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आवाजाही, कानाफूसी...

पचपन साल के कापी एडिटर शुक्ला जी की मजबूरियां

Mohammad Anas : और सिर्फ इन्ही वजहों से मैं फैसला नही कर पाता कि पत्रकार बनू या फिर एक्टिविस्ट, क्योंकि जीना ही मकसद नहीं मेरी ज़िंदगी का… कल देर रात की बात है, जब ज्यादातर अखबार के दफ्तर में पेज बनाने की जल्दी रहती है, कुछ इस भागमभाग में बाहर खाने पीने भी निकलते हैं, रात के ११ बजे हम भी मध्य प्रदेश की राजधानी में बैठे थे, प्रेस काम्प्लेक्स के करीब ही रहता हूँ, हिन्दी का एक पुराना अखबार है स्वदेश, इसमें एक ५५ साल के व्यक्ति कॉपी एडिटर हैं, नाम है रामसेवक शुक्ला, इलाहाबाद विवि से पढ़ाई, सामान्य सी कद काठी, जहाँ एक ओर लकदक और चमकदार कपड़ों में स्वदेश के एडिटर अपनी कुर्सी पर बैठे मिले वहीँ रामसेवक जी दसियों बरस पहले सिलवाए अपने शर्ट और पतलून में मेरे सामने बैठे थे.

Mohammad Anas : और सिर्फ इन्ही वजहों से मैं फैसला नही कर पाता कि पत्रकार बनू या फिर एक्टिविस्ट, क्योंकि जीना ही मकसद नहीं मेरी ज़िंदगी का… कल देर रात की बात है, जब ज्यादातर अखबार के दफ्तर में पेज बनाने की जल्दी रहती है, कुछ इस भागमभाग में बाहर खाने पीने भी निकलते हैं, रात के ११ बजे हम भी मध्य प्रदेश की राजधानी में बैठे थे, प्रेस काम्प्लेक्स के करीब ही रहता हूँ, हिन्दी का एक पुराना अखबार है स्वदेश, इसमें एक ५५ साल के व्यक्ति कॉपी एडिटर हैं, नाम है रामसेवक शुक्ला, इलाहाबाद विवि से पढ़ाई, सामान्य सी कद काठी, जहाँ एक ओर लकदक और चमकदार कपड़ों में स्वदेश के एडिटर अपनी कुर्सी पर बैठे मिले वहीँ रामसेवक जी दसियों बरस पहले सिलवाए अपने शर्ट और पतलून में मेरे सामने बैठे थे.

चर्चा होने लगी, कहने लगे ४ बेटियां हैं, तीन की किसी तरह शादी कर दी, एक बची है, इस वक्त इतना भी पैसा नहीं मिलता कि किसी को चाय पूछ लूँ पिलाने के लिए, जबकि आज से दस बारह साल पहले लोगों को खाना खिला देता था, मैंने देखा उनकी आँखों में एक तरफ स्वाभिमान था कि लोगों को खाना खिला देते थे तो दूसरी ओर अजीब सी असहायता, बेचैनी और तड़प, इतना बोलते वक्त उनकी आँखों में आंसू थे पर शायद वो आंसुओं से मुझे रूबरू नहीं करवाना चाहते थे इसलिए चुपके से चश्मे के किनारे से टपकते नमकीन बूंदों को साफ़ करने का असफल प्रयास ज़रूर उन्होंने किया, मैंने अपना हाथ उनके हाथ में रखा, और कहा 'बताइए मैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ' शुक्ला जी ने मुस्कुराते हुए कहा 'कुछ नही बेटा, बस ईमानदार रहना और दूसरों के लिए सीने में तड़प रखना, ताकि इंसान कहलाये जाओ तुम, क्योंकि जानवर भी अपने मरे हुए साथी की सुरक्षा उसे घेर कर करते हैं, कुछ तो उसे घसीट कर किनारे सुरक्षित स्थान पर पंहुचा देते हैं!

