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हेडलाइंस टुडे में हेडलेस गेम, पत्रकार परेशान

यदि आप सोचते हैं कि तमाम तरह की किचकिच और गाली-गलौज सिर्फ हिंदी न्यूज़ चैनलों में होती है तो आप गलत सोचते हैं. इस मामले में कुछ अंग्रेजी के चैनल हिंदी न्यूज़ चैनलों के भी कान काट रह रहे हैं. इंडिया टुडे ग्रुप के अंग्रेजी चैनल हेडलाइंस टुडे में आजकल कुछ ऐसा ही हेडलेस गेम चल रहा है. राहुल और राहुल के बीच फुटबालबाजी हो रही है. दोनों राहुल किक मार रहे हैं और इस किकबाजी में हेडलाइंस के पत्रकार इधर-उधर लुढ़क रहे हैं.

यदि आप सोचते हैं कि तमाम तरह की किचकिच और गाली-गलौज सिर्फ हिंदी न्यूज़ चैनलों में होती है तो आप गलत सोचते हैं. इस मामले में कुछ अंग्रेजी के चैनल हिंदी न्यूज़ चैनलों के भी कान काट रह रहे हैं. इंडिया टुडे ग्रुप के अंग्रेजी चैनल हेडलाइंस टुडे में आजकल कुछ ऐसा ही हेडलेस गेम चल रहा है. राहुल और राहुल के बीच फुटबालबाजी हो रही है. दोनों राहुल किक मार रहे हैं और इस किकबाजी में हेडलाइंस के पत्रकार इधर-उधर लुढ़क रहे हैं.

लेकिन बात को आगे बढ़ाये, उससे पहले राहुल वर्सेज राहुल की कहानी आपको बता दें. एक राहुल को आप जानते ही हैं. ये राहुल हैं, राहुल कँवल जो काफी पहले से इंडिया टुडे ग्रुप से जुड़े हुए हैं और हेडलाइंस टुडे को लीड कर रहे हैं. इसके अलावा आजतक के चर्चित कार्यक्रम 'सीधी बात' को भी पेश करते हैं. इनके अलावा अब एक दूसरे राहुल की भी हेडलाइंस में एंट्री हो गयी है. इनका नाम है राहुल शिवशंकर. खास बात है कि दोनों राहुल की डेजिगनेशन 'एक्जीक्यूटिव एडिटर' ही है.

ख़ैर, अब कहानी के अगले पड़ाव पर चलते हैं. वैसे तो हेडलाइंस की हालत दूसरे अंग्रेजी चैनलों की अपेक्षा कभी अच्छी नहीं रही. लेकिन राहुल शिवशंकर के आने के बाद हालात और खराब हो गए हैं. चैनल के अंदर चिल्लम-चिल्ली ज्यादा बढ़ गयी है. गाली-गलौज की भाषा में पत्रकारों से बात की जाती है. राहुल शिवशंकर बदतमीजी से पेश आने का कोई मौका नहीं चूकते. हाल ही में हो दो महिला पत्रकारों से भी बदतमीजी की गयी (भाषाई स्तर पर). काम के बोझ से दबे हेडलाइंस के पत्रकार जब अपनी समस्या राहुल शिवशकर को सुनते हैं तो शिवशंकर किसी डॉन की तरह एक ही डायलॉग देते हैं कि डोंट गिव मी एनी एक्सक्यूज.

हेडलाइंस में न तो पत्रकारों की संख्या पर्याप्त है और न एडिटिंग बे और मशीनों की. जो मशीन है भी उनका बुरा हाल है. उसपर राहुल शिवशंकर को ग्राफिक्स का भूत सवार रहता है. मिस्टर शिवशंकर का कहना है कि स्क्रीन के कोने-कोने में मुझे ग्राफिक्स चाहिए. कोई जगह खाली नहीं रहनी चाहिए. प्रोड्यूसर को ही ग्राफिक्स भी बनाने के लिए मजबूर किया जाता है. यानी जबरदस्ती की ज़िम्मेदारी लाद दी जाती है. ऐसे में एक तरफ कंटेंट तो प्रभावित होता ही है, साथ ही पत्रकारों पर काम का बोझ इतना अधिक हो जाता है कि वे काम पूरा करने के दवाब में खाना-पीना भी नहीं खा पाते.

वैसे राहुल कँवल को टक्कर देने के इरादे से राहुल द्वितीय ने एक अच्छा खेल खेला है. राहुल कँवल का शो हेडलाइंस पर 9 बजे आता है. इसलिए राहुल द्वितीय यानी राहुल शिवशंकर ने अपना शो 'न्यूज़ नाइट' 8 बजे ही शुरू कर दिया है. हेडलाइंस के पत्रकार ऐसे हालात की वजह से हैरान, परेशान और हताश हैं. इसी वजह से कुछ पत्रकार सूचना और प्रसारण मंत्रालय और लेबर मिनिस्ट्री से मिलकर शिकायत करने की सोच रहे हैं. 

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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