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ज्यादा विज्ञापन दिलाने के प्रस्ताव पर स्थगित हो गई भास्कर की नैतिकता

: पत्रकारिता की एबीसीडी न जानने वाली महिला को रख लिया पत्रकार : सरकारी अधिकारी व क्षेत्रवासियों ने अभी तक नहीं किए हैं उक्त पत्रकार के दर्शन : रोहतक जिले के महम कस्बे में आजकल दैनिक भास्कर समाचार पत्र एक ऐसी महिला के सहारे चल रहा है जिसको पत्रकारिता की एबीसीडी भी मालूम नहीं। पिछले कई महीनों से उक्त महिला के नाम पर समाचार पत्र में खबरें प्रेषित की जाती रही हैं लेकिन किसी भी क्षेत्रवासी ने आज तक उक्त महिला पत्रकार की शक्ल सूरत तक नहीं देखी है। लोगों की बात छोड़ दी जाए तो किसी अधिकारी व पुलिस कर्मी ने भी उक्त महिला के दर्शन नहीं किए हैं। यह सब बात भास्कर के स्थानीय संपादक, Žब्यूरो चीफ व अन्य सदस्यों को बखूबी मालूम है लेकिन वे बेबस हैं। इसका कारण भास्कर को निरंतर रूप से हर वर्ष मिलने वाला विज्ञापन है।

: पत्रकारिता की एबीसीडी न जानने वाली महिला को रख लिया पत्रकार : सरकारी अधिकारी व क्षेत्रवासियों ने अभी तक नहीं किए हैं उक्त पत्रकार के दर्शन : रोहतक जिले के महम कस्बे में आजकल दैनिक भास्कर समाचार पत्र एक ऐसी महिला के सहारे चल रहा है जिसको पत्रकारिता की एबीसीडी भी मालूम नहीं। पिछले कई महीनों से उक्त महिला के नाम पर समाचार पत्र में खबरें प्रेषित की जाती रही हैं लेकिन किसी भी क्षेत्रवासी ने आज तक उक्त महिला पत्रकार की शक्ल सूरत तक नहीं देखी है। लोगों की बात छोड़ दी जाए तो किसी अधिकारी व पुलिस कर्मी ने भी उक्त महिला के दर्शन नहीं किए हैं। यह सब बात भास्कर के स्थानीय संपादक, Žब्यूरो चीफ व अन्य सदस्यों को बखूबी मालूम है लेकिन वे बेबस हैं। इसका कारण भास्कर को निरंतर रूप से हर वर्ष मिलने वाला विज्ञापन है।

यहां हम आपको बताते चले कि दैनिक भास्कर समाचार पत्र के कार्यरत पत्रकार बिजेन्द्र दहिया का पिछले दिनों गुरू जम्बेश्वर यूनिवर्सिटी हिसार में जनसंपर्क अधिकारी की पोस्ट पर चयन हो गया। उनके चयन के बाद भास्कर महम के पत्रकार की जगह खाली हो गई। इस दौरान कुछ अन्य पत्रकारों ने भास्कर में ऐसी खबरों को भेजकर प्रमुखता से प्रकाशित करवाना शुरू कर दिया जिन्हें भास्कर के पूर्व पत्रकार ने किसी कारणवश दबा रखा था। ऐसी खबरों का प्रकाशन होने के बाद यूनिवर्सिटी में चयनित पत्रकार हिल गया और उसने एक बार फिर भास्कर पर एकाधिकार जमाना चाहा। उसने पानीपत संपादकीय कार्यालय में बैठे अपने खास आदमियों से संपर्क साध अपनी पत्नी का नाम बतौर पत्रकार चलाने की गुहार लगाई।

उसने कहा कि नाम उसकी पत्नी का चलेगा लेकिन क्षेत्र के समाचार वह पहले की अपेक्षा निरंतर रूप से भेजता रहेगा। भास्कर वालों ने उसकी इस बात को अनसुना किया तो उसने भास्कर मैनेजमैंट को एक और लालच दे दिया जिस पर भास्कर की टीम हवा से धरातल पर आ टिकी। उसने कहा कि उसका चयन गुरू जम्बेश्वर यूनिवर्सिटी हिसार में हो गया है। वहां से हर वर्ष कई लाख का विज्ञापन विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित होता है। उसने कहा कि अन्य समाचार पत्र की जगह वह अधिकारियों से संपर्क कर भास्कर को ज्यादा विज्ञापन दिलवा देगा। बस यही बात भास्कर वालों के दिलों में घर कर गई और उन्होंने महम पत्रकार की पोस्ट पर उसकी पत्नी इंदू दहिया का चयन कर लिया।

पत्रकारिता के बारे में कखग भी नहीं जानने वाली एक महिला का चयन हुआ तो सभी ने भास्कर के लालची कदम पर हैरानी व्यक्ति की। अब हाल यह है कि यूनिवर्सिटी में नौकरी करने वाला पूर्व पत्रकार अब शाम को डयूटी से आने के बाद सभी समाचार अपने हाथों से लिखकर भेजता है। समाचार एकत्रित करने के लिए उसने 2 अन्य शहर के युवकों को बगैर किसी तनख्वाह के रख रखा है जो पूरा दिन कस्बे में इधर उधर कैमरा उठाए घूमते रहते हैं। इस पूरे प्रकरण में खास बात यह है कि भास्कर के लालची कदम ने बुद्धिजीवी कहने वाले मीडिया जगत में ऐसे लोगों को स्थापित कर दिया है जो सरकारी तनख्वाह लेने के बाद भी अपनी पत्नी के नाम पर पत्रकारिता में बखूबी जमे हुए हैं।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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