लखनऊ : हिसाम सिद्दीकी और हेमंत तिवारी के बीच चल रहे झगड़े ने सचिवालय और विधानसभा की कवरेज कर रहे पत्रकारों के लिए सारी व्यवस्थाएं ध्वस्त करा दिया है। झगड़ा दो साल पहले संवाददाता समिति के अध्यक्ष पद पर हिसाम के जीतने और हेमंत तिवारी की हार से शुरू हुआ। हेमंत अब इस समिति पर कब्जाने की फिराक में हैं, इसलिए समिति की मौजूदा कार्यकारिणी को वे अमान्य बताए हुए हैं। मुख्यमंत्री से लेकर संतरी तक हेमंत ने दर्जनों खत भेजे हैं कि समिति अब अस्तित्व में नहीं है। हेमंत के लोग चाहते हैं कि हिसाम के गुट को तोड़ दिया जाए। लेकिन हेमंत की इस कवायद का खामियाजा समिति के उन सदस्यों पर भारी पड़ गया है जिनके दम पर हेमंत अध्यक्ष लड़ने की तैयारी में हैं।
ताजा मामला है विधानसभा कार्यवाही के कवरेज का। समिति के खिलाफ पत्र देख कर अफसरों ने मनमानी शुरू कर दी है। व्यवस्था के चलते मुख्यालय पर सूचना विभाग से मान्यताप्राप्त संवाददाताओं की सूची विधानसभा और विधानपरिषद सचिवालय को भेजी जाती रही है और उसी सूची पर प्रवेश पास जारी किये जाते रहे हैं। लेकिन ताजा हालातों के चलते अफसरों ने मनमर्जी शुरू कर दी। पास को लेकर अब इन मठाधीशों के चलते के साथ ही साथ नये क्षत्रप और नये तुर्क बन गये हैं, जो अपने लोगों को पास दिलाकर उपकृत कराने में जुटे हैं। पत्रकारों को यह पास हासिल करने के लिए अब प्रचलित व्यवस्था के बजाय अब गुटों के लोगों की सिफारिशें करानी पड़ रही हैं। एक न्यूज एजेंसी के पत्रकार आसिफ अंसारी के साथ नोंकझोंक इसी के चलते हुई। पूछने पर अंसारी कहना है कि विधानसभा सचिव ने जवाब दिया था कि अरविंद सिंह विष्ट की सिफारिश होने पर ही उन्हें पास मिलेगा। विकल्प के तौर पर हेमंत तिवारी की सिफारिश मानी जाएगी।
बताते हैं कि यह करतूत है हेमंत तिवारी की। जानकारी के मुताबिक हेमंत तिवारी ने मंत्री से संतरी तक पास दर्जनों चिट्ठियां भेजी हैं कि चूंकि उप्र मान्यताप्राप्त संवाददाता समिति की कार्यकारिणी अवैध हो चुकी है, इसलिए इस समिति के पदाधिकारियों की कथित कार्रवाईयां नाजायज हैं। बताते हैं कि गुट की पैरवी के चलते ही अफसरों ने विधानसभा की कार्रवाई पर पास जारी करने की व्यवस्था को ही बदल दिया और सूचना विभाग द्वारा जारी की गयी पास जारी को ही उलट-पलट कर दिया। अब जिस भी संवाददाता को पास चाहिए उसे सूची के बजाय अफसरों के पास पहुंचना पडे़गा और इसके लिए कथित इन मठाधीशों की सिफारिश चाहिए।
इस बाबत बात करने के लिए हेमंत से जितने बार कोशिश की गई, उतने बार उन्होंने फोन ही नहीं उठाया गया। हिसाम सिद्दीकी का कहना है कि जो लोग भी पहुंचे, उन सभी को पास दिलाने की कोशिश करा दी गयी है। हालांकि हिसाम इस बात का जवाब नहीं पा रहे हैं कि पास के लिए अब अफसरों की सिफारिश का क्या औचित्य है। वैसे हसीम सिद्दीकी का कहना है कि परम्परा को हेमंत ने ध्वस्त कराया है। एक वरिष्ठ का कहना है कि हेमंत ने ऐसे से चालीस से ज्यादा पत्र लिखे हैं, जिसके बाद से ही अफसरों ने परम्परा तोड़ते हुए मनमानी शुरू कर दी। इस बारे में बातचीत के लिए विधानसभा के प्रमुख सचिव से बहुत प्रयासों के बावजूद सम्पर्क नहीं
हो पाया। पास को चल रहे विवाद पर वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्र मानते हैं कि जो कुछ भी हो रहा है, वह उचित नहीं है। बहरहाल, गुटों में बंट चुकी उप्र मान्यताप्राप्त संवाददाता समिति के स्वयंभू नेता समिति की चन्दी-चिन्दी बिखेरने पर तो आमादा ही हैं।
लखनऊ से कुमार सौवीर की रिपोर्ट. कुमार सौवीर यूपी के जाने माने पत्रकार हैं. दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, हिंदुस्तान, महुआ, एसटीवी समेत कई अखबारों और चैनलों में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं. सौवीर अपने बेबाक बयानों और दमदार लेखन के लिए जाने जाते हैं. उनसे संपर्क [email protected] और 09415302520 के जरिए किया जा सकता है.





