शिमला प्रेस क्लब में 13 अक्टूबर 2009 के बाद से सालाना चुनाव नहीं हुए हैं. प्रेस क्लब के अध्यक्ष धनंजय शर्मा लगभग ढाई सालों से प्रेस क्लब के अध्यक्ष पद पर काबिज हैं. नियमानुसार 13 अक्टूबर 2010 से पहले चुनाव करा लिए जाने चाहिए थे, परन्तु ऐसा नहीं हो पाया. अब प्रेस क्लब में व्याप्त गड़बड़ी एवं अनियमितता को दूर करने के लिए हिमाचल के वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रेस क्लब के पांच बार अध्यक्ष रह चुके कृष्णभानु ने धनंजय शर्मा को जल्द से जल्द चुनाव अधिकारी नियुक्त कर इस्तीफा देने की मांग की है.
कृष्णभानु ने धनंजय शर्मा को चेतावनी भी दी है कि ऐसा नहीं करने की दशा में कानूनी कार्रवाई के लिए भी तैयार रहें. नीचे कृष्णभानु द्वारा प्रेस क्लब के अध्यक्ष धनंजय शर्मा को लिखा गया पत्र.
सेवा में,
श्री धनंजय शर्मा
प्रेस क्लब ऑफ शिमला
पदमदेव कॉम्लेक्स, दि रिज
शिमला (हि.प्र.)
प्रिय धनंजय,
यह सभी जानते हैं कि प्रेस क्लब ऑफ शिमला के सालाना चुनाव 13 अक्तूबर 2009 को विधिवत तौर पर सम्पन्न हुए थे। क्लब की उपविधि के अनुसार यह चुनाव एक वर्ष के लिए कराए गए थे। इस प्रकार नई प्रबंध कमेटी के लिए 13 अक्तूबर 2010 से पूर्व चुनाव कराए जाने चाहिए थे, जो आजतक नहीं कराए गए। यह भी सभी जानते हैं कि अध्यक्ष संस्था का मुखिया होता है और यदि संस्था में किसी भी प्रकार की अनैतिक व गैर संवैधानिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं तो उसकी पूरी जिम्मेदारी अध्यक्ष की ही होती है। संस्था की उप विधि व दि हिमाचल प्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 2006 के उल्लंघन की तमाम जिम्मेदारी भी संस्था के मुखिया की ही होती है। याद दिला दूँ कि प्रेस क्लब ऑफ शिमला इसी एक्ट के तहत पंजीकृत है।
प्रेस क्लब शिमला के अध्यक्ष के तौर पर शिमला के पत्रकारिता जगत में आप पर निम्नलिखित आरोप चर्चित हैं :-
1. आप प्रेस क्लब के सालाना चुनाव इसलिए नहीं करा रहे हैं, क्योंकि क्लब पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। यही कारण है कि आप लगभग ढाई साल से प्रेस क्लब पर अवैध कब्जा जमाए बैठे हैं, जबकि प्रबंध कमेटी के चुनाव 13 अक्तूबर 2010 से पहले हो जाने चाहिए थे।
2. प्रेस क्लब की प्रबंध कमेटी ने कई बार बैठक में क्लब का लाखों का उधार न चुकाने वाले सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्णय लिया, लेकिन आपने इस निर्णय पर अमल नहीं होने दिया, क्योंकि क्लब के कई उधारखोर सदस्य आपके समर्थक व मित्र हैं।
3. इसका नतीजा यह निकला कि आज इस छोटे से क्लब की उधारी चार लाख रुपए पार करने लगी है। सबसे ज्यादा उधार आपके एक ऐसे मित्र का है, जो क्लब का साधारण सदस्य भी नहीं है।
4. क्लब की प्रबंध कमेटी के तीन सदस्य भी कई महीनों से क्लब की देनदारियां नहीं चुका रहे हैं और क्लब के हजारों रुपए दबाए बैठे हैं।
5. आपने अपने ढाई साल के कार्यकाल में कुछ ऐसे सदस्य भी भर्ती कर लिए हैं, जो न तो क्लब की उपविधि के मुताबिक और न ही दि हिमाचल प्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 2006 के मुताबिक ‘नियमानुसार’ हैं।
