अलीगढ़ से सूचना है कि यहां पर अखबार वितरकों का हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रहा. कोई अखबार नहीं बंट रहा है. हिंदुस्तान, अमर उजाला, दैनिक जागरण जैसे अखबारों के प्रसार विभाग के लोगों ने खुद स्टाल लगाना पड़ा. संभावना है कि आज कोई हल निकल आएगा. तीनों बड़े अखबारों के मैनेजरों की हॉकरों के साथ मीटिंग चल रही है. इस मीटिंग में ही निर्णय होगा कि हॉकरों का हड़ताल जारी रहेगा या खतम हो जाएगा.
बताया जा रहा है कि जब हिंदुस्तान अखबार अलीगढ़ में लांच हो रहा था तब प्रति अखबार हाकरों को कमीशन 75 पैसे मिलते थे. हिंदुस्तान ने लांचिंग के बाद कमीशन प्रति अखबार एक रुपये कर दिया. यह देख अन्य अखबारों ने भी कमीशन प्रति कापी एक रुपये कर दिया. अब सारे अखबारों ने मिलकर कमीशन को अचानक घटाकर 75 पैसे कर दिया है. बढ़ती महंगाई में इस तरह का छल किए जाने से अखबार वितरक नाराज हो गए और अखबार न बांटने की घोषणा कर दी. मजबूरी में प्रबंधन ने तीन दिन में खुद अखबार बेचने की कोशिश कर रहा है. पर अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है.
हाकरों को मनोबल तोड़ने के लिए अखबार प्रबंधन अपने पत्रकारों व अन्य कर्मियों को सेंटर पर भेज रहा है ताकि पुलिस बल के सहयोग से हाकरों पर दबाव बनाया जा सके. कल रात सेंटरों पर पुलिस बुलवाकर हाकरों को धमकाया गया. अखबार प्रबंधक भी हड़ताल के चलते अखबार की बहुत कम कापियां प्रकाशित कर रहे हैं. आज भी सेंटरों पर तनाव की स्थिति बनी रही. बाद में तीनों अखबारों के मैनेजरों ने इस मामले को लेकर हॉकरों के साथ एक मीटिंग रखी है.
अमर उजाला कार्यालय में बारह बजे से बुलाई गई मीटिंग में हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण के सर्कुलेशन मैनेजर भी भाग ले रहे हैं. खबर दिए जाने तक हॉकरों के साथ मीटिंग चल रही थी. हॉकर अपना कमिशन पूर्व की तरह एक रुपये करने की मांग पर डंटे हुए हैं. सूत्रों का कहना है कि मैनेजर उन्हें अपनी बात समझाने की कोशिश कर रहे हैं. अब देखना है कि इस मीटिंग के बाद हड़ताल खतम हो जाती है या आगे भी जारी रहती है.





