प्रिय डा. मनोज, नमस्कार. मैं आपके बारे में केवल इतना जानता हूं कि आप आईपीएस बनने से पहले एमबीबीएस डाक्टर हुआ करते थे. मानव शरीर को दुरुस्त करने के पेशे से आगे बढ़ते हुए आपने मनुष्यों के समाज को ठीक करने के पेशे को अपनाया और इसी प्रक्रिया में आप एक जिले के सबसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के तौर पर तैनात हैं. मैं आपको यह पत्र एक शिकायत करने के मकसद से लिख रहा हूं.
आपने मेरे चचेरे भाई रविकांत सिंह पर जो गैंगस्टर एक्ट लगाया है, उसने मुझे निजी तौर पर बहुत दुखी और आहत किया है. मुझे नहीं पता कि आपसे शिकायत, अनुरोध, मांग किए जाने के बावजूद आपने अपने स्तर पर रविकांत सिंह के बैकग्राउंड के बारे में कोई जांच पड़ताल कराई या नहीं, लेकिन इतना पता है कि स्थानीय थानेदार ने जो आपको रिपोर्ट भेजी है, उसे पूरी तरह सच मानकर आपने एक निर्दोष युवक को गैंगस्टर बना डाला. राजकाज में कई निर्दोषों की जान जाती है, कई निर्दोष पिसते हैं, कई निर्दोष फंसते हैं… यह सुना था लेकिन लोकतंत्र में मेरी आंखों के सामने घटनाक्रम कुछ ऐसे घूमेगा कि मैं खुद को भारत जैसे लाकतांत्रिक देश की बजाय किसी तालिबानी समाज का हिस्सा बना पाउंगा, मुझे उम्मीद न थी.
सौ अपराधी भले छूट जाएं पर एक निर्दोष के साथ अन्याय न हो, यह फंडा है अपने देश की कानून व न्याय व्यवस्था के लिए. गांधी-अंबेडकर से लेकर आज के दौर के भी दार्शनिक यही कहते हैं कि किसी निर्दोष पर अत्याचार नहीं किया जाना चाहिए. और, आप जैसे वरिष्ठ अधिकारियों का कर्तव्य भी यही है कि वह अपने अधीनस्थों के कामकाज पर नजर रखे और उनके हाथों होने वाले अन्याय को न्यूनतम बना दे. पर कई बार अनजाने में गल्तियां हो जाया करती हैं और समझदार व बड़प्पन दिखाने वाले लोग अपनी गल्तियों का एहसास होते ही उसे कुबूल करके उसे दुरुस्त करने का काम करते हैं. पर मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि आपके कार्यकाल में जिस तरह मेरे परिवार के एक निर्दोष सदस्य पर गैंगस्टर लगा दिया गया है, उसने पुलिस व्यवस्था के प्रति मेरे सोचने के तरीके को बदल डाला है.
मैं चिंतिंत हूं कि कहीं कल को मेरे किसी परिजन के साथ कोई जान-माल का नुकसान न हो जाए. ऐसा इसलिए क्योंकि जिन कथित दबावों के बीच आप काम कर रहे हैं तो उसमें संभव है कि आप गैंगस्टर के बाद कुछ अन्य गैर-कानूनी कार्रवाइयों को भी अपने स्तर से संस्तुत कर दें. ऐसे में मैं आपसे अपील करता हूं कि कृपया अनैतिक दबावों से परे होकर आप मेरे परिजनों के जान-माल की हिफाजत की गारंटी करें. साथ ही, गैंगस्टर प्रकरण पर अगर आपके स्तर पर फिर से समीक्षा जैसी कोई स्थिति आ सकती है तो उसे शुरू करने का कष्ट करें. हालांकि मैं जानता हूं कि आप उस दौर के एक जिले के पुलिस अधीक्षक हैं जिस दौर में सच बोलने वाले को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है.
फिर भी, अपने परिजनों के जान-माल की हिफाजत संबंधी अनुरोध मैं आपसे इसलिए कर रहा हूं क्योंकि मुझे लगता है कि मेरे कजिन पर आप द्वारा गैंगस्टर लगाए जाने के बाद मेरे परिजनों की जो मानसिक हालत हुई है, उसके लिए सर्वाधिक जिम्मेदार आप ही हैं. और, दुर्भाग्यवश आपके ही हाथ में जिले के पुलिस की कमान है. मैं स्थानीय थानेदार की मेरे परिजनों के प्रति दुर्भावना से भी आपको अवगत कराना चाहता हूं. उस थानेदार ने एक बार पहले भी गैंगस्टर लगाने की धमकी देते हुए गैंगस्टर की फाइल तैयार कर अग्रसारित की थी जिसकी जानकारी समय से हो जाने के कारण उसे रुकवाया जा सका.
लेकिन इस बार सब कुछ इतने चुपचाप किया गया कि हम लोगों को भनक तब लगी जब आप हस्ताक्षर कर चुके थे. आपको जिम्मेदार लोगों ने एक निर्दोष को फंसाए जाने के बारे में आगाह भी किया लेकिन आप वही भाषा बोलते रहे जो थानेदार ने इनपुट में आपको मुहैया कराया था. मेरा एक बार फिर अनुरोध है कि एक संवेदनशील मनुष्य होने के नाते अपने फैसले पर सोचें और अगर लगे कि आपसे गलती हो गई है तो उसे कुबूल करते हुए उसकी पुनर्समीक्षा की प्रक्रिया शुरू करें.
आभार
यशवंत
एडिटर
भड़ास4मीडिया
09999330099
पूरे प्रकरण को जानने के लिए क्लिक करें- यूपी पुलिस ने निर्दोष युवक पर लगाया गैंगस्टर





