गोरखपुर : कहते हैं राष्ट्रीय सहारा में कुछ भी संभव है. अब देखिये दूसरे संस्थानों में छंटनी का दौर चल रहा है, तमाम अच्छे पत्रकार खाली हो रहे हैं, लेकिन राष्ट्रीय सहारा को योग्य पत्रकार ढूंढे नहीं मिल रहे हैं. महाराजगंज के ब्यूरो आफिस में अम्बरीश पाण्डेय को बतौर पत्रकार रखा गया है. और यह खबर सुनने वाला हर कोई आश्चर्य कर रहा है. अम्बरीश पाण्डेय मूल रूप से अजय श्रीवास्तव के दारू की भट्ठी के मुंशी हैं. वह अजय श्रीवास्तव के यहाँ ही रहते हैं. जबसे राष्ट्रीय सहारा में पत्रकारिता करने लगे भट्ठी पर न बैठ कर अजय बाबू के घर पर ही शराब की बिक्री का हिसाब किताब करते हैं. सहारा के दफ्तर में कभी जाते हैं तो कभी नहीं भी जाते है. ब्यूरो प्रभारी की कृपा से नौकरी चल रही है.
बुराई ये भी नहीं है कि वे दारू के भट्टी के मुंशी हैं तो पत्रकार नहीं हो सकते. पर पत्रकार बनने के बाद भी ये काम जारी रखना लोगों को खटक रहा है. महाराजगंज के नागरिक जबसे यह सुने हैं कि अम्बरीश पाण्डेय पत्रकार हो गए, तो चटखारे लेकर कहते हैं कि देशी के साथ खबर का तड़का मजेदार होता होगा. अन्य अखबारों में योग्य पत्रकारों के चलते ही उनका अखबार निरंतर आगे बढ़ रहा है. दैनिक जागरण के महेंद्र तिवारी, अमर उजाला के धीरज पाण्डेय, हिंदुस्तान के अजयजी की टीम के सामने मुंशीजी कितना टिकेंगे, यह तो वक्त बताएगा. लेकिन जिन लोगों ने उन्हें पत्रकारिता का तमगा दिया उन लोगों को तो जाँच परख करनी ही चाहिए थी. इस संदर्भ में जब अम्बरीश पाण्डेय से बात की गई तो उन्होंने राष्ट्रीय सहारा ज्वाइन करने की पुष्टि की साथ ही अजय श्रीवास्तव के यहां मुंशी का काम जारी रखने की बात भी कही.





