दो महीना पहले भड़ास में आर्यन चैनल में छंटनी की आशंका की खबर आई थी और जून में इसे प्रबंधन ने लागू कर दिया. इस बार इसके संध्याकालीन पेपर आर्यन सन्देश के डेस्क से मयंक, आशा वर्मा, नीतू सिन्हा, रिपोर्टर अभिजीत पाण्डेय और कार्टूनिस्ट पंकज को निकाल दिया गया. न कोई तर्क नहीं कोई कारण. कोई आरोप भी नहीं. मनमौजी मालिक का मनमौजी फैसला. कोई भी प्रबंधन कामचोरी का ही बहाना बना सकता है. वो भी नहीं. जो कामचोर हैं वे इस बार भी बच गए. प्रबंधन ने लिखित एक्जाम भी लिया था लेकिन ये सब अच्छा नंबर लाने वाले थे. कम या शर्मनाक नम्बर लाने वाले तो अभी भी काम कर ही रहे हैं.
मालिक से जुड़े सूत्र बताते हैं कि पेपर हर माह लाखों के घाटे में जा रहा है. लेकिन उनके सलाहकार उचित उपाय खोजने के बदले बगैर कुछ सोचे-समझे जिस-तिस को निकाल कर आतंक का माहौल बचे-खुचे पत्रकारों के लिए बना रहे हैं. प्रबंधन इसकी कमाई पर निर्भर भी नहीं है क्योंकि, सूत्रों के मुताबिक़ इसमें एक चर्चित नेता, एक भोजपुरी गायक और एक बिल्डर का पैसा लगा हुआ है. पैसा अपार्टमेन्ट बनाकर बेचने से ही आता है. चैनल के ऑफिस में ही इनकी हाउसिंग का भी ऑफिस है जहां ज्यादा आना-जाना होता है लोगों का. पेपर या चैनल उनके लिए मुखौटा और पत्रकारों के लिए रोजी-रोटी का साधन है.
पटना से एक पत्रकार की सूचना पर आधारित






