प्रिंट मीडिया में किस प्रकार कॉपी-पेस्ट सिस्टम हावी होता जा रहा है, इसका अंदाजा पत्रिका के इंदौर संस्करण को देखकर लगाया जा सकता है. इस संस्करण में चोरी करके खबरें छप रही हैं. नई बानगी है पांच जून को प्रकाशित इंदौर संस्कर के सप्लीमेंट जस्ट इंदौर में प्रकाशित एक खबर. इस खबर ने चोरी करने की बेशर्मी की सारी हदें पार कर दी हैं. जस्ट इंदौर में पेज नम्बर 19 पर प्रकाशित खबर 'बार+बीच की दीवानी दिल्ली' को नवभारत टाइम्स से उठाया गया है.
यह खबर नवभारत टाइम्स के वेबसाइट पर कई दिन पहले ही प्रकाशित हो चुकी है. इसमें सबसे बुरी बात यह है कि चोरी की गई खबर में एकाध शब्द बदलने की भी कोशिश नहीं की गई है. पूरी खबर शब्दश: प्रकाशित कर दी गई है. अब पत्रिका ने चोरी की है तो डंके की चोट पर की है, पर मेरी गुजारिश है कि चोरी किया तो किया पर कुछ तो संपादित कर लेते पत्रिका वालों ताकि लगता कि यह खबर तुम्हारी है. यहां तक हेडिंग बदलने की भी जरूरत नहीं समझी गई. वाह रे पत्रिका वालों. चोरी हो तो ऐसी.

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एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.





