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एसपी साहब को पत्रकारों से परहेज, एक समय में एक पत्रकार को मिलने की इजाजत

शाहजहांपुर। सपा शासन में मीडिया को काफी अहमियत दी जाती है। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने तो अपने शासनकाल में पत्रकारों के हित के लिए काफी कुछ किया था। बसपा की सरकार आई तो अफसरों ने शासन की मंशा के अनुरूप मीडिया से दूरियां बढ़ा लीं, जिसका बसपा को खामियाजा भी भुगतना पड़ा। अब फिर सपा की सरकार है। तीन महीने हो गए सपा की सरकार बने हुए, लेकिन अफसरों पर अभी भी बसपा का ‘रंग’ उतरा नहीं है। खुद सपा सरकार भी कई बार अफसरों को हिदायत दे चुकी है कि वह सुधर जाएं।

शाहजहांपुर। सपा शासन में मीडिया को काफी अहमियत दी जाती है। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने तो अपने शासनकाल में पत्रकारों के हित के लिए काफी कुछ किया था। बसपा की सरकार आई तो अफसरों ने शासन की मंशा के अनुरूप मीडिया से दूरियां बढ़ा लीं, जिसका बसपा को खामियाजा भी भुगतना पड़ा। अब फिर सपा की सरकार है। तीन महीने हो गए सपा की सरकार बने हुए, लेकिन अफसरों पर अभी भी बसपा का ‘रंग’ उतरा नहीं है। खुद सपा सरकार भी कई बार अफसरों को हिदायत दे चुकी है कि वह सुधर जाएं।

खैर, बात करते हैं कि अपने यहां के पुलिस अधीक्षक डा. एके राघव की। डा. राघव की गिनती पुलिस के तेज तर्रार आईपीएस अधिकारियों में होती है। यह भी सच है कि उनके आने के बाद जिले में क्राइम कंट्रोल हुआ है। सरेआम गुंडई और नंगई पर अंकुश लगा है। लेकिन मीडिया से वह भी भड़क जाते हैं। अभी पिछले हफ्ते की बात है। रायबरेली जिले के एक ब्रेड वाहन चालक को रात में रोडवेज पर कुछ सिपाहियों ने ही लूट लिया था। वह एसपी के पास प्रार्थना पत्र लेकर गया तो पीछे से पत्रकार भी पहुंच गए। जब चालक अपबीती सुना रहा था तो कुछ फोटोग्राफरों ने फोटो खींच लिए। फ्लैश पड़ते ही एसपी साहब नाराज हो गए। बोले हिम्मत कैसे हुई मेरे आफिस में घुसकर फोटो खींचने की। गुस्से में उन्होंने चालक की बात भी ढंग से नहीं सुनी।

चालक को तो खैर अब तक न्याय नहीं मिला, लेकिन साथ में पत्रकारों पर भी वैन लग गया। एसपी ने पीआरओ से कह रखा है कि अब सिर्फ एक-एक पत्रकार ही अंदर आ सकता है। प्रिंट मीडिया वालों का तो एक-एक से भी काम चल जाता है। लेकिन दिक्कत हो रही है इलेक्ट्रानिक मीडिया वालों को। उन्हें तो कैमरा मैन भी साथ रखना पड़ता है। पत्रकारों पर तो वैन है, लेकिन नेताओं पर नहीं। सत्ताधारी नेता अपनी पूरी फौज के साथ घंटों एसपी साहब के साथ आफिस में बतियाते रहते हैं। एसपी के इस नए फरमान से पत्रकारों में नाराजगी है। अगर एसपी एक-एक पत्रकार से मिलने वाले अपने फैसले पर कायम रहे तो सवाल उठता है कि कोई गुड वर्क करने के बाद वह प्रेसवार्ता कैसे कर पाएंगे। उनका कोई बड़ा अफसर आएगा तो क्या वह एक-एक पत्रकार को बुलवाकर अफसर के सामने पेश कराएंगे। अगर एसपी साहब अपने इसी फैसले पर अटल रहे तो हो सकता है कि आने वाले दिनों में पत्रकार प्रेसवार्ता से ही किनारा कर जाएं या पुलिस की विज्ञप्तियां ही छापनी बंद हो सकती हैं।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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