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हेमंत प्रकरण का दूसरा पक्ष और भड़ास को भांड़गिरी की नसीहत

हेमंत तिवारी प्रकरण पर मैं कुछ कहना चाह रहा हूं. विधानसभा में हेमंत प्रकरण को लेकर हंगामा की खबर को इस तरह आपके यहां छापा गया है जैसे बोफर्स तोप का मामला हो या कोई बलात्कार का मामला जिस मामले में सरेआम किसी की इज्जत लुटने के साथ ही पूरे कानून-व्यवस्था की चिंदी-चिंदी बिखेर दी गयी हो. सवाल यह है कि धुत्त शराबखोरी के चलते इज्‍जत केवल हेमंत की लुटी है या फिर पत्रकारिता की? पत्रकारिता की इज्जत दायित्वों का निर्वहन करते धर्मवीर सिंह के मामले में लुटी जिसे गोरखपुर के एसएसपी आशुतोष ने सरेआम हजारों लोगों के सामने लठिया-गरियाया. बाराबंकी में अवैध खनन के कवरेज करने वाले पत्रकारों को वहां के एडीएम की साजिश के चलते पत्रकारों को फंसा दिया गया.

हेमंत तिवारी प्रकरण पर मैं कुछ कहना चाह रहा हूं. विधानसभा में हेमंत प्रकरण को लेकर हंगामा की खबर को इस तरह आपके यहां छापा गया है जैसे बोफर्स तोप का मामला हो या कोई बलात्कार का मामला जिस मामले में सरेआम किसी की इज्जत लुटने के साथ ही पूरे कानून-व्यवस्था की चिंदी-चिंदी बिखेर दी गयी हो. सवाल यह है कि धुत्त शराबखोरी के चलते इज्‍जत केवल हेमंत की लुटी है या फिर पत्रकारिता की? पत्रकारिता की इज्जत दायित्वों का निर्वहन करते धर्मवीर सिंह के मामले में लुटी जिसे गोरखपुर के एसएसपी आशुतोष ने सरेआम हजारों लोगों के सामने लठिया-गरियाया. बाराबंकी में अवैध खनन के कवरेज करने वाले पत्रकारों को वहां के एडीएम की साजिश के चलते पत्रकारों को फंसा दिया गया.

सड़क-चौराहे पर दारू पीकर आधी रात गुंडई करते हेमंत तिवारी के मामले को इसलिए तूल दिया जा रहा है कि वह लखनऊ के पत्रकार हैं और पत्रकारों के नेता बनते फिरते हैं. धर्मवीर के मामले में गोरखपुर के एसएसपी ने तो अपनी गलती मानते हुए धर्मवीर सिंह के पैर छूकर माफी भी कर ली थी, लेकिन हेमंत तिवारी ने अपनी करतूत पर शर्मिंदगी जाहिर करने के बजाय उन युवकों को पुलिस-अफसरों के बल पर दंडित करा दिया. एक तरह से उन्होंने यह सवाल उछाल दिया कि तुम लोगों की इतनी हिम्मत कैसे हुई कि तुम मेरी तरह धुत्त होकर सड़क-चौराहे पर हंगामा करते फिरो. एक नशेड़ी, धुत्‍त हंगामी शख्‍स की करतूत वाले मामले से पत्रकारिता की पुनीत भावना की अपूरणीय क्षति कैसे हुई, यह मेरी समझ में अब तक नहीं आ रहा है.

सवाल यह है कि हेमंत-कांड में बेइज्जती किसकी हुई. लम्बी् बीमारी के बाद दिवंगत साथी रवि वर्मा समेत दो पत्रकारों के परिजनों को सरकारी आर्थिक राहत दिलाने के लिए 186 पत्रकारों की अर्जी को फाड़ देने वाले हेमंत तिवारी की बेइज्जती हुई है, या फिर पत्रकारिता में शुचिता-सम्मान के लिए नाम पर अपनी निजी दूकान चला रहे हेमंत की, जो मुख्यामंत्री और अफसरों के सामने दुम हिलाते रहते हैं. यूपी भवन में अपने धंधा का शोरूम और गोदाम चला रहे हेमंत तिवारी कितने दिन-हफ्तों तक दिल्ली में जमे रहते हैं, इसका हिसाब कौन बतायेगा. पुलिस और प्रशासन की करतूतों के चलते प्रताडि़त पत्रकारों के मामलों पर आज तक हेमंत की चुप्पी क्यों नहीं टूटती.

आप सभी को सोचना चाहिए, पड़ताल करना चाहिए कि हेमंत के साथ वह कांड क्यों हुआ? मनबढ़ और दबंग हेमंत के चलते पुलिस ने एक छात्र को जेल की सींखचों तक पहुंचा दिया है, क्या आपको जानकारी है? इस करतूत के चलते अभी कम से कम पांच युवक घर-बार छोड़कर फरार हैं. उनकी पढ़ाई खत्म होने की कगार पर है. क्या आपको पता है कि पुलिस और प्रशासन के अफसरों के साथ बगलगीर हेमंत के चलते ही यह लोग अब हमेशा-हमेशा के लिए अपराध की राह पर चले जाएंगे?  मैं नहीं कहता कि वह लड़के निर्दोष हैं. ठीक उसी तरह यह भी कि मैं उस कांड में हेमंत को सिरे से गलत नहीं बताता हूं. लेकिन कौन नहीं जानता है कि हेमंत रोज सड़क पर अपने साथियों के साथ शराबखोरी करते हैं, सड़क-चौराहे पर गालियां देते हैं और हर महीने तीन-चार बार देर रात मारपीट हो जाती है.

