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मीडिया में धाक जमाने के बाद राजनीति में चमक बिखेरने को तैयार गणेश तिवारी

: कानपुर से लड़ रहे हैं मेयर का चुनाव : बह रही है बदलाव की बयार : राजनीतिक दलों से उबे लोगों के लिए गणेश उम्‍मीद की किरण बने : कानपुर में दैनिक जागरण, अमर उजाला तथा हिंदुस्‍तान में वरिष्‍ठ पदों पर रहे गणेश तिवारी अ‍ब राजनीति में कदम रखने जा रहे हैं. पिछले कई वर्षों से परिवर्तन संस्‍था के सहयोग से कानपुर के लोगों की सेवा करने वाले वरिष्‍ठ मीडिया पर्सनालिटी गणेश तिवारी का राजनीति में कदम रखने की तैयारी करना चर्चा का विषय बना हुआ है. पिछले चार वर्षों वे जिस तरीके से निस्‍वार्थ भाव से जनसेवा में जुटे हुए हैं, उसको देखते हुए माना जा रहा है कि वे जीत सकने की स्थिति में पहुंच सकते हैं. गणेश तिवारी कानपुर से मेयर का चुनाव लड़ रहे हैं. उनका राजनीति में कदम रखने से कानपुर का बुद्धिजीवी तबका पूरी तरह से उत्‍साहित है.

: कानपुर से लड़ रहे हैं मेयर का चुनाव : बह रही है बदलाव की बयार : राजनीतिक दलों से उबे लोगों के लिए गणेश उम्‍मीद की किरण बने : कानपुर में दैनिक जागरण, अमर उजाला तथा हिंदुस्‍तान में वरिष्‍ठ पदों पर रहे गणेश तिवारी अ‍ब राजनीति में कदम रखने जा रहे हैं. पिछले कई वर्षों से परिवर्तन संस्‍था के सहयोग से कानपुर के लोगों की सेवा करने वाले वरिष्‍ठ मीडिया पर्सनालिटी गणेश तिवारी का राजनीति में कदम रखने की तैयारी करना चर्चा का विषय बना हुआ है. पिछले चार वर्षों वे जिस तरीके से निस्‍वार्थ भाव से जनसेवा में जुटे हुए हैं, उसको देखते हुए माना जा रहा है कि वे जीत सकने की स्थिति में पहुंच सकते हैं. गणेश तिवारी कानपुर से मेयर का चुनाव लड़ रहे हैं. उनका राजनीति में कदम रखने से कानपुर का बुद्धिजीवी तबका पूरी तरह से उत्‍साहित है.

गणेश तिवारी का मेयर पद के लिए चुनाव लड़ना बदलाव का सिम्‍बल माना जा रहा है. पिछले काफी समय से राजनीति में आई गंदगी और अच्‍छे लोगों का राजनीति से दूर होने का परिणाम जनता लम्‍बे समय से भुगत रही है. पढ़े-लिखे तथा मीडिया संस्‍थानों में वरिष्‍ठ पद पर रहते हुए अच्‍छा खासा जीवन शैली जीने वाले गणेश तिवारी का राजनीति में आने का हर तरफ स्‍वागत हो रहा है. इसे अब एक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. उन्‍होंने कानपुर में परिवर्तन संस्‍था के सहारे एक मुहिम चलाई जो कानपुर में कई बदलावों में सहायक सिद्ध हुआ. वे अन्‍ना के आंदोलनों को भी कानपुर में लम्‍बे अरसे से चलाते रहे हैं. कानपुर में भ्रष्‍टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ रखी है. 

बीस हजार सदस्‍यों वाली संस्‍था परिवर्तन के बैनर की शुरुआत चार साल पहले हुई थी. मन में सेवा भाव रखने वाले गणेश तिवारी

गणेश तिवारी

ने अपने साथियों के साथ कानपुर के गंदे इलाकों में गए. किसी से कोई शिकवा-शिकायत किए बिना खुद अपनी टीम के साथ कूड़े उठाना शुरू किया. इसका परिणाम रहा कि स्‍थानीय लोगों में जागरूकता तो आई ही साथ ही नगर निगम के सुस्‍त पड़े अधिकारी भी शर्म के मारे सक्रिय हुए और नगर की सफाई व्‍यवस्‍था में एक बड़ा बदलाव आया. इसके बाद इन लोगों पार्कों से गंदगियां हटाईं. पेड़ लगाए. जगह-जगह प्‍याउ लगवाए. जो काम जनहित में जरूरी था तथा बिना किसी बड़ी सरकारी सहायता लिए संभव था, वे सारे काम इन्‍होंने परिवर्तन संस्‍था के बैनर तले किया.

गणेश तिवारी अपने सहयोगियों के दबाव के बाद मेयर का चुनाव लड़ने को तैयार हुए. सहयोगियों ने दबाव दिया कि जब आप सिस्‍टम में ना रहते हुए भी कानपुर में इतने बदलावों को अंजाम दिया तो आप सिस्‍टम में रहकर तो और भी अच्‍छा कर सकते हैं. अपने परिवर्तन संस्‍था से जुड़े बीस हजार सहयोगियों के दबाव एवं हर संभव मदद के आश्‍वासन के बाद गणेश तिवारी अब मेयर के चुनाव में कूद पड़े हैं. माना जा रहा है इनका निस्‍वार्थ भाव से काम करना इनके लिए सोने पर सुहागा साबित हो रहा है. ज्‍यादातर लोग इनके समर्थन में आगे आ रहे हैं. स्‍थानीय लोग कह भी रहे हैं कि अगर इस तरह के ईमानदार तथा कर्मठ लोग राजनीति में आगे आएं तो बदलाव तो खुद ब खुद होने लगेगा.

आइए अब जानते हैं गणेश तिवारी के बारे में. गणेश तिवारी दैनिक हिंदुस्तान, दिल्ली में नेशनल हेड (इवेंट) के पद से इस्‍तीफा देकर इन दिनों समाज सेवा तथा शिक्षा से जुड़े हुए हैं. पिछले 24 सालों से मीडिया में सक्रिय गणेश तिवारी ने अपने करियर की शुरुआत दैनिक जागरण, कानपुर से की थी. बाद में वे स्वतंत्र भारत, कानपुर, द पायनियर, कानपुर, हिंदुस्तान, कानपुर में रहे. बीच में उन्होंने आठ माह के लिए दैनिक भास्कर के साथ उदयपुर में जनरल मैनेजर के रूप में काम किया. कानपुर में घर में बूढ़ी मां की देखरेख के चलते उन्हें उदयपुर छोड़ दिया. तब उन्होंने जनरल मैनेजर की तुलना में छोटे पद सीनियर मैनेजर को स्वीकारा और अमर उजाला, कानपुर में ज्वाइन किया. वे अपने काम के बल पर अमर उजाला, कानपुर में हेड के पद पर पहुंचे. इसके बाद कानपुर में हिंदुस्‍तान के जीएम बने. फिर दिल्‍ली में इवेंट के नेशनल हेड बना दिए गए. 

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