Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

आवाजाही, कानाफूसी...

जमशेदपुर में जागरण व भास्‍कर के सेक्‍स लेटर बम से कोल्‍हान विवि हल्‍कान

 

झारखंड के शिक्षा हब के रुप में पहचान रखने वाले जमशेदपुर में मीडिया ने एक ऐसा सेक्‍स लेटर बम फोड़ा है जिससे कोल्‍हान विश्‍वविधालय हलकान है। एक ऐसा पत्र जिसे लिखने वाले ने सिरे से नकार दिया है, एक ऐसा पत्र जिसे जहां जाना था वहां गया ही नहीं, लेकिन कमाल देखिये दो उत्‍सा‍ही शिक्षा संवाददाता और आपस में भाई मिश्रा बंधुओं ने ऐसा खेल खेला कि उनके संपादक सिर पीटते नजर आ रहे है। अखबार पर मानहानि के केस का खतरा मंडराने लगा है। 

 

झारखंड के शिक्षा हब के रुप में पहचान रखने वाले जमशेदपुर में मीडिया ने एक ऐसा सेक्‍स लेटर बम फोड़ा है जिससे कोल्‍हान विश्‍वविधालय हलकान है। एक ऐसा पत्र जिसे लिखने वाले ने सिरे से नकार दिया है, एक ऐसा पत्र जिसे जहां जाना था वहां गया ही नहीं, लेकिन कमाल देखिये दो उत्‍सा‍ही शिक्षा संवाददाता और आपस में भाई मिश्रा बंधुओं ने ऐसा खेल खेला कि उनके संपादक सिर पीटते नजर आ रहे है। अखबार पर मानहानि के केस का खतरा मंडराने लगा है। 
 
यहां से प्रकाशित दो राष्‍ट्रीय अखबार दैनिक जागरण व दैनिक भास्‍कर ने नौ जून के अंक में एक लेटर बम फोड़ा। रांची में राजभवन के नाम कोल्‍हान विवि की प्रो‍विसी लक्ष्‍मीश्री बनर्जी के इस पत्र में विश्‍वविद्यालय के कुलपति डा. शलील राय पर आरोप लगाया गया है कि वे उनके शरीर पर नजर रख रहे हैं और उनका दैहिक इस्‍तेमाल करना चाहते हैं। कमाल देखिये की लक्ष्‍मीश्री बनर्जी ने साफ कहा है कि उन्‍होंने कोई पत्र लिखा ही नहीं है। राजभवन तक यह पत्र पहुंचा भी नहीं है। यानि प्रथम द्ष्‍टया ही सारा मामला किसी साजिश का हिस्‍सा प्रतीत हो रहा है। फिर भी दोनों अखबारों ने नमक मिर्च लगाकर इस पत्र को प्रकाशित कर दिया। सवाल उठता है कि जब पत्र ही फर्जी निकला तो उसे इतनी प्रमुखता के साथ प्रकाशित करने के पीछे मकसद क्‍या था? इस पत्र पर आधिकारिक टिप्‍पणी या तो लक्ष्‍मीश्री बनर्जी की मान्‍य होगी या राजभवन की। मिश्र बंधुओं ने राजभवन की कोई प्रतिक्रिया ली नहीं। लक्ष्‍मीश्री बनर्जी के इनकार को भी तवज्‍जों नहीं दी और पत्र को छाप दिया। 
 
उच्‍च शिक्षा जगत में अखबारों की भूमिका और मिश्र बंधुओं के आचरण पर सवाल भी उठ रहे हैं और थू-थू भी हो रही है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि दोनों अखबारों के संपादकों पर इसी तरह के फर्जी पत्र जारी कर दिये जाये तो क्‍या इतनी ही प्रमुखता से समाचार बनाये जायेंगे। दोनों संपादकों के खिलाफ निजी आरोप उनके मातहत कर्मचारी भी लगाते रहे हैं। क्‍या यह खबर नहीं होती और इस तरह की खबर को छापने की हिम्‍मत क्‍यूं नहीं दिखाते दोनों अखबारों के तथाकथित स्‍थानीय संपादक? इस प्रकरण से कुपित एक प्रोफेसर की टिप्‍पणी है कि यदि कोई आरोप लगा दे कि मिश्र बंधुओं के बीच अर्मायादित रिश्‍ते है तो क्‍या दोनों संवाददाता इस खबर को अपने-अपने अखबार में संपादक को उसी उत्‍साह के साथ बतायेंगे जैसे उन्‍होंने इस फर्जी लेटर प्रसंग में किया होगा। 
 
