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प्रधानमंत्री भ्रष्‍ट नहीं पर गुनहगार हैं : हरीश खरे

नई दिल्ली। टीम अन्ना के आरोपों से जूझ रहे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अब उनके पूर्व मीडिया सलाहकार हरीश खरे ने ही कठघरे में खड़ा कर दिया है। प्रधानमंत्री को ईमानदारी का तमगा देते हुए खरे ने उन्हें कई परिस्थितियों के लिए गुनहगार भी माना है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की प्रशंसा करते हुए टीम अन्ना पर भी हमला किया।

नई दिल्ली। टीम अन्ना के आरोपों से जूझ रहे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अब उनके पूर्व मीडिया सलाहकार हरीश खरे ने ही कठघरे में खड़ा कर दिया है। प्रधानमंत्री को ईमानदारी का तमगा देते हुए खरे ने उन्हें कई परिस्थितियों के लिए गुनहगार भी माना है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की प्रशंसा करते हुए टीम अन्ना पर भी हमला किया।

एक समाचार पत्र में लिखे लेख में हरीश खरे ने कहा कि प्रधानमंत्री की ईमानदारी पर किसी को शंका नहीं होनी चाहिए। हालांकि उनका मर्यादित आचरण कभी-कभी उनके खिलाफ चला जाता है। प्रधानमंत्री के पद पर बैठने वाली शख्सियत को विवादों से डरना नहीं चाहिए। मनमोहन सिंह जहां तक संभव हो विवादों से बचते हैं। मनमोहन सिंह ने दूसरी पारी में कई गलतियां कीं। टीम अन्ना से वह सही तरीके से निपट नहीं पाए। नीरा राडिया टेप प्रकरण पर भी उन्होंने सौम्यता ही दिखाई जबकि यह कॉरपोरेट जगत के शातिर लोगों का षड्यंत्र था। इस कॉरपोरेट युद्ध की परिणति 2जी घोटाले के रूप में सामने आई।मनमोहन सिंह देश को विकास के उस पथ पर ले गए जहां लालची और लोभी पूंजीवाद को पनपने का मौका मिला।

खरे ने कहा कि प्रधानमंत्री लोगों को यह भी समझाने में नाकामयाब रहे कि विनोद राय की अध्यक्षता वाली सीएजी द्वारा आकड़ों को बढ़ा चढ़ाकर पेश करना संवैधानिक व्यवस्था के संतुलन के लिए खतरनाक है। टीम अन्ना को सिविल सोसाइटी मानने के लिए भी प्रधानमंत्री गुनहगार हैं। वह इनकी राजनीतिक महत्वकांक्षा को नहीं देख रहे। उनकी गलती यह रही कि वह टीम अन्ना के मीडिया प्रबंधन की क्षमता का सही आकलन नहीं कर पाए। लेख के मुताबिक 2009 में मीडिया सलाहकार के तौर पर नियुक्ति के बाद पहली मुलाकात में प्रधानमंत्री ने खरे के साथ एक घंटे तक बातचीत की। उन्होंने खरे से कहा कि अगर आपको कभी भी मेरे परिवार के सदस्यों के छल-कपट में लिप्त होने की जानकारी मिले तो आप बेझिझक मुझे बताएं। आप यह न सोचें कि मुझे अच्छा लगेगा या बुरा। खरे के मुताबिक प्रधानमंत्री की तरह ही सोनिया गांधी भी स्वच्छ राजनीति की पक्षधर हैं। यही कारण है कि इन पर आसानी से आरोप लगाए जा सकते हैं।

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