एनएसटीपीएल के पास करीब पचास से ज्यादा न्यूज, नान-न्यूज, रीलिजियस, इंटरटेनमेंट आदि चैनलों के प्रसारण का ठेका है. यह ठेका है टेलीपोर्ड देकर चैनलों का ट्रांसमिशन सुनिश्चित कराना. मतलब कि एनएसटीपीएल किराए पर टेलीपोर्ड मुहैया कराता है. हर चैनल अपनी जरूरत के हिसाब से इससे बैंडविथ लेता है और अपना प्रसारण करता है. ज्यादा बैंडविथ लेने से पिक्चर क्वालिटी ज्यादा अच्छी होती है. पर बताते हैं कि एनएसटीपीएल वाले बैंडविथ देने में टंगड़ी मार देते हैं और पैसे दबा लेते हैं. खैर ये तो दूसरी कहानी है क्योंकि कहानी जब शुरू होगी तो डा. जैन तक पहुंचेगी जो जैन टीवी के मालिक हैं और जैन टीवी वालों का ही मालिकाना हक एनएसटीपीएल पर है.
ताजी सूचना ये है कि कल एनएसटीपीएल का जनरेटर खराब हो गया. सोचिए, जिस कंपनी के पास दर्जनों चैनलों के चौबीसों घंटे प्रसारण का ठेका हो, उसका जनरेटर ही खराब हो गया. मतलब ये कि एनएसटीपीएल वालों ने जनरेटर खराब होने की स्थिति में वैकल्पिक बिजली की कोई व्यवस्था नहीं कर रखी है. कल दोपहर बाद पांच बजकर चालीस मिनट से शाम छह बजे तक एनएसटीपीएल से जुड़े सभी पचासों चैनल ठप पड़े रहे. इन चैनलों को इनका कोई भी दर्शक नहीं देख पाया क्योंकि एनएसटीपीएल की अंधेरगर्दी के कारण चैनलों पर बिजली गिर पड़ी और सब कुछ ठप हो गया. एक बार होता तो चलो मान लिया जाता कि मशीन है, गड़बड़ा गई होगी. यह कांड दुबारा भी हो गया.
रात डेढ़ बजे से तीन बजे तक फिर एनएसटीपीएल अंधेरे में डूब गया और सभी चैनल ब्लैक आउट हो गए. चैनल वाले एनएसटीपीएल वालों से संपर्क कर चैनल का प्रसारण बाधित होने के बारे में पूछने लगे तो उन्हें बताया गया कि जनरेटर खराब हो गया है. जनरेटर खराब होने के नाम पर अगर एनएसटीपीएल से जुड़े सभी चैनल फिर ठप पड़ जाएं तो इसे आश्चर्य मत मानिएगा क्योंकि एनएसटीपीएल जैसी बड़ी जगह पर ऐसी छोटी मोटी घटनाएं होती रहती हैं. आप भले न मानें कि यह छोटी मोटी घटना है लेकिन एनएसटीपीएल को जो लोग ठीक से जानते हैं वे ऐसा ही मानते हैं.
लेखक यशवंत सिंह भड़ास4मीडिया के एडिटर हैं.