        Sarfaraz Hasan ईमानदार रहना और दूसरों के लिए सीने में तड़प रखना ,ताकि इंसान कहलाये जाओ तुम ,क्योकि जानवर भी अपने मरे हुए साथी कि सुरक्षा उसे घेर कर करते हैं ..
        Kash Hum Seekh Payen..
        Vo Reham Karega Aur Ram Ji Ko Zrur Itminan Milega..
        Aapke Paish-e-Andaaz Ko Salaam Maire Aziz…
 
        Lakhan Salvi aajkal activiston ko press club wale patrakar nahi maante hai
 
        Hafeez Kidwai jo naukri bhagdaur kr source sifarish karke pae usse ap kya ummid kr sakte hai
   
        Mahipal Sarswat ek bat kahun…waqt nikal lo… main bi kuch aisi hi uljhan me hoon…. ho skta h tumhare keemati waqt se mera bi kuch bhala ho jaye… bta dena…wait krunga
    
        Mohammad Anas महिपाल ,किस तरह का समय ,बताइए ,मैं तो अक्सर ही कुछ न कुछ करता रहता हूँ ,ये पोस्ट यहाँ डालने का मन नही था,पर सोचा लिख दूँ ,आप सब पढेंगे तो सोचेंगे ज़रूर ,और सोचने के बाद ही कुछ किया जा सकता है !
     
        Hafeez Kidwai anas sb likhne k bad kuch krna bhi chahiye tabhi uska maqsad pura ho sakta hai sirf chav lene k liye likhna parhna sahi nahi hai
      
        Mahipal Sarswat ye daur aksar zindgi me aa hi jata h…mera hal bi kuch aap jaisa hi h., so ok samjhe bhai,
       
        Mohammad Anas किदवई साब ,मैं आपको व्यक्तिगत रूप से नही जानता न तो आप मुझे ,यदि कोई मित्र आपका मुझे जानता हों तो उससे पहले जान ले ,उसके उपरान्त 'चाव' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करे,क्योकि फेस्बुकिया सलाहकारों और टिप्पणीकारों से एक लाठी का फासला लेकर चलता हूँ मैं (सप्रेम लीजियेगा,आपको ठेस पहुचने का कोई मकसद नही इसमें )
        
        Hafeez Kidwai anas sb aap bhi hame nahi jante wrna itna tikha jawab n dete balki gaur garte mera maqsad aap pr swaliya nishan lagana nahi tha balki ek qadam barhane ka tha jo ap nahi samajh pae……..afsos ke sath mafi
         
        Mohammad Anas आपसे असहमत (सम्मान के साथ )
        मुझे पता है आप मुझसे बहुत बड़े हैं ,बात यही खत्म करते हैं ,अन्यथा अभी आपको बहुत सारा अफ़सोस लिखना पड़ सकता है !
         
        Hafeez Kidwai waqai is tarah bat khatm hogi wo bhi ek zinda patrkar se to afsos to bahut hoga hi
         
        Mohammad Anas मुझे पता है ,आप न तो मुझे मन से ठेस पहुचना चाह रहे थे न ही मेरे लिखे को 'दिखावा' करार देना चाहते थे ,पर आपके शब्दों का चुनाव ही कुछ ऐसा था कि मुझे न चाहते हुए आपसे व्यक्तिगत होना पड़ा ,सार्वजानिक मंच पर मैं लोगों से बहस -मुबाहसे से बचता हूँ ,क्योकि इसका कोई दूरगामी प्रभाव नही दिखता अपितु सम्बन्ध ज़रूर खराब हों जाते हैं !
        बताता चालू कि ,यदि आप कभी इस तरह कि परेशानी झेले (खुदा न करे ) तो मुझे 09074777718 पर बताइयेगा ,मैं नंगे पाँव लखनऊ आ जाऊंगा ,और लडूंगा ,तब तक,जब तक आपके साथ न्याय नही होता !(अब कुछ लोग मुझे मुर्ख कहेंगे इस बात पर )
         
        Hafeez Kidwai apki imandari par shak karna mere bas k bat nahi …………..hamko apke status pasand ate hai isliye kuch kah diya…………warna hamara hargiz irada ni tha ….jo mai sochta hu wahi apke post m hoti hai to zahir hai man me apke bhi kafi kuch hoga jaisa hamne likha hai
         
        Mahipal Sarswat bhai manthan kijiye or ho sake to mujhe bi apne manthan me shamil kr lena,.
         
        Mahipal Sarswat आपसे kuch apna sa लगता है… भाई… bas isiliye milne ki iccha h…. sochta hun jab milenge to kafi baten bi ho jayegi…
         
        Mahipal Sarswat baki sab aap jane…
         
        Piyush Pandey Md. anas ji aapko to me nahi janta par ek patrkar k nate aaka fb friend hun. aapki manavta bali baten dil me chot kar rahi hain. kabhi mandla agman ho to darsan jarur dena.

माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय में पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे मोहम्मद अनस के फेसबुक वॉल से साभार.

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