अखबार के फर्जीवाड़ा को उजागर करने में संलग्न व्यक्तियों, अधिवक्ताओं और पत्रकारों को फंसाने की साजिश कर रहे हैं।
उपर्युक्त परिस्थितियों में मुख्यमंत्री नीतिश कुमार और उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की न्यायप्रिय सरकार की आर्थिक अपराधियों को दबोचने और उन्हें सजा दिलाने की हाल की सरकारी घोषणा की परीक्षा इस मामले में हो जाने की उम्मीद बिहार की जनता को है। इतना तो तय है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार आर्थिक अपराधियों को दबोचने के लिए राज्यव्यापी अभियान चला रहे हैं, परन्तु आर्थिक अपराधियों के तार प्रशासन और पुलिस तंत्र से इस कदर जुड़े हैं कि मुख्यमंत्री के ऐतिहासिक कदम को बिहार में कमजोर किया जा रहा है।
अन्यथा, सामाजिक कार्यकर्ता मंटू शर्मा को दैनिक हिन्दुस्तान के फर्जीवाड़ा के मामलेमें न्यायालय के शरण में जाना नहीं पड़ता। मुंगेर के अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ने दैनिक हिन्दुस्तान के फर्जीवाड़ा से जुड़े समाचार के कतरन ई-मेल से बिहार के पुलिस महानिदेशक सहित तमाम वरीय पुलिस पदाधिकारियों को विगत पांच माह में भेजा, परन्तु सरकार के पुलिस महकमे के सभी वरीय अधिकारियों ने इस फर्जीवाड़ा में जांच करने का कोई आदेश जारी नहीं किया।
मुंगेर से काशी प्रसाद की रिपोर्ट