अगर हेमंत शराब में धुत्त होकर गालियां देते हैं और मारपीट करते हैं, तो अगर इन युवकों ने भी ऐसा किया तो क्या गुनाह किया कि प्रशासन-पुलिस उन्हें तक जेल में ठूंस दे. कोई पत्रकार  अफसर और पुलिसिये लोगों के साथ देर रात तक जाम लड़ाए, हुल्लड़ करे तो ठीक और यही सब ये युवक करें तो गलत? सवाल यह है कि अगर शराब‍ के हुल्लड़ में यह कांड हुआ तो शांतिभंग के आरोप में हेमंत को भी क्यों  नहीं हवालात में बंद किया गया? बसपा सरकार में एक बड़े पत्रकार के बेटे को आधी रात पालिटेक्निक चौराहे पर पास अश्लील हरकतें करते पकड़ा गया. सैकड़ों नागरिकों ने उसे पकड़ा था. लेकिन पुलिस ने मामला रफादफा कर दिया.

जनाब, एक नहीं, हजार मामले हैं ऐसे. आप पावरफुल हैं तो आपके हजार गुनाफ माफ हो जाएं. अगर आप यही चाहते हैं तो भड़ास के बजाय भांड़गिरी का काम ही कर लीजिए ना. कौन मना करता है आपको. वैसे भांड़गिरी तो आप खुद हेमंत की कर ही रहे हैं. और अब हेमंत तिवारी के पक्ष में आ गये हैं कांग्रेसी प्रमोद तिवारी. कौन नहीं जानता कि जिस तरह की पत्रकारिता में हेमंत का नाम है, ठीक वैसे ही राजनीति में प्रमोद का. बसपा वाले स्‍वामी प्रसाद मौर्य ने भी हेमंत का इसलिए साथ दिया, क्‍योंकि बसपा में केवल हेमंत ही मायावती की प्रेस कांफ्रेंस में उनके पक्ष में बयाननुमा सवाल उठाते-बताते रहे हैं. भड़ास पर ही देख रहा हूं कि ईमानदारी का ढोंग करने वाले लोग हेमंत जैसे लोगों के पक्ष में, समर्थन में खबर लिख लिखा रहे हैं.

कई बड़े पत्रकारों की ऐय्याशी के किस्से जानता हूं. बड़े पत्रकारों की ऐय्याशी का अंदाज आप लोगों को इलाहाबाद-कांड से ही चल सकता है. वहां समाजवादी पार्टी के एक तत्‍कालीन सांसद की भतीजी की शादी हो रही थी. एक होटल में. एक पत्रकार साहब उस होटल के ही एक कमरे में थे. आदत के मुताबिक धुत्‍त थे. शादी में शरीक एक लड़की अचानक से उस पत्रकार के कमरे में गलती से चली गयी. कहने की जरूरत नहीं कि उसके बाद उस पत्रकार ने उस लड़की के साथ क्‍या-क्‍या नहीं किया. लेकिन बदहवासी में यह लडकी जब बहार निकली तो उस नेता ने हंगामा किया. बताते हैं कि पत्रकार के सारे कपड़े फाड़े गये और जमकर जूतों-लातों-घूसों से पीटा गया. बाद में इस नेता ने इस समाचारपत्र संस्‍थान के मालिकों से सीधे बात की और इलाहाबाद से लौटने से पहले ही उन पत्रकार को संस्‍थान से खुद के निकाले जाने की सूचना मिल गयी.

आखिर में, कहना चाहूंगा कि हेमंत प्रकरण में भड़ास पर सच्चा और दूसरा पक्ष सामने नहीं आ रहा. लखनऊ के बाकी पत्रकार भी इसलिए चुप्पी साधे हुए हैं कि उन्हें लखनऊ में पत्रकारिता करनी है और हेमंत तिवारी का किसी न किसी रूप में सहयोग लेना पड़ सकता है. पर आपको यह सब इसलिए मेल कर रहा हूं ताकि भड़ास पर पूरे प्रकरण का दूसरा पक्ष भी आ जाए. उम्मीद है इसे आप प्रकाशित करेंगे. अपना नाम इसलिए नहीं दे रहा क्योंकि नाम महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण है तथ्य व घटनाक्रम, जिसे सामने आना चाहिए और सबको मालूम होना चाहिए. अगर आप नाम के साथ ही छापने की शर्त रख देंगे तो अपना नाम भी आपको मेल कर दूंगा.

लखनऊ के एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. अगर उपरोक्त कही गई बातों पर किसी को कोई आपत्ति हो तो वह अपनी बात, अपना पक्ष [email protected] पर भेज सकता है. हेमंत तिवारी से संबंधित अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें- भड़ास पर हेमंत

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