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अंबानी-बिड़ला के बाद कई और उद्योगपति मीडिया में निवेश को तैयार

महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के मनोनीत अध्यक्ष आनंद महिंद्रा समय बरबाद करने में बिल्कुल यकीन नहीं रखते हैं। मीडिया में रणनीतिक गठजोड़ों के लिए भारतीय कारोबारी जगत के उत्साह पर महिंद्रा कहते हैं, 'आप बढ़ती अर्थव्यवस्था के बीच मीडिया को दरकिनार नहीं कर सकते हैं।' उनका मानना है कि मीडिया की परिभाषा लगातार बदल रही है और ऐसे में मुनाफा कमाना है तो इस उद्योग की बेहतर समझ के साथ आपको यहां अपनी पकड़ बनानी होगी। उन्होंने कहा, 'हमारी कंपनी मुंबई मंत्रा खास तरह के कंटेंट तैयार करने की संभावनाएं तलाश रही है और ऐसा ढांचे बनाने की कोशिश में है जो मीडिया और जीवनशैली से जुड़ा हो।'

महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के मनोनीत अध्यक्ष आनंद महिंद्रा समय बरबाद करने में बिल्कुल यकीन नहीं रखते हैं। मीडिया में रणनीतिक गठजोड़ों के लिए भारतीय कारोबारी जगत के उत्साह पर महिंद्रा कहते हैं, 'आप बढ़ती अर्थव्यवस्था के बीच मीडिया को दरकिनार नहीं कर सकते हैं।' उनका मानना है कि मीडिया की परिभाषा लगातार बदल रही है और ऐसे में मुनाफा कमाना है तो इस उद्योग की बेहतर समझ के साथ आपको यहां अपनी पकड़ बनानी होगी। उन्होंने कहा, 'हमारी कंपनी मुंबई मंत्रा खास तरह के कंटेंट तैयार करने की संभावनाएं तलाश रही है और ऐसा ढांचे बनाने की कोशिश में है जो मीडिया और जीवनशैली से जुड़ा हो।'

आरपी संजीव गोयनका समूह के अध्यक्ष संजीव गोयनका के पास पहले से ही ओपन पत्रिका है और वह मीडिया क्षेत्र में और आक्रामक निवेश की संभावनाएं तलाश रहे हैं। गोयनका ने तो इस पर कोई टिप्पणी नहीं की मगर सूत्रों ने पुष्टि की है कि उन्हें इंडिया टुडे समूह के लिविंग मीडिया इंडिया में खासी दिलचस्पी थी। हालांकि वह कामयाब नहीं हुए। आदित्य बिड़ला समूह के अध्यक्ष कुमार मंगलम बिड़ला ने यह बोली हासिल की। बिड़ला का मीडिया जगत में कदम रखने का यह दूसरा प्रयास था। दो साल पहले यूटीवी के संस्थापक और प्रवर्तक रॉनी स्क्रूवाला ने उन्हें ब्लूमबर्ग-यूटीवी को खरीदने की पेशकश की थी। लेकिन कीमत और दूसरे मामलों की वजह से यह सौदा अटक गया था और अनिल अंबानी ने इस सौदे को अपनी झोली में डाल लिया। मीडिया क्षेत्र में निवेश के पीछे अपनी रणनीति का जिक्र करते हुए बिड़ला ने कहा, 'निवेश के लिहाज से मीडिया उभरता क्षेत्र है। लिविंग मीडिया ने विकास के लिहाज से श्रेष्ठ मौका उपलब्ध कराया है।' बिड़ला, अंबानी और गोयनका के अलावा सुनील मित्तल, टाटा, विजय माल्या और अभय ओसवाल- सभी की नजर मीडिया पर है। मीडिया पंडितों का मानना है कि देर-सबेर अदाणी समूह भी इस क्षेत्र में आ सकता है।

सूत्रों के मुताबिक पिछले साल कुछ लोगों ने टीवी चैनलों में हिस्सेदारी खरीदने के लिए गौतम अदाणी से संपर्क किया था। इस साल मुंबई के एक औद्योगिक समूह के वरिष्ठ अधिकारियों ने एनडीटीवी के कारोबारी चैनल प्रॉफिट के लिए रणनीतिक इक्विटी साझेदार तलाशने के उद्देश्य से प्रणय रॉय से संपर्क किया था। हालांकि उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा था। टाटा समूह ने भले ही यह साफ किया हो कि वह खबरिया मीडिया में निवेश नहीं करना चाहता है, मगर समूह के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि समूह की मीडिया से जुड़े बुनियादी ढांचें में दिलचस्पी है। निश्चित ही इस साल की सबसे बड़ी खबर मुकेश अंबानी का दांव रहा जिन्होंने इनाडु (ईटीवी) के रामोजी राव और नेटवर्क 18 के राघव बहल के साथ गठजोड़ किया है। साभार : बीएस

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