6. यही कारण है कि आपने लगभग ढाई साल में एक बार भी प्रेस क्लब का सालाना साधारण अधिवेशन नहीं बुलाया। आप जानते थे कि साधारण अधिवेशन में आप द्वारा नियमों को दरकिनार कर बनाए गए सदस्यों की सदस्यता को मंजूरी नहीं मिलेगी। अतः जब तक साधारण अधिवेशन में आप द्वारा बनाए गए सदस्यों को अप्रूवल नहीं मिलती, वे भावी चुनावों में वोट के हकदार नहीं माने जाएंगे।
7. दि हिमाचल प्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 2006 के अनुच्छेद (20) के अनुसार प्रत्येक सोसायटी, जो इस एक्ट के तहत पंजीकृत है, को वित्तीय वर्ष में कम से कम एक बार सालाना साधारण अधिवेशन बुलाना आवश्यक है। इस अधिवेशन में सदस्यों को आय और व्यय के बारे में जानकारी देना लाजिमि है।
8. आप पर आरोप है कि वित्तीय व अन्य अनियमितताओं के कारण आप न तो साधारण अधिवेशन बुला रहे हैं और न ही सालाना चुनाव कराने में कोई दिलचस्पी दिखा रहे हैं। आप ढाई साल से कुंडली मारकर क्लब में बैठे हैं और प्रा. लि. कंपनी की तरह इसे चला रहे हैं।
9. क्लब में आपका व्यक्तिगत आचरण भी आपत्तिजनक रहा है। आप कभी मुक्का मारकर क्लब के शीशे तोड़ देते हैं तो कभी किसी सदस्य से पी-पाकर उलझ पड़ते हैं। इससे भी प्रतीत होता है कि आप इस संस्था को जेबी संस्था समझ बैठे हैं। आप पीएं……….. पीते रहें…………. गिलास से पिएं या बाल्टी पी जाएं, लेकिन क्लब की सम्पति को नुकसान न पहुंचाएं।
मैं, प्रेस क्लब शिमला का तीन बार मुख्य महासचिव और लगातार पांच बार अध्यक्ष रह चुका हूँ। मैंने अथवा अन्य किसी भी प्रधान ने कभी क्लब पर कब्जा करने का यत्न नहीं किया और समय पर सालाना चुनाव कराता रहा। हमने इस क्लब को खून से सींचा है। इसे आपकी अगुवाई में किसी भी कीमत पर बरबाद नहीं होने देंगे। आपकी समयावधि 13 अक्तूबर 2010 को समाप्त हो गई है। इसके बाद क्लब में जो भी ट्रांजक्शन हो रही है, वह अवैध और गैरकानूनी है। आपने 13 अक्तूबर 2010 के बाद पद पर बने रहने की मंजूरी साधारण अधिवेशन से नहीं ली है, इसलिए निश्चित तारीख के बाद क्लब में आपकी प्रत्येक गतिविधि कानून सम्मत नहीं है। 13 अक्तूबर 2010 के बाद प्रबंध कमेटी की बैठकें भी अवैध ही मानी जाएगी।
अतः आपको कहा जाता है कि चुनाव/निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति के बाद तुरन्त इस्तीफा दें, अन्यथा अपराधिक व कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें। उप विधि व एक्ट में आपको बर्खास्त/पदच्युत करने के स्पष्ट प्रावधान उपलब्ध हैं। जो आरोप आप पर लगाए गए हैं, क्लब की भावी प्रबंध कमेटी उस बारे फैसला लेगी। धन्यवाद।
भवदीय
(कृष्णभानु)
पूर्व अध्यक्ष
प्रेस क्लब ऑफ शिमला
प्रतिलिपिः-
1. पंजीयक फर्मस एवं सोसायटी जिला शिमला, शिमला-171001।
2. मुख्य महासचिव प्रेस क्लब ऑफ शिमला (हि.प्र.)।
3. प्रबंध कमेटी के सभी माननीय सदस्य।
4. सभी दैनिक समाचार पत्रों के शिमला स्थित संपादक अथवा ब्यूरो प्रभारियों के ध्यानार्थ। उनसे अनुरोध है कि यह सब हालांकि प्रकाशन हेतु नहीं है। आप इस बारे में अपनी विवेकानुसार निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं।
5. क्लब के सभी वरिष्ठतम् एवम् संस्थापक सदस्यों को सूचनार्थ।





