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सुख-दुख...

दिनकर जी का जन्‍म दिन और छप्‍पन भोग

किसी चुनाव के दौरान अगर जन्‍मदिन पड़ जाए तो क्‍या कहना? और जन्‍मदिन पत्रकार का हो तो फिर तो सोने पर सुहागा है. मेरठ में दैनिक जागरण के एक वरिष्‍ठ पत्रकार के जन्‍मदिन मनाने की चर्चा चहुं ओर छाई हुई है. पचास से ज्‍यादा बसंत देख चुके इन पत्रकार महोदय को अचानक जन्‍मदिन मनाने की बात सूझ गई. सूझे भी क्‍यों नहीं निकाय चुनाव का दौर जो चल रहा है. फिर क्‍या था? इसके पहले के जन्‍म दिन भले ही न मने हों, पर इस बार जन्‍मदिन मनाने में इन्‍होंने बिल्‍कुल कोताही नहीं बरती. पर अजीब बात यह हो गई कि पत्रकार महोदय ने मेरठ भर के धन्‍ना सेठों को तो जन्‍मदिन की पार्टी में बुलाया पर अपने साथियों को भूल गए. 

किसी चुनाव के दौरान अगर जन्‍मदिन पड़ जाए तो क्‍या कहना? और जन्‍मदिन पत्रकार का हो तो फिर तो सोने पर सुहागा है. मेरठ में दैनिक जागरण के एक वरिष्‍ठ पत्रकार के जन्‍मदिन मनाने की चर्चा चहुं ओर छाई हुई है. पचास से ज्‍यादा बसंत देख चुके इन पत्रकार महोदय को अचानक जन्‍मदिन मनाने की बात सूझ गई. सूझे भी क्‍यों नहीं निकाय चुनाव का दौर जो चल रहा है. फिर क्‍या था? इसके पहले के जन्‍म दिन भले ही न मने हों, पर इस बार जन्‍मदिन मनाने में इन्‍होंने बिल्‍कुल कोताही नहीं बरती. पर अजीब बात यह हो गई कि पत्रकार महोदय ने मेरठ भर के धन्‍ना सेठों को तो जन्‍मदिन की पार्टी में बुलाया पर अपने साथियों को भूल गए. 

अब आप भी सोच रहे होंगे कि आखिर जागरण के कौन सूरमा हैं. तो अब आपको ज्‍यादा इंतजार नहीं कराते हैं. इस बर्थडे ब्‍वाय का नाम है दिनेश दिनकर. जनाब दैनिक जागरण, मेरठ में सिटी चीफ हैं. सिटी में इनकी बढि़या पकड़ है. जनाब पचास पार हैं. अब जन्‍मदिन के दौरान निकाय चुनाव आ गया या चुनाव के दौरान जन्‍मदिन आ गया यह तो बाद में समझने समझाने वाली बात है, पर जन्‍मदिन तो था ही. इस जन्‍मदिन की तैयारी भी इन्‍होंने बड़ी ही गुपचुप ढंग से की. पर सूंघने वाले सूंघ ही लिए और जनाब की पोल खुल गई. और चर्चा हनुमानजी की पूंछ की तरह लगातार लंबी होती चली गई.  

वैसे बताया जा रहा है कि दैनिक जागरण के निदेशक तरुण गुप्‍ता जी विदेश में थे. निकाय चुनाव का मौसम भी था, तो दिनकर जी को जन्‍मदिन मनाने का मौका बेहतर लगा. वैसे भी पचास पार होने के बाद जन्‍मदिन मनाने का मौका तो बिरले के हाथों ही लगता है. दूसरे अगले साल के जन्मदिन पर संभावना भी नहीं है कि कोई चुनाव पड़े, लिहाजा अपने जन्‍मदिन पर इन्‍होंने मेरठ भर के दर्जनों मेयर और पार्षद प्रत्‍याशियों को जन्‍मदिन का नेवता बांट दिया. पुलिस अधिकारियों को भी बुलाया. बिल्‍डर भी आए, ज्‍वेलर्स भी आए. जो लोग दिनकर जी के जन्‍मदिन में शामिल हो सकने लायक औकात रखते थे, मतलब असामी थे, सभी को नेवत दिया गया. पर सहकर्मियों को जन्‍मदिन पार्टी की भनक तक लगने नहीं दी गई.

अब जागरण जैसे अखबार के सिटी चीफ का जन्‍मदिन हो तो भला खाली हाथ कहां कोई आएगा. यहां भी ऐसा ही हुआ. प्रत्‍याशी आए, पुलिस वाले आए, बिल्‍डर आए, ज्‍वेलर्स आए, धनपशु भी आए. सबने अपनी अपनी औकात और श्रद्धा के अनुरूप बर्थडे ब्‍वाय को जन्‍मदिन का प्रसाद चढ़ाया. जन्‍मदिन का 56 भोग लगा कालीपलटन स्थित औघनाथ धाम में. अतिथियों ने वृंदावन से मंगवाए गए डांस पार्टी का मजा भी लिया. अमूमन औघड़नाथ में 56 भोग दिन में बनता है, पर बर्थडे ब्‍वाय जागरण के थे तो ये भोग रात को लगाया गया. जमकर बर्थडे ब्‍याय को विश किया गया. पर लाख कोशिशों के बाद भी इसकी भनक मीडियावालों को लग ही गई. 

जब खबर मीडियावालों के हाथ लगी तो फिर छुपती कहां? एक से होते हुए दूसरे तक पहुंची. चर्चा पर चर्चा. अब साथियों को जन्‍मदिन की खुशी कम जन्‍मदिन में मिले तोहफो का गम ज्‍यादा होने लगा. मेरठ के मीडिया मंडी में अनुमान लगाया जाने लगा कि फिफ्टी प्‍लस के बर्थडे ब्‍वाय ने कितना माल पीटा है. अंदाजा लाखों में लगाया गया. अब इतना माल पीटे जाने की खबर मिली तो कई साथियों के पेट में दर्द होने लगा, कई को खट्टे डकार आने लगे. खैर, अब जागरण जैसे संस्‍थान में कार्यरत हैं दिनकर जी तो फिर दिक्‍कत क्‍या है. इस संस्‍थान के पत्रकार तो कभी भी जन्‍मदिन मना सकते हैं. कब्र में पांव लटके होने तक. ये अमर उजाला थोड़े ही है कि इस तरह की शिकायत मिलने पर कार्रवाई करेगा. जागरण है जो मन आए वो करिए यहां नियम, नैतिकता, नीति की कोई जरूरत नहीं पड़ती.

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