श्रीमान भड़ास मीडिया प्रभारी यशवंत जी, सादर नमस्कार मैं कई बार अपने दिल की भड़ास आपकी लोकप्रिय वेबसाइट पर भेज चुका हूं, लेकिन मेरी दिल की बात आज तक प्रकाशित नहीं की गई। मुझ गरीब से ऐसी क्या गलती हो गई। हम ग्वालियर से प्रकाशित दैनिक हिन्दी समाचार पत्र दैनिक आदित्याज में काम करते थे। जिन्हें विगत माह नौकरी से एक साथ निकाल दिया गया। उसके मालिक दीपेन्द्र टमोटिया, जीएम दुबे जी, संपादक अरविन्द चौहान जी हैं।
हम लोग अखबार के शुरुआत से ही काम कर रहे थे, लेकिन हम लोगों को पांच-छह माह से वेतन भी नहीं दिया गया। वेतन मांगने पर हमें हर माह हमेशा तारीख ही मिलती रही। जब हम लोगों ने परेशान होकर काम बंद कर दिया तो अखबार के माननीय संपादक अरविंद चौहान ग्वालियर से बाहर चले गए और जीएम साहब को फोन किया तो उन्होंने फोन पर कहा कि वे दिल्ली में है। आकर बात करेंगे, आप लोग काम करें। लेकिन जब हम लोगों ने काम करने से इनकार कर दिया तो जीएम साहब तुरंत आ गए और कहने लगे कि मैं अभी ही ट्रेन से उतर कर चला आ रहा हूं।
खैर, हम लोगों को नौकरी से निकाले जाने का दुख नहीं है। दुख तो इस बात का है कि हम और हमारे परिवार को गुजारा कैसे चले, क्योंकि हम लोगों का पांच-छह माह का वेतन भी नहीं दिया गया। जबकि हमें नौकरी से निकालते समय कहा गया था कि आप सभी का वेतन दो-चार दिन में दे दिया जाएगा। जब हम लोग पांच दिन बाद अपना वेतन लेने पहुंचे तो हमसे कहा गया कि अगले हफ्ते आना, मालिक बाहर गए हुए हैं। इसी तरह आज दो माह होने को आए पर अब तक हमलोगों का बकाया वेतन नहीं मिला। अब आप ही बताएं हम लोग क्या करें? आप हमारी व्यथा समझ सकते हैं। अब आप ही हमारी मदद कर सकते हैं।
अमर प्रजापति