उच्‍च शिक्षा जगत में माना जा रहा है कि जमशेदपुर के पदस्‍थापित एक नारी ही मिश्र बंधुओं को खिलौना बनकर नचा रही है और अपने मन के मुताबिक कोल्‍हान विश्‍वविधालय से जुडी खबरों को छपवाती है। उस तेजतर्रार और संपर्कों की धनी नारी के मिश्र बंधु इतने कायल बताये जाते हैं कि जब भी मौका मिलता है दुम हिलाने में देर नहीं लगाते। दोनों के अखबारों में शायद ही ऐसा कोई दिन होगा जिस दिन उस नारी की प्रशंसा में मिश्र बंधुओं ने कसीदा नहीं गढ़ा हो। धन्‍य हो संपादक जो उसी उत्‍साह से इस मनमोहिनी नारी से जुडी खबरों को अपने यहां प्रमुखता से स्‍थान देते हैं। 
 
फिर लौटते है मूल खबर पर। एक अखबार ने सलाह दे दी कि मामले की पुलिस जांच करे। धन्‍य हो संपादक और वह संवाददाता जिसे इतना भी नहीं मालूम कि पुलिस हवा में जांच शुरू नहीं करती है बल्कि किसी शिकायतकर्ता के सामने आने के बाद ही कार्रवाई आरंभ करती है। पुलिस संवाददाता की तरह अज्ञानी नहीं होती। संवाददाता को भले पत्रकारिता के उसूल, रिपोर्टिंग के मापदंड और प्रचलित मान्‍यता का ज्ञान नहीं हो लेकिन पुलिस को इतनी जानकारी जरुर रहती है कि किसी मामले में जांच शुरू करने का क्‍या-क्‍या आधार होता है। इस मामले में तो शिकायतकर्ता कोई है ही नहीं। रिपोर्ट प्रकाशित करने में संवाददाता और संपादक की बेवकूफी सिर्फ यहीं उजागर नहीं हुई है। अखबार में तथ्‍यों को जिस हिसाब से प्रस्‍तुत किया गया है उससे साफ प्रतीत हो जा रहा कि फर्जी पत्र को मुददा बनाने में कहीं न कहीं से निहित स्‍वार्थ काम कर रहे हैं। कोल्‍हान के विश्‍वविधालय को जानने वाले हर शख्‍स की यहीं टिप्‍पणी होती है कि जमशेदपुर की मनमोहिनी नारी मिश्र बंधुओं को ही हथियार बनाकर कोल्‍हान विश्‍वविद्यालय के अधिकारियों को एक-एक कर निशाना बनाती रही है। 
 
ताजा प्रसंग उसी का यह हिस्‍सा है। कमाल देखिये की दोनों अखबार एक दिन बाद ही अपने स्‍टैंड से पीछे भी हट गये हैं। जब इस मामले में उच्‍च शिक्षा जगत के एक भी शिक्षक या कर्मचारी ने मुंह नहीं खोला तो चिरकुट और छपास किस्‍म के चंद चमचे छात्र नेताओं को आगे कर पुतला दहन प्रहसन भी मिश्र बंधुओं ने करा दिया और अखबार के संपादक ने भी बडे प्रेम के साथ उसे प्रकाशित भी किया। एक अखबार ने लिखा है कि राजभवन को पूरे मामले में संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करनी चाहिए। इसी बात को एक कदम आगे बढ़ाते हुए हम सवाल उठाते है कि क्‍या अग्रलिखित बिंदुओं पर जांच का समर्थन करेंगे दोनों अखबार?
 
जमशेदपुर के पदस्‍थापित उच्‍च शिक्षा जगत की मनमोहिनी नारी के क्‍या रिश्‍ते है अखबारों के संपादकों व पत्रकारों के साथ? फर्जी पत्र को मीडिया तक किसने पहुंचाया, अखबारों ने खबर बनाने से पहले इसकी छानबीन क्‍यूं नहीं की? जब लक्ष्‍मीश्री बनर्जी ने पत्र भेजने से इनकार कर दिया तब इस फर्जी पत्र को क्‍यों तवज्‍जो दी गई? राजभवन से प्रतिक्रिया क्‍यूं नहीं ली गई जब चिटठी राजभवन पहुंची नहीं थी तो पत्र को इतना महत्‍वपूर्ण क्‍यूं मान लिया गया? जब अखबार ने पत्र को फर्जी ही मान लिया तब फिर भी खबर प्रकाशित करने के पीछे क्‍या उदेश्‍य है? अगर रिपोर्ट गैरजिम्‍मेदार थी तो अखबार संवाददताओं पर क्‍या कार्रवाई करेंगे?
 
जमशेदपुर से अनिल कुमार की रिपोर्ट.
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...