Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

आवाजाही, कानाफूसी...

पीएफ विवाद में ऐतिहासिक फैसला, पत्रकार नियुक्ति के साल से पीएफ पाने का हकदार

बनारस से प्रकाशित गांडीव में लंबे समय तक काम करते रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार राधा रमण चित्रांशी अपने पीएफ की लड़ाई जीत गए हैं. प्राविडेंट फंड कमिश्नर के यहां पीएफ का यह प्रकरण चल रहा था. राधा रमण चित्रांशी ने गांडीव अखबार के खिलाफ वाद दायर किया था. इसमें उन्होंने कहा था कि वे गांडीव में वर्ष 1973 से काम कर रहे थे लेकिन उनका पीएफ 1994 से काटना शुरू किया गया. यह गलत है. उन्हें पीएफ का लाभ वर्ष 1973 से ही मिलना चाहिए.

बनारस से प्रकाशित गांडीव में लंबे समय तक काम करते रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार राधा रमण चित्रांशी अपने पीएफ की लड़ाई जीत गए हैं. प्राविडेंट फंड कमिश्नर के यहां पीएफ का यह प्रकरण चल रहा था. राधा रमण चित्रांशी ने गांडीव अखबार के खिलाफ वाद दायर किया था. इसमें उन्होंने कहा था कि वे गांडीव में वर्ष 1973 से काम कर रहे थे लेकिन उनका पीएफ 1994 से काटना शुरू किया गया. यह गलत है. उन्हें पीएफ का लाभ वर्ष 1973 से ही मिलना चाहिए.

गांडीव में समाचार संपादक रहे और उपजा के प्रदेश अध्यक्ष चित्रांशी का कहना है कि उन्हें भले ही 1994 में नियमित किया गया लेकिन उन्हें पीएफ का लाभ वर्ष 1973 से ही मिलना चाहिए. प्राविडेंट फंड कमिश्नर ने गांडीव प्रबंधन को नोटिस जारी कर उनका पक्ष जाना. चित्रांशी की तरफ से वरिष्ठ एडवोकेट दादा अजय मुखर्जी और आशीष टंडन ने पैरवी की. इन दोनों वकीलों ने चित्रांशी का पक्ष मजबूती से रखने के लिए अच्छा खासा होमवर्क व रिसर्च वर्क किया और चित्रांशी का पक्ष दमदारी से रखा.

दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्राविडेंट फंड कमिश्नर ने फैसला सुनाया कि चित्रांशी को पीएफ का लाभ वर्ष 1973 से ही मिलना चाहिए. सुबूतों से साबित हुआ कि डा. राधा रमण चित्रांशी गांडीव अखबार में वर्ष 1973 से ही कार्यरत हैं और वे बनारस के प्रमुख पत्रकारों में से एक हैं. वे भविष्य निधि की योजना के वर्ष 1973 से ही लाभान्वित होने के हकदार हैं. इस प्रकरण के बारे में दादा अजय मुखर्जी का कहना है कि यह ऐतिहासिक फैसला है और पूरे देश में संभवतः अपनी तरह का यह पहला फैसला है. इस फैसले को नजीर बनाकर देश भर के वे पत्रकार वाद दायर कर अपने पीएफ के लिए क्लेम कर सकते हैं जिन्हें नियुक्त तो पहले किया गया लेकिन पीएफ काफी बाद में काटना शुरू किया गया.

उल्लेखनीय है कि चित्रांशी गांडीव अखबार से वर्ष 2005 में रिटायर हो गए थे. बाद में प्रबंधन ने उन्हें एक एक वर्ष का सेवा विस्तार देते हुए वर्ष 2010 तक कार्य पर रखा. पिछले साल कार्यमुक्त होने के बाद चित्रांशी ने पीएफ का क्लेम किया तो देखा कि उनका पीएफ वर्ष 1994 से काटा गया. तब उन्होंने दादा अजय मुखर्जी से सलाह मशविरा करते हुए पूरे प्रकरण को प्राविडेंट फंड कमिश्नर के पास ले गए और करीब एक वर्ष तक चली सुनवाई के बाद जीत हासिल करने में सफल हुए.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...