सिलीगुड़ी से प्रकाशित हिन्दी दैनिक जनपथ समाचार के संस्थापक और पूर्वोत्तर भारत में अरूणाचल प्रदेश तक हिन्दी पत्रकारिता के जनक राजेन्द्र कुमार बैद का आज कोलकाता में निधन हो गया। वे अपने पीछे धर्मपत्नी संगीता देवी बैद, पुत्र विवेक बैद, पुत्री ममता सेठिया और दीपिका सेठिया सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गये हैं।
बैद का जन्म 10 अगस्त 1948 को कोलकाता में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा कोलकाता में हुई। बाद में उनके पिता स्वर्गीय प्रताप सिंह बैद सपरिवार सिलीगुड़ी आ गये। स्वर्गीय प्रताप सिंह बैद सिलीगुड़ी के जाने-माने उद्योगपति थे। राजेन्द्र कुमार बैद ने सिलीगुड़ी कॉलेज से बी.कॉम की शिक्षा ग्रहण की। उन्होंने 1975 से पत्रकारिता का शुभारंभ किया। सर्वप्रथम उन्होंने एक जैन पत्रिका का सम्पादन किया। इसके बाद 1979 से साप्ताहिक सिलीगुड़ी समाचार का सम्पादन एवं प्रकाशन शुरू किया। इस साप्ताहिक समाचार पत्र के प्रकाशन से उन्हें खूब ख्याति मिली। उनका मुख्य उद्देश्य सिलीगुड़ी सहित सम्पूर्ण पूर्वोत्तर भारत में एक हिन्दी दैनिक के प्रकाशन का था और अपनी कर्मशीलता और संघर्षशीलता के बदौलत उन्होंने इस कार्य को दक्षता के साथ पूरा कर हिन्दी पत्रकारिता के जगत में एक मिसाल कायम की। उनमें हिन्दी पत्रकारिता के सारे गुण कूट-कूट कर भरे हुए थे। दिसम्बर 1982 से उन्होंने हिन्दी दैनिक जनपथ समाचार का सम्पादन और प्रकाशन प्रारंभ किया। वे हिन्दी भाषियों के सशक्तिकरण के लिए हमेशा प्रयासरत रहे एवं उनके हित में काम करते रहे। वे 1980 से 1986 तक सिलीगुड़ी नगरपालिका के निर्वाचित कमिश्नर रहे।
श्री राजेन्द्र कुमार बैद ने 1993 में सिलीगुड़ी में होटल सिन्ड्रेला की स्थापना की। जनपथ समाचार और सिन्ड्रेला होटल के माध्यम से उन्होंने सैकड़ों लोगों को रोजगार दिया। उन्होंने दार्जिलिंग, सिक्किम और डुआर्स के पर्यटन और दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे के विकास में भरपूर सहयोग किया। वे रोटरी क्लब सहित विभिन्न सामाजिक एवं शिक्षण संस्थाओं से जुड़े हुए थे। उन्होंने महाकालपल्ली में आचार्य तुलसी प्राथमिक विद्यालय और प्रधाननगर में विद्यासागर प्राथमिक विद्यालय की स्थापना की। वे विभिन्न सामाजिक कार्यों और जरुरतमंदों को आर्थिक सहायता देने में हमेशा आगे रहते थे। कर्मशील, संघर्षशील, कर्मठ और निर्भीक व्यक्तित्व के धनी राजेन्द्र कुमार बैद ने अपने जीवन में कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनकी दरियादिली का वर्णन करना बहुत ही कम होगा। उन्होंने अपने कर्मचारियों की हर समस्या का समाधान बहुत ही सहृदयता से किया। कभी किसी को निराश नहीं किया। उनका जीवन खूबियों से भरा रहा। समाज का हर आदमी उनके मृदुल स्वभाव से वाकिफ थे और लोग तहे दिल से उनका आदर करते थे। समाज के हर क्षेत्र में उनका योगदान सराहनीय था। 10 अगस्त 1948 को उगा सूर्य सोमवार 11 जून 2012 को अस्त हो गया। समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने उनके असामयिक निधन पर गहरा शोक एवं संवेदना व्यक्त की है।
