हिंदुस्तान, पटना से खबर है कि वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार का नाता टूट गया है. प्रबंधन ने उनका कांट्रैक्ट रिन्यूवल नहीं किया. तीन साल पहले अजय कुमार दुबारा हिंदुस्तान ज्वाइन किया था. 31 मई हिंदुस्तान में उनका आखिरी कार्य दिवस साबित हुआ. अजय कुमार ने अपने करियर की शुरुआत 1990 में प्रभात खबर, पटना के साथ की थी. एक दशक तक वे इस अखबार से जुड़े रहे. सन 2000 में हिंदुस्तान में सीनियर रिपोर्टर बनकर गए. प्रबंधन ने इसके बाद उन्हें हिंदुस्तान, रांची का ब्यूरोचीफ बना दिया.
वे सन 2005 में प्रभात खबर वापस लौट आए. उन्हें पटना का स्थानीय संपादक बनाया गया. इसके बाद ये एक बार फिर तीन साल के कांट्रैक्ट पर 2009 में हिंदुस्तान चले गए. इन्हें हिंदुस्तान, जमशेदपुर का स्थानीय संपादक बनाया गया. हालांकि यहां पर इनके साथ कुछ विवाद भी जुड़े. 2010 में प्रबंधन ने इन्हें वापस पटना बुला लिया. तब से ये पटना में ही अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे. अजय कुमार हिंदुस्तान के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्टों को पूरा किया, जिसमें बिहार के सौ साल का संकल्प भी शामिल है. इन्हें 2003 में पटना पुस्तक मेला में वरिष्ठ पत्रकार प्रभाष जोशी ने एसपी सिंह पत्रकारिता पुरस्कार से भी सम्मानित किया था.